दशहरा उत्सव: शिमला के जाखू में रावण के पुतले का मास्क पहनाकर किया दहन, प्रदेश में नहीं हुए बड़े आयोजन
हिमाचल प्रदेश के विभिन्न जिलों में दशहरा पर रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन किया गया। प्रदेश की राजधानी शिमला में प्रसिद्ध जाखू मंदिर में शाम साढ़े पांच बजे रावण के पुतले का दहन किया गया।
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कोरोना महामारी के चलते हिमाचल प्रदेश में बड़े आयोजनों और मेलों के बिना दशहरा मनाया गया। शिमला के जाखू में रिमोट के साथ रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले जलाए गए। इसी तरह कांगड़ा, हमीरपुर, चंबा के चौगान, सिरमौर, सोलन के ठोडो मैदान में पुतले जलाए। उधर, मंडी में कोरोना महामारी को ध्यान में रखते हुए पड्डल मैदान में पुतले न जलाकर मात्र तीन तीर चलाकर परंपरा निभाई गई। वहीं, ऊना में रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों के साथ कोरोना और नशीले पदार्थ चिट्टे के भी पुतले जलाए गए। वहीं, राजधानी में शुक्रवार को कोविड-19 के बीच विजयदशमी का उत्सव धूमधाम से मनाया गया। इस बार जाखू मंदिर परिसर में रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के बनाए पुतलों को मास्क पहनाए गए थे। इससे लोगों को संदेश दिया गया कि कोरोनाकाल में मास्क कितना जरूरी है।
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मास्क पहने पुतलों को शाम 5:48 बजे मुख्य निर्वाचन अधिकारी हिमाचल प्रदेश सी. पालरासु और डीसी आदित्य नेगी ने मशाल जलाकर आग लगाई। इस बार रिमोट का बटन दबाकर आग जलाने की व्यवस्था नहीं थी। जवाहर लाल नेहरू गर्वनमेंट कॉलेज ऑफ फाइन आर्ट चौड़ा मैदान के विकास ने बताया कि कोरोना थीम पर आधारित पुतले बनाकर तैयार किए थे। विजय दशमी पर शाम के वक्त रावण दहन को लेकर भारी संख्या में लोगों जाखू मंदिर आए थे। भक्तों ने मंदिर में हनुमान जी के दर्शन किए। प्रशासन की टीम ने यहां आए लोगों को कोविड प्रोटोकॉल के तहत मास्क पहनने की हिदायत लोगों को दी। इस बार यहां राम और रावण का युद्ध मंचन भी नहीं किया गया, न ही झांकियां निकाला गईं। शाम के वक्त मशाल से आग लगाने के करीब पांच मिनट के भीतर पुतले जलकर राख हो गए।
उपायुक्त आदित्य नेगी ने राजकीय महाविद्यालय संजौली और कोटशेरा के फाइन आर्ट विभाग के विकास कुमार, विर्जुन, नितेश शर्मा, श्रुति परसराम पूरिया, दिव्या, आलिना, आकांशा, रूपेश, आयुश, आर्यन कश्यप, प्रकाश, विवेक भारद्वाज, निखिल, चेतना, तनुजा, देव कुमार, अनिल शर्मा और चेतराम को प्रशस्ति पत्र दिए। प्रत्येक छात्र-छात्राओं को 2100 रुपये की राशि मंदिर न्यास की ओर से दी गई। इस अवसर पर सहायक आयुक्त डॉ. पूनम, एसडीएम बीआर शर्मा, मंडलायुक्त जीके श्रीवास्तव, राज्यपाल के सचिव प्रियतु मंडल तथा व्यय पर्यवेक्षक महेश जिवाड़े और तहसीलदार सुमेध शर्मा मौजूद रहे।
कोरोना के बाद पहली बार टुटू में जला पुतला
