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Shimla News: शिमला से लंबे और ग्रामीण रूटों के लिए ई-बसों का संचालन शुरू
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खास खबर
ग्रामीण डिपो की रोज चंडीगढ़, करसोग, माहुंनाग, कुठाड़ और दियोथ जैसे लंबे रूटों के साथ छोटे रूटों पर भी चल रहीं हैं इलेक्टि्रक बसें
पहाड़ी सड़कों में उतराई पर खुद चार्ज हो जाती हैं बसें
एक बार चार्ज करने पर 200 किमी तक चल रही बसें
चंडीगढ़ तक 85 फीसदी खर्च हो रही बस की बैटरी
एक रूट पर बच रहा है 70 लीटर तक डीजल का खर्च
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। हिमाचल प्रदेश पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) के शिमला ग्रामीण डिपो को मिली सभी 24 इलेक्ट्रिक बसों का लंबे और ग्रामीण रूटों पर संचालन शुरू हो गया है। निगम इन नई बसों को लंबे रूटों पर चलाकर बेहतर माइलेज का लाभ उठाने के हिसाब से रूट तय कर रहा है।
शिमला ग्रामीण डिपो की इलेक्ट्रिक बसों का चंडीगढ़ के लिए रोज तीन टाइम संचालन किया जा रहा है। इसमें जिन रूटों पर अधिक उतराई है, वहां इन बसों को चलाने को प्राथमिकता दी जा रही है। उतराई के दौरान स्वयं चार्ज होने की खास खूबी के चलते इन बसों का अधिकतम उपयोग किया जा रहा है। चंडीगढ़ का एक बस का सफर करीब 222 किलोमीटर है। पूरी तरह चार्ज कर भेजी गई बस की करीब 85 फीसदी बैटरी ही चंडीगढ़ तक खर्च हो रही है। रूट में उतराई के दौरान बैटरी स्वयं चार्ज होती रहती है। चंडीगढ़ रूट पर बस चलाने से करीब 70 लीटर डीजल की बचत हो रही है। यही वजह है कि एक बार चार्ज करने पर इलेक्ट्रिक बसें पूरा सफर तय कर पा रही हैं।
इसी तर्ज पर शिमला ग्रामीण डिपो की नई इलेक्ट्रिक बसों को पट्टा-कुठाड़ के करीब 160 किलोमीटर लंबे रूट पर भेजा जा रहा है। वहीं बसों को करसोग, माहुंनाग, दियोथ, चेबड़ी, अणु, कुनिहार, चनावग और मलावण जैसे स्थानीय रूटों पर भी चलाया जा रहा है। पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण करसोग के लिए शिमला से चलने वाली बस मशोबरा से सुन्नी तक उतराई में चलती है, जिससे बैटरी की खपत कम होती है। आगे भी इस रूट पर उतराई होने के कारण बस 200 किलोमीटर तक का सफर तय कर रही है। डिपो लंबे रूटों पर नई बसों को संचालित कर डीजल की बचत को प्राथमिकता दे रहा है। डिपो हर रोज नई इलेक्ट्रिक बसों को न्यूनतम 150 किलोमीटर चलाने का प्रयास कर रहा है। लंबे रूटों से लौटने वाली बसों को छोटे रूटों पर भेजा जा रहा है। चंडीगढ़ रूट पर इलेक्ट्रिक बस चलने से करीब 70 लीटर तक डीजल की बचत हो रही है।
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लंबे रूटों पर नई बसें चलाने का किया जा रहा प्रयास
एचआरटीसी के शिमला ग्रामीण डिपो को मिली 24 बसों को लंबे रूटों पर चलाने को प्राथमिकता दी जा रही है। उतराई के दौरान बसें स्वयं चार्ज होती हैं, इसलिए फिलहाल इनमें बैटरी की खपत भी कम हो रही है। लंबे रूटों से लौटने वाली बसों को ग्रामीण रूटों पर भेजकर प्रतिदिन 150 किलोमीटर चलाने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे सेवाओं में सुधार के साथ तेल की बचत भी हो। जहां इलेक्ट्रिक बसें खराब सड़क या अन्य कारणों से नहीं जा पा रही हैं, वहां डीजल बसें भेजी जा रही हैं।
