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दशहरा सत्य की असत्य पर जीत का परिचायक: दत्तात्रेय

Tue, 08 Oct 2019 09:24 PM IST
Krishan Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कुल्लू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कुल्लू Published by: Krishan Singh Updated Tue, 08 Oct 2019 09:24 PM IST
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Dussehra symbolizes victory of truth over False: Bandaru Dattatreya
- फोटो : अमर उजाला

राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने मंगलवार को कुल्लू के ढालपुर मैदान में अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरे का शुभारंभ किया। इस अवसर पर राज्यपाल ने कुल्लू के प्रसिद्ध ढालपुर मैदान में भगवान रघुनाथ की रथयात्रा में भाग भी लिया।

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राज्यपाल ने इस अवसर पर घाटी के लोगों को दशहरे की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह पर्व सत्य की असत्य पर जीत का परिचायक है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश की संस्कृति बहुत समृद्ध व अद्वितीय है, जिसकी विश्व भर में अलग पहचान है।
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प्रदेश में वर्ष भर आयोजित होने वाले मेले और त्यौहार यहां के लोगों की समृद्ध परंपराओं और धार्मिक आस्था को दर्शाते हैं। यहां मनाए जाने वाले मेले व त्यौहार प्रदेश की परंपराओं और मान्यताओं को दर्शाते हैं।
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उन्होंने कहा कि आज के आधुनिक समय में प्रदेश के लोगों ने यहां की समृद्ध संस्कृति, रीति-रिवाज व परंपराओं को संजोकर रखा है, जिसके लिए यहां के लोग प्रशंसा के पात्र हैं।  

इसके बाद, राज्यपाल ने विभिन्न सरकारी विभागों, बोर्डों, निगमों व अन्य गैर-सरकारी संस्थानों द्वारा आयोजित प्रदर्शनी का उद्घाटन किया और स्टालों पर जाकर विभिन्न उत्पादों का अवलोकन किया।

इस अवसर पर वन, परिवहन और युवा सेवाएं एवं खेल मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर, त्रिपुरा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश संजय करोल, हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायाधीश धर्म चंद चैधरी, विधायकगण, उपायुक्त कुल्लू डॉ. रिचा वर्मा तथा जिला प्रशासन के अधिकारी भी इस अवसर पर उपस्थित थे।

अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा में इस बार पहुंचे 266 देवी-देवता

Dussehra symbolizes victory of truth over False: Bandaru Dattatreya

दशहरा उत्सव में इस साल 266 देवी-देवताओं ने अपनी भागीदारी सुनिश्चित की है। इसमें कई देवी-देवता पहली बार उत्सव में आए हैं। बाह्य सराज निरमंड से लेकर ऊझी घाटी, मनाली तक सोने-चांदी के मुख मोहरे तथा आभूषण से सजे देवरथों से अठारह करडू की सौह स्वर्गलोक में तबदील हो गई है।

दशहरा उत्सव समिति के रजिस्टर में 266 देवी देवताओं का पंजीकरण हुआ है। जबकि 2018 में 274, 2017 में यह संख्या में 249 थी और 2016 में 227 देवी देवताओं ने भाग लिया था। दशहरा उत्सव कमेटी ने 331  देवी देवताओं को निमंत्रण दिया था।

अभी तक पहुंचे 260 देवी देवताओं में 123 गैर माफीदार व 136 माफीदार और सात बिना बुलाए देवी-देवता शामिल हुए हैं। वहीं बिन बुलाए देवताओं की संख्या भी दशहरा में साल दर साल बढ़ रही है।

जिला देवी-देवता कारदार संघ के महासचिव नारायण चौहान ने कहा कि दशहरा उत्सव में देवी-देवताओं की संख्या बढ़ रही है। एडीएम कुल्लू अक्षय सूद ने मंगलवार शाम तक उनके पास 266 देवी देवता पहुंचे हैं।

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