खुलासा, 8 तीव्रता का भूकंप आया तो हिमाचल में जाएंगी पौने दो लाख जानें
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हिमाचल में अगर रिक्टर स्केल पर 8 मैग्नीट्यूड तीव्रता के भूकंप का जोरदार झटका आया और मंडी जिले का सुंदरनगर इसका एपी सेंटर रहता है तो एक साथ पौने दो लाख लोगों की जान जा सकती है। इससे 14 लाख से ज्यादा लोग जख्मी हो सकते हैं।
प्रदेश के सात जिले सिस्मिक जोन पांच में आते हैं। यहां भूकंप का बड़ा खतरा है। आईआईटी रुड़की की एक अध्ययन रिपोर्ट ने हिमाचल को चेता दिया है। इस अध्ययन रिपोर्ट के बाद वीरवार को प्रदेश के सात जिलों में मॉकड्रिल की गई।
इसमें सुंदरनगर को ही भूकंप का एपी सेंटर बनाया गया। राज्य सरकार ने प्रशासन की चौकसी की परीक्षा ली। इसके बाद मुख्य सचिव वीसी फारका ने शिमला में प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि अभी सूबे को आपदा प्रबंधन में बहुत कुछ करने की जरूरत है।
मुख्य सचिव ने कहा कि पहली बार इतने व्यापक तरीके से मॉकड्रिल की गई। संबंधित जिलों के उपायुक्तों से भी वीडियो कांफ्रेंसिंग से बात हुई। सुबह 10:30 बजे भूकंप आने कीड्रिल की गई। ठीक 10:30 बजे सायरन बजा।
बड़े भूकंप से मच सकती है तबाही
राज्य सरकार के तमाम महकमे और उपायुक्त दफ्तर आपदा राहत में जुटे रहे। यह ड्रिल बताकर की गई। भविष्य में इसे बिना बताए किया जाएगा। प्रेस कांफ्रेंस में मौजूद मुख्य आयुक्त आपदा प्रबंधन तरुण श्रीधर ने जानकारी दी कि राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन अथॉरिटी और आईआईटी ने कहा कि पूरा प्रदेश सिस्मिक जोन चार और पांच में आता है।
इसका 25 फीसदी क्षेत्र सात जिलों में फैला है। ये जिले शिमला, सोलन, किन्नौर, मंडी, कुल्लू, चंबा और कांगड़ा हैं। ये सिस्मिक जोन पांच में आते हैं। इनमें हिमाचल की 80 प्रतिशत जनसंख्या रहती है। इस क्षेत्र में अगर एपी सेंटर मंडी का सुंदरनगर होगा और आठ मैग्नीट्यूड का भूकंप आता है तो एक लाख 80 हजार लोग मर सकते हैं। इसलिए यह मॉक ड्रिल की गई।
मॉकड्रिल में हेलीकाप्टर का किया इस्तेमाल
मॉकड्रिल में हेलीकाप्टर का इस्तेमाल भी किया गया। इसे सोलन से शिमला के बीच उड़ाया गया। इस मॉकड्रिल में 562 लोगों की मौत दर्शाई गई और 1731 लोग घायल बताए गए।
सेना ने दिया सुझाव, स्थानीय लोगों को दें ट्रेनिंग
मॉकड्रिल में सेना के प्रतिनिधियों को स्वतंत्र ऑब्जर्वरों के रूप में तैनात किया गया। बाद में वीडियो कांफ्रेंस में सेना ने सरकार को सलाह दी कि स्थानीय लोगों को प्रशिक्षित करने की जरूरत है। प्राथमिक मेडिकल उपचार और अन्य तरह से ट्रेनिंग देना भी जरूरी है।
शिमला और सोलन में खुली आपदा प्रबंधन की पोल
उपायुक्त कार्यालय में सायरन बजने पर वहां के कर्मचारी आराम से गपशप करते बाहर आए। वे भीड़ का हिस्सा बने थे, उससे साफ नजर आ रहा था कि उनमें गंभीरता नहीं है। ड्रिल के दौरान घायलों को एंबुलेंस का कुछ देर इंतजार करना पड़ा। कैंपस में आए लोगों में अफरातफरी मची हुई थी।
आईजीएमसी शिमला में माकड्रिल के दौरान गृह रक्षा का विभाग के ट्रक को मोड़ने में परेशानी हुई। इसके बाद ट्रक नहीं मुड़ सका तो बैक करके ही ट्रक को गेट से बाहर ले जाया गया। सोलन शहर के मुख्य बाजारों में ही राहत बचाव कार्य के वाहन नहीं पहुंच सके। अपर बाजार, गंज बाजार और चौक बाजार में अतिक्रमण के कारण दमकल वाहन फंसे रहे।