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ग्रामीण डिपो की रोज चंडीगढ़, करसोग, माहुंनाग, कुठाड़ और दियोथ जैसे लंबे रूटों के साथ छोटे रूटों पर भी चल रहीं हैं इलेक्टि्रक बसें
पहाड़ी सड़कों में उतराई पर खुद चार्ज हो जाती हैं बसें
एक बार चार्ज करने पर 200 किमी तक चल रही बसें
चंडीगढ़ तक 85 फीसदी खर्च हो रही बस की बैटरी
एक रूट पर बच रहा है 70 लीटर तक डीजल का खर्च
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। हिमाचल प्रदेश पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) के शिमला ग्रामीण डिपो को मिली सभी 24 इलेक्ट्रिक बसों का लंबे और ग्रामीण रूटों पर संचालन शुरू हो गया है। निगम इन नई बसों को लंबे रूटों पर चलाकर बेहतर माइलेज का लाभ उठाने के हिसाब से रूट तय कर रहा है।
शिमला ग्रामीण डिपो की इलेक्ट्रिक बसों का चंडीगढ़ के लिए रोज तीन टाइम संचालन किया जा रहा है। इसमें जिन रूटों पर अधिक उतराई है, वहां इन बसों को चलाने को प्राथमिकता दी जा रही है। उतराई के दौरान स्वयं चार्ज होने की खास खूबी के चलते इन बसों का अधिकतम उपयोग किया जा रहा है। चंडीगढ़ का एक बस का सफर करीब 222 किलोमीटर है। पूरी तरह चार्ज कर भेजी गई बस की करीब 85 फीसदी बैटरी ही चंडीगढ़ तक खर्च हो रही है। रूट में उतराई के दौरान बैटरी स्वयं चार्ज होती रहती है। चंडीगढ़ रूट पर बस चलाने से करीब 70 लीटर डीजल की बचत हो रही है। यही वजह है कि एक बार चार्ज करने पर इलेक्ट्रिक बसें पूरा सफर तय कर पा रही हैं।
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इसी तर्ज पर शिमला ग्रामीण डिपो की नई इलेक्ट्रिक बसों को पट्टा-कुठाड़ के करीब 160 किलोमीटर लंबे रूट पर भेजा जा रहा है। वहीं बसों को करसोग, माहुंनाग, दियोथ, चेबड़ी, अणु, कुनिहार, चनावग और मलावण जैसे स्थानीय रूटों पर भी चलाया जा रहा है। पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण करसोग के लिए शिमला से चलने वाली बस मशोबरा से सुन्नी तक उतराई में चलती है, जिससे बैटरी की खपत कम होती है। आगे भी इस रूट पर उतराई होने के कारण बस 200 किलोमीटर तक का सफर तय कर रही है। डिपो लंबे रूटों पर नई बसों को संचालित कर डीजल की बचत को प्राथमिकता दे रहा है। डिपो हर रोज नई इलेक्ट्रिक बसों को न्यूनतम 150 किलोमीटर चलाने का प्रयास कर रहा है। लंबे रूटों से लौटने वाली बसों को छोटे रूटों पर भेजा जा रहा है। चंडीगढ़ रूट पर इलेक्ट्रिक बस चलने से करीब 70 लीटर तक डीजल की बचत हो रही है।
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लंबे रूटों पर नई बसें चलाने का किया जा रहा प्रयास
एचआरटीसी के शिमला ग्रामीण डिपो को मिली 24 बसों को लंबे रूटों पर चलाने को प्राथमिकता दी जा रही है। उतराई के दौरान बसें स्वयं चार्ज होती हैं, इसलिए फिलहाल इनमें बैटरी की खपत भी कम हो रही है। लंबे रूटों से लौटने वाली बसों को ग्रामीण रूटों पर भेजकर प्रतिदिन 150 किलोमीटर चलाने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे सेवाओं में सुधार के साथ तेल की बचत भी हो। जहां इलेक्ट्रिक बसें खराब सड़क या अन्य कारणों से नहीं जा पा रही हैं, वहां डीजल बसें भेजी जा रही हैं।