श्रीरामलीला कला केंद्र टुटू ने चौक पर 25 फीट ऊंचा पुतला बनाया था। कोरोनाकाल के बाद पहली बार बड़े स्तर पर यहां झांकी निकाली गई। टुटू में शाम साढ़े चार बजे झांकी निकली जोकि पावर हाउस, यादगार, विजयनगर से साढ़े पांच बजे के करीब टुटू चौक पहुंची। रामा और रावण दल के बीच युद्ध हुआ। इसके बाद शाम साढ़े पांच बजे के बाद पुतला जलाया गया। इस अवसर पर टुटू के पार्षद विवेक शर्मा और रामलीला धार्मिक कल्याण समिति के अध्यक्ष दीपक कुमार, ललित, जय ठाकुर, हीरा पाल सिंह, जोगिंद्र ठाकुर, अनिल गोयल, गोपाल जोशी, रमेश नेगी, दिनेश शर्मा और पार्षद दिवाकर भी मौजूद रहे।
भगवान राम की शिक्षाओं को अपनाएं : सी. पालरासु
मुख्य निर्वाचन अधिकारी हिमाचल प्रदेश सी. पालरासु ने जाखू मंदिर में आयोजित दशहरा उत्सव में रावण दहन कार्यक्रम में शिरकत की। उन्होंने कहा कि इस दिवस की प्रासंगिकता और मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम की शिक्षाओं को आत्मसात कर हमें आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने अन्य अधिकारियों के साथ जाखू मंदिर में माथा भी टेका। उन्होंने विजय दशमी की प्रदेश वासियों को शुभकामनाएं भी दीं।
बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक दशहरा : राज्यपाल
उधर, सात दिनों तक चलने वाले अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव का विधिवत शुभारंभ राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने किया। उन्होंने भगवान रघुनाथ की रथयात्रा में भाग लिया। इस अवसर पर हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति संदीप शर्मा भी उपस्थित रहे। राज्यपाल ने दशहरा के अवसर पर प्रदेशवासियों विशेषकर घाटी के लोगों को बधाई दी। कहा कि यह उत्सव बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। हिमाचल प्रदेश की संस्कृति अनूठी है और इसकी एक अलग पहचान है। कुल्लू जिले के 332 देवी-देवताओं को आमंत्रित किया गया है। इसमें करीब 200 देवी-देवता भाग ले रहे हैं। इससे पहले भुंतर हवाई अड्डे में आगमन पर राज्यपाल का गर्मजोशी से स्वागत किया गया। इस दौरान उपायुक्त आशुतोष गर्ग और पुलिस अधीक्षक गुरदेव शर्मा उपस्थित रहे।
विजयदशमी पर कालीबाड़ी से मां दुर्गा को दी गई विदाई
वहीं, कालीबाड़ी हाल में स्थापित मां दुर्गा के दर्शनों के लिए भक्ताें का तांता लगा रहा। हाल में सुबह से ही हजारों की तादाद में लोग दर्शनों के लिए पहुंचे। यहां सुबह ग्यारह से साढ़े ग्यारह बजे तक मां दुर्गा का मीठा करवाया गया। इसके बाद सिंदूर खेला खेलकर मां की विदाई की गई। सुहागिन महिलाओं ने एक दूसरे को सिंदूर लगाया। दोपहर सवा बारह बजे के करीब मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की धर्मपत्नी साधना ठाकुर भी मां के दर्शनों के लिए मंदिर में आई। कालीबाड़ी मंदिर कमेटी के सचिव सोमनाथ प्रमाणिक ने यह जानकारी दी।
हाल में इस दौरान धनूची नृत्य किया गया। सवा दो बजे के करीब मां की मूर्तियों को गाड़ी में तारादेवी स्थित आईटीबीपी लाया गया। यहां पर पौने चार बजे के करीब मां का तालाब में विसर्जन किया। इस दौरान नगाड़ा बजाया गया और साथ आए लोगाें ने आरती की। बताया जा रहा है कि मंदिर में शनिवार से रुटीन में मंदिर के भीतर कोविड प्रोटोकॉल के तहत मां के दर्शन करने दिए जाएंगे। इस अवसर पर कमेटी समेत अन्य लोग यहां पर मौजूद रहे।