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Shimla News: पढ़ाई के दबाव में बारहवीं के विद्यार्थी ने फंदा लगा दी जान
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खास खबर
सुसाइड नोट में लिखा मेरे तीन पेपर ठीक नहीं हुए
शाम को काम से घर लौटे पिता ने बेटे को देखा लटका हुआ
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी के एक सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले विद्यार्थी ने हाउस टेस्ट में बेहतर प्रदर्शन नहीं होने पर तनाव में आकर फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। विद्यार्थी ने घर में रखी साड़ी से फंदा लगाया। घटना का पता उस समय चला जब काम से लौटकर पिता घर पहुंचे। इस दौरान दरवाजा अंदर से बंद था। दरवाजा नहीं खोला तो उन्होंने खिड़की से देखा तो बेटा कमरे में फंदे से लटका था।
पुलिस ने इस संबंध में केस दर्जकर मामले की छानबीन शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार फागली क्षेत्र में रहने वाला विद्यार्थी रविवार को घर पर अकेला था। इस दौरान उसने छत में लगी लकड़ी से साड़ी का फंदा बनाकर आत्महत्या कर ली। शाम करीब 4:30 बजे जब पिता घर पहुंचा तो अंदर से कुंडी लगी थी। उन्होंने दरवाजा खटखटाया लेकिन भीतर से कोई जवाब नहीं आया। इसके बाद उन्होंने खिड़की से भीतर देखा तो बेटा फंदे से लटका हुआ था, उनकी चीख पुकार सुनकर परिवार के अन्य सदस्य भी मौके पर पहुंचे और दरवाजा तोड़कर भीतर पहुंचे। परिवार के सदस्य फौरन किशोर को उतारकर आईजीएमसी ले गए लेकिन यहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इसके बाद मामले की सूचना बालूगंज पुलिस स्टेशन को दी गई। पुलिस टीम फागली में मृतक के घर में पहुंची और छानबीन शुरू की। इस दौरान बेड पर पड़ी नोटबुक की जांच करने पर पेज नंबर 90 की पिछली तरफ सुसाइड मिला। इसमें विद्यार्थी ने लिखा था कि उसके पिछले दिनों तीन हाउस टेस्ट अच्छे नहीं हुए हैं। इसी तनाव में आकर उसने आत्महत्या कर ली।
पुलिस ने नोटबुक और फंदा लगाने में इस्तेमाल की साड़ी को कब्जे में ले लिया है। सोमवार को आईजीएमसी में पोस्टमार्टम करवाकर शव परिजनों के सुपुर्द कर दिया है। मृतक बारहवीं कक्षा के कॉमर्स संकाय में शिक्षा ग्रहण कर रहा था और पढ़ाई में होनहार था। आत्महत्या की सूचना से स्कूल के शिक्षक और विद्यार्थी भी हैरान हैं। सोमवार को भी विद्यार्थी का पेपर था लेकिन इससे पहले ही उसने पढ़ाई के दबाव में आकर जान दे दी।
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इनसेट
प्रतिस्पर्धा की दौड़ में मानसिक तनाव झेल रहे विद्यार्थी
वर्तमान में प्रतिस्पर्धा बढ़ गई है जिससे विद्यार्थी मानसिक तनाव झेलने को मजबूर हैं। इसमें कई बार अभिभावक उन पर बेहतर करने का दबाव भी बनाते हैं तो कई बार बच्चे खुद भी बेहतर करने की कोशिश में अधिक दबाव ले रहे हैं। आईजीएमसी में मनाेरोग विभाग के अध्यक्ष डॉ. दिनेश दत्त शर्मा ने बताया कि वर्तमान पीढि़यों में तनाव झेलने की क्षमता कम है। इसके लिए हमारा सामाजिक तानाबाना जिम्मेवार है। इस वजह से बच्चे पहले की पीढि़यों की अपेक्षा संवेदनशील हो गए हैं। ऐसे में यह पता लगाना काफी मुश्किल है कि बच्चे किस बात पर किस तरह से कदम उठाएंगे। इसको देखते हुए हमें बच्चों को समय और साथ देने की जरूरत है। बच्चों को बताएं कि सफलता ही नहीं असफलता को भी स्वीकार करना जरूरी है। अभिभावक मानसिक तनाव के लक्षणों को समय पर पहचान कर काउंसलिंग भी करवा सकते हैं।
मानसिक दबाव के लक्षण
अकेले रहना, बातचीत कम करना
व्यवहार में बदलाव, चिड़चिड़ापन बातों में नकारात्मक विचार झलकना
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सुसाइड नोट में लिखा मेरे तीन पेपर ठीक नहीं हुए
शाम को काम से घर लौटे पिता ने बेटे को देखा लटका हुआ
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी के एक सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले विद्यार्थी ने हाउस टेस्ट में बेहतर प्रदर्शन नहीं होने पर तनाव में आकर फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। विद्यार्थी ने घर में रखी साड़ी से फंदा लगाया। घटना का पता उस समय चला जब काम से लौटकर पिता घर पहुंचे। इस दौरान दरवाजा अंदर से बंद था। दरवाजा नहीं खोला तो उन्होंने खिड़की से देखा तो बेटा कमरे में फंदे से लटका था।
पुलिस ने इस संबंध में केस दर्जकर मामले की छानबीन शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार फागली क्षेत्र में रहने वाला विद्यार्थी रविवार को घर पर अकेला था। इस दौरान उसने छत में लगी लकड़ी से साड़ी का फंदा बनाकर आत्महत्या कर ली। शाम करीब 4:30 बजे जब पिता घर पहुंचा तो अंदर से कुंडी लगी थी। उन्होंने दरवाजा खटखटाया लेकिन भीतर से कोई जवाब नहीं आया। इसके बाद उन्होंने खिड़की से भीतर देखा तो बेटा फंदे से लटका हुआ था, उनकी चीख पुकार सुनकर परिवार के अन्य सदस्य भी मौके पर पहुंचे और दरवाजा तोड़कर भीतर पहुंचे। परिवार के सदस्य फौरन किशोर को उतारकर आईजीएमसी ले गए लेकिन यहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इसके बाद मामले की सूचना बालूगंज पुलिस स्टेशन को दी गई। पुलिस टीम फागली में मृतक के घर में पहुंची और छानबीन शुरू की। इस दौरान बेड पर पड़ी नोटबुक की जांच करने पर पेज नंबर 90 की पिछली तरफ सुसाइड मिला। इसमें विद्यार्थी ने लिखा था कि उसके पिछले दिनों तीन हाउस टेस्ट अच्छे नहीं हुए हैं। इसी तनाव में आकर उसने आत्महत्या कर ली।
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पुलिस ने नोटबुक और फंदा लगाने में इस्तेमाल की साड़ी को कब्जे में ले लिया है। सोमवार को आईजीएमसी में पोस्टमार्टम करवाकर शव परिजनों के सुपुर्द कर दिया है। मृतक बारहवीं कक्षा के कॉमर्स संकाय में शिक्षा ग्रहण कर रहा था और पढ़ाई में होनहार था। आत्महत्या की सूचना से स्कूल के शिक्षक और विद्यार्थी भी हैरान हैं। सोमवार को भी विद्यार्थी का पेपर था लेकिन इससे पहले ही उसने पढ़ाई के दबाव में आकर जान दे दी।
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प्रतिस्पर्धा की दौड़ में मानसिक तनाव झेल रहे विद्यार्थी
वर्तमान में प्रतिस्पर्धा बढ़ गई है जिससे विद्यार्थी मानसिक तनाव झेलने को मजबूर हैं। इसमें कई बार अभिभावक उन पर बेहतर करने का दबाव भी बनाते हैं तो कई बार बच्चे खुद भी बेहतर करने की कोशिश में अधिक दबाव ले रहे हैं। आईजीएमसी में मनाेरोग विभाग के अध्यक्ष डॉ. दिनेश दत्त शर्मा ने बताया कि वर्तमान पीढि़यों में तनाव झेलने की क्षमता कम है। इसके लिए हमारा सामाजिक तानाबाना जिम्मेवार है। इस वजह से बच्चे पहले की पीढि़यों की अपेक्षा संवेदनशील हो गए हैं। ऐसे में यह पता लगाना काफी मुश्किल है कि बच्चे किस बात पर किस तरह से कदम उठाएंगे। इसको देखते हुए हमें बच्चों को समय और साथ देने की जरूरत है। बच्चों को बताएं कि सफलता ही नहीं असफलता को भी स्वीकार करना जरूरी है। अभिभावक मानसिक तनाव के लक्षणों को समय पर पहचान कर काउंसलिंग भी करवा सकते हैं।
मानसिक दबाव के लक्षण
अकेले रहना, बातचीत कम करना
व्यवहार में बदलाव, चिड़चिड़ापन बातों में नकारात्मक विचार झलकना