एचपीयू को प्रदेश सरकार का झटका, विभाग ने ये फीस लेने पर लगाई रोक
आर्थिक तंगी के चलते हर साल घाटे का बजट पास करने वाले हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) को प्रदेश सरकार ने एक और झटका दिया है। शिक्षा निदेशक ने 20 जनवरी को पत्र जारी कर एचपीयू से संबद्ध सरकारी कॉलेजों की संबद्धता फीस और इंस्पेक्शन फीस लेने पर रोक लगाने का फरमान जारी किया है।
एचपीयू विकास फंड लेने पर पहले ही लगा दी गई है। इसमें सरकार ने कॉलेजों की इस राशि को सरकार से हर साल मिलने वाले वार्षिक अनुदान में से लेने की बात की है। जबकि हालात है ये हैं कि सरकार से मिलने वाले सौ करोड़ के अनुदान से विवि अपने कर्मचारियों के वेतन और पेंशन तक का भुगतान नहीं कर पा रहा है।
ऐसे में विवि के सीमित आय संसाधनों में शामिल संबद्धता फीस को भी न लेने से एचपीयू को सालाना करीब तीन से चार करोड़ का घाटा होेना तय है। इससे जाहिर है कि फीस न लेने पर इन कॉलेजों में नए कोर्स शुरू होने पर संबद्धता फीस माफ करनी पड़ेगी या अपने खाते से ही देनी पड़ेगी।
प्रदेश भर में 130 कॉलेजों से फीस लेता है एचपीयू
वहीं अस्थायी मान्यता दिए जाने पर इंस्पेक्शन का सारा खर्च भी स्वयं ही उठाना पड़ेगा। एचपीयू की अकादमिक ब्रांच हर साल सरकारी और निजी कॉलेजों को संबद्धता देने पर औसतन बीस हजार या इंस्पेक्शन की अलग से फीस लेती है।
इसी के आधार पर यूजीसी के मानकों के तहत कोर्स शुरू करने को सुविधाएं कॉलेज के पास है या नहीं, इसकी स्थायी संबद्धता दी जाती है। प्रदेश भर में 130 ऐसे सरकारी कॉलेज चल रहे हैं, जिनसे विवि नए कोर्स शुरू करने पर संबद्धता फीस और इंस्पेक्शन फीस लेता रहा है।
बीते शैक्षणिक सत्र में विवि कार्यकारी परिषद ने एचपीयू विकास के नाम पर यूजी छात्रों से ली जाने वाली 500 रुपये की फीस को वार्षिक के बजाय पूरी डिग्री में एक बार लेने का फैसला लिया था।
सरकार से उठाएंगे मामला : कुल सचिव
इससे एक साल में एचपीयू को संबद्ध कॉलेजों में पढ़ने वाले करीब 1 लाख दस हजार छात्रों से औसतन 5 करोड़ 50 लाख की आय होती थी। विवि के कुल सचिव प्रो. एसएस नारटा ने माना कि एचपीयू को निदेशक की ओर से सरकारी कॉलेजों से संबद्धता और इंस्पेक्शन फीस न लेने को लेकर पत्र आया है।
इसमें इस फीस को वार्षिक एक करोड़ के अनुदान में से ही पूरा करने को कहा गया है। सरकार के अनुदान से एचपीयू के कर्मचारियों का वेतन तक पूरा नहीं हो रहा है। ऐसे में संबद्धता से संबंधित होने वाला खर्च एचपीयू कहां से कर पाएगा। इस आदेश को वापस लेने की मांग की जाएगी।