रूसा सिस्टम को शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज का बड़ा बयान
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शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज ने रूसा सिस्टम को लेकर बड़ा बयान दिया है। शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज ने धर्मशाला सचिवालय में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि हिमाचल सरकार रूसा सिस्टम को खत्म नहीं कर सकती है।
यह केंद्र सरकार का अभियान है। रूसा के अंतर्गत सेमेस्टर सिस्टम की समीक्षा करने के लिए बनाई गई कमेटी ने रिपोर्ट बना दी है। रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद जल्द ही इस पर निर्णय लिया जाएगा।
भाजपा के सीएम पद के उम्मीदवार रहे प्रेम कुमार धूमल की ओर से चुनाव से पहले रूसा सिस्टम को खत्म करने के वायदे के बाद भाजपा सरकार के यू टर्न लेने के प्रश्न पर भारद्वाज ने कहा कि विजन डाक्यूमेंट में ऐसा कोई वायदा नहीं किया था। पार्टी जिस बात को मानेगी, वही महत्वपूर्ण होता है। नेता तो कुछ भी बोल सकता है।
तबादला नीति में बदलाव पर कर रहे विचार
धर्मशाला स्थित डिविजनल कमिश्नर का पिछले चार महीने से कार्यालय में निरंतर न बैठने के प्रश्न पर भारद्वाज ने कहा कि मामला उनके ध्यान में है। इसके बारे में वह सीएम से बात करेंगे। शिक्षा बोर्ड में चेयरमैन पद बार-बार बदलने पर कहा कि यह व्यवस्था को दुरुस्त करने का हिस्सा है।
तबादला नीति में बदलाव पर शिक्षा मंत्री ने कहा कि इस पर सरकार विचार और अध्ययन कर रही है। अन्य राज्यों की तबादला पॉलिसी का भी अध्ययन कर रहे हैं। इस पर जल्द ही निर्णय लिया जाएगा।
स्कूलों में एनसीईआरटी की किताबें पढ़ाएंगे
भारद्वाज ने कहा कि मुख्यमंत्री आदर्श विद्या केंद्र योजना के तहत प्रदेश में पायलट स्तर पर दस स्कूल खुलेंगे। इसके लिए सरकार ने 25 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। कैबिनेट में मंजूरी देकर योजना पर काम शुरू किया जाएगा।
प्रदेश में शिक्षा की गुणवत्ता के लिए बोर्ड के सभी स्कूलों में अब एनसीईआरटी की किताबों से ही पढ़ाई करवाई जाएगी। प्रदेश में सरकारी स्कूलों में घटती संख्या को ध्यान में रखकर पाठ्यक्रम में भी बदलाव किया जा रहा है।
धर्मशाला सचिवालय में हर सप्ताह बैठेंगे मंत्री
स्कूलों में ऐसा पाठ्यक्रम पढ़ाया जाएगा, जो भविष्य में सीबीएसई सहित अन्य बोर्डों के विद्यार्थियों और प्रतियोगी परीक्षाओं में आगे बढ़ने के लिए सहायक होगा। शिक्षा मंत्री ने कहा कि धर्मशाला सचिवालय में हर सप्ताह एक मंत्री बैठेगा।
इस दौरान वह अपने विभागीय कार्य करने के साथ लोगों की समस्याएं सुनेगा। कांगड़ा जिला से संबंधित तीनों मंत्रियों में से कोई न कोई मंत्री हर सप्ताह धर्मशाला मिनी सचिवालय में बैठेगा जबकि धर्मशाला दौरे पर आने वाले मंत्री अन्य कार्यों के अलावा सचिवालय में मौजूद रहकर जन समस्याएं सुनेंगे।