फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Shimla News ›   education department negligence study leave to teachers

कॉलेज शिक्षकों को स्टडी लीव देने के मामले में फंस गया शिक्षा निदेशालय

Fri, 22 Sep 2017 11:22 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला Updated Fri, 22 Sep 2017 11:22 AM IST
विज्ञापन
education department negligence study leave to teachers

कॉलेज शिक्षकों को स्टडी लीव देने के मामले में उच्च शिक्षा निदेशालय की बड़ी चूक सामने आई है। स्टडी लीव देने के लिए तीन साल की रेगुलर सर्विस होने के नियम को दरकिनार कर निदेशालय अपने स्तर पर ही तीन साल लगातार नौकरी करने वालों को स्टडी लीव मंजूर कर रहा है।

विज्ञापन


सचिवालय पहुंची इस मामले की फाइल से यह गलती पकड़ी गई है। सरकार ने निदेशालय के अधिकारियों को फटकार लगाते हुए तीन साल लगातार नौकरी के आधार पर स्टडी लीव देने वाले आदेशों को वापस लेने को कहा।
विज्ञापन


उधर, उच्च शिक्षा निदेशक बीएल विंटा ने स्टडी लीव देने के लिए अपनाए जा रहे पुराने नियमों के आदेशों को वापस ले लिया है।

यूजीसी ने लगाई है ये शर्त

education department negligence study leave to teachers

प्रदेश के कॉलेजों में नियुक्त शिक्षकों को उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए स्टडी लीव दी जाती है। यूजीसी ने स्टडी लीव देने के लिए तीन साल लगातार नौकरी की शर्त लगाई है।

यूजीसी की तर्ज पर ही उच्च शिक्षा निदेशालय तीन साल लगातार नौकरी करने वाले शिक्षकों को स्टडी लीव दे रहा है। इसके तहत निदेशालय की ओर से बीते दिनों अनुबंध पर नियुक्त शिक्षक की फाइल को भी सचिवालय भेज दिया।

सचिवालय के अधिकारियों को अनुबंध कर्मी को स्टडी लीव देना खटका। जब पड़ताल की गई तो मालूम पड़ा कि शिक्षा निदेशालय ने यूजीसी के आदेशों को सरकार से बिना मंजूर करवाए ही लागू कर दिया गया है।

निदेशालय की ओर से बरती गई इस लापरवाही को पकड़ने के बाद सरकार ने सिर्फ नियमितीकरण के तीन साल बाद ही स्टडी लीव देने को कहा है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed