कोल आवंटन मामले में ईडी ने किया मनी लांड्रिंग का केस
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हिमाचल प्रदेश के नाम पर पश्चिम बंगाल के रानीगंज में 500 मेगावाट पावर प्रोजेक्ट के लिए हुए कोल आवंटन के मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लांड्रिंग का केस दर्ज किया है।
यह मामला शिमला स्थित ईडी की ब्रांच में दर्ज हुआ है। इसकी पुष्टि प्रवर्तन निदेशालय शिमला शाखा के प्रभारी भूपेंद्र नेगी ने की है। इस प्रकरण में प्रवर्तन निदेशालय ने हिमाचल प्रदेश पावर कारपोरेशन लिमिटेड प्रबंधन से तमाम रिकार्ड तलब किए हैं।
2006 में केंद्र की यूपीए सरकार के कार्यकाल में कोल आवंटन किया गया था। सूत्रों के अनुसार यह कोल आवंटन हिमाचल एटा और जिंदल ग्रुप को किया गया था, लेकिन इन दोनों कंपनियों की ओर से पावर प्रोजेक्ट बनाने का काम शुरू नहीं किया गया था।
मामले में फंस सकते हैं कारपोरेशन के तत्कालीन अधिकारी
पावर उत्पादन के लिए दोनों ही कंपनियों की ओर से प्रक्रिया ही नहीं शुरू की गई थी। ऐसे में 2012 में ही यूपीए-2 सरकार के कार्यकाल में कोल आवंटन निरस्त कर दिया गया था।
इस मामले में अब अचानक यह तथ्य सामने आ रहा है कि कोल आवंटन कराने के नाम पर मनी लांड्रिंग की गई थी। इसकी जद्द में हिमाचल प्रदेश पावर कारपोरेशन लिमिटेड से जुड़े तत्कालीन अधिकारी भी आ सकते हैं। निदेशालय की ओर से एक सप्ताह के भीतर पूरा रिकार्ड तलब किया गया है।
डीके शर्मा प्रबंध निदेशक हिमाचल प्रदेश पावर कारपोरेशन लिमिटेड प्रवर्तन निदेशालय ने कुछ रिकार्ड मांगा है। पूछा है कि किस प्रक्रिया के तहत कोल आवंटन किया गया। कारपोरेशन की ओर से जल्द ही तमाम साक्ष्य निदेशालय को भेज दिए जाएंगे।