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हिमाचल के पहाड़ों पर तबाही के संकेत, दहशत में लोग

Thu, 11 Feb 2016 09:40 AM IST
Updated Thu, 11 Feb 2016 09:40 AM IST
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earthquake in himachal, snowfall trends changed.

हिमाचल के पहाड़ों से प्रकृति के खतरनाक संकेत मिल रहे हैं। हफ्ते के भीतर बुधवार को चंबा की धरती तीसरी बार हिल गई। बुधवार को 4 तीव्रता वाले भूकंप के झटकों से हैरान लोग किसी अनहोनी को लेकर दहशत में हैं। हफ्ते के भीतर बुधवार को चंबा की धरती तीसरी बार थर्राई।

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4 तीव्रता वाले भूकंप के पांच झटकों से लोग दहशत में हैं। एक घर को आंशिक नुकसान भी हुआ है। पहला झटका सुबह 11:14, दूसरा 11:24, तीसरा 11:29, चौथा 11:31 और पांचवां 12:03 बजे महसूस किया गया। सिलसिले वार झटकों से भयभीत होकर लोग घरों से बाहर निकल आए।
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कई घंटे ये लोग घरों से बाहर ही रहे। इससे पहले 4 फरवरी को तीन, 9 फरवरी को रात करीब नौ बजे 4.4 तीव्रता वाले भूकंप के झटके महसूस किए गए थे। बीते मंगलवार रात 8:43 बजे लाहौल में भी 4.4 तीव्रता का भूकंप आया है।

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बदल रहा पहाड़ों पर बर्फबारी का ट्रेंड

earthquake in himachal, snowfall trends changed.

वहीं, पहाड़ों पर बर्फबारी का ट्रेंड बदल रहा है। नई सदी में अब दिसंबर के बजाय फरवरी-मार्च माह में ज्यादा बर्फबारी हो रही है। बर्फबारी के दस साल के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। साल 2000 से 2015 तक दिसंबर महीने में सिर्फ 13 दिन बर्फ गिरी।

वहीं, इस दौरान फरवरी में 44 दिन और मार्च में 15 दिन बर्फ गिरी। वैज्ञानिक इसे खतरनाक संकेत मान रहे हैं। ग्लोबल वार्मिंग के असर ने पहाड़ों पर बर्फबारी का ट्रेंड बदल दिया है। अब नवंबर-दिसंबर के मुकाबले फरवरी-मार्च में ज्यादा बर्फबारी हो रही है।

शिमला शहर में बर्फबारी के दस साल के आंकड़े हैरान करने वाले हैं। हिमाचल में बीते दस साल से बर्फबारी भी कम हो रही है। नब्बे के दशक में जहां औसतन हर साल 130 से 262 सेंटीमीटर बर्फ रिकॉर्ड की गई।

वहीं वर्ष 2000 के बाद कभी साल में 120 सेंटीमीटर से अधिक बर्फ नहीं गिरी। साल 2001 में 186, 2006-07 में 120, 2007-08 में 34, 2008-09 में 43, 2010-11 में 31.5 और 2014-15 में 83 सेंटीमीटर बर्फबारी हुई। 2011-12 में 119 सेंटीमीटर बर्फ गिरी थी।

शिमला में नवंबर में 20 साल से नहीं गिरी बर्फ

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पहाड़ों पर बर्फबारी के बदलते ट्रेंड के लिए मौसम विशेषज्ञ अधिकतम तापमान में हो रही वृद्धि को जिम्मेदार मानते हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि अंधाधुंध भवन निर्माण, बढ़ता प्रदूषण और पेड़ कटान इसके लिए जिम्मेदार हैं। इसी कारण बर्फबारी के ट्रेंड में बदलाव आ रहा है।

साल 2015 में लाहौल स्पीति और किन्नौर जिला की ऊंची चोटियों में तो अप्रैल और मई महीने में भी बर्फबारी हुई थी। राजधानी शिमला में साल 2005 के नवंबर, दिसंबर और साल 2006 के जनवरी, फरवरी और मार्च महीने में बर्फबारी नहीं हुई थी। साल 2009-10 में नाममात्र 1.8 सेंटीमीटर पूरे सीजन में बर्फबारी रिकॉर्ड की गई।

शिमला में साल 1995 में नवंबर महीने के दौरान बर्र्फ गिरी थी। उस समय 7.8 सेंटीमीटर बर्फ रिकॉर्ड की गई। इसके बाद अभी तक नवंबर में बर्फबारी नहीं हुई है। मौसम विभाग के निदेशक डॉ मनमोहन सिंह की मानें तो ग्लोबल वार्मिंग के चलते पहाड़ों में बर्फबारी का ट्रेंड बदल रहा है।

बीते कुछ सालों से फरवरी और मार्च में बर्फबारी हो रही है। दिसंबर की जगह जनवरी में अधिक बर्फबारी हो रही है। अधिकतम और न्यूनतम तापमान बढ़ने से ऐसा हो रहा है।

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