चार हजार करोड़ की सेब बागवानी पर मौसम भारी, नहीं हो पाए बगीचों के ये काम
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जमीन में नमी नहीं होने से बगीचों में खुदाई समेत तमाम काम रुक गए हैं। बर्फबारी न होने के कारण सेब के लिए जरूरी चिलिंग ऑवर्स भी पूरे नहीं हो रहे हैं। बागवान बारिश- बर्फबारी के इंतजