कॉलेज शिक्षकों को स्टडी लीव देने के मामले में फंस गया शिक्षा निदेशालय
कॉलेज शिक्षकों को स्टडी लीव देने के मामले में उच्च शिक्षा निदेशालय की बड़ी चूक सामने आई है। स्टडी लीव देने के लिए तीन साल की रेगुलर सर्विस होने के नियम को दरकिनार कर निदेशालय अपने स्तर पर ही तीन साल लगातार नौकरी करने वालों को स्टडी लीव मंजूर कर रहा है।
सचिवालय पहुंची इस मामले की फाइल से यह गलती पकड़ी गई है। सरकार ने निदेशालय के अधिकारियों को फटकार लगाते हुए तीन साल लगातार नौकरी के आधार पर स्टडी लीव देने वाले आदेशों को वापस लेने को कहा।
उधर, उच्च शिक्षा निदेशक बीएल विंटा ने स्टडी लीव देने के लिए अपनाए जा रहे पुराने नियमों के आदेशों को वापस ले लिया है।
यूजीसी ने लगाई है ये शर्त
प्रदेश के कॉलेजों में नियुक्त शिक्षकों को उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए स्टडी लीव दी जाती है। यूजीसी ने स्टडी लीव देने के लिए तीन साल लगातार नौकरी की शर्त लगाई है।
यूजीसी की तर्ज पर ही उच्च शिक्षा निदेशालय तीन साल लगातार नौकरी करने वाले शिक्षकों को स्टडी लीव दे रहा है। इसके तहत निदेशालय की ओर से बीते दिनों अनुबंध पर नियुक्त शिक्षक की फाइल को भी सचिवालय भेज दिया।
सचिवालय के अधिकारियों को अनुबंध कर्मी को स्टडी लीव देना खटका। जब पड़ताल की गई तो मालूम पड़ा कि शिक्षा निदेशालय ने यूजीसी के आदेशों को सरकार से बिना मंजूर करवाए ही लागू कर दिया गया है।
निदेशालय की ओर से बरती गई इस लापरवाही को पकड़ने के बाद सरकार ने सिर्फ नियमितीकरण के तीन साल बाद ही स्टडी लीव देने को कहा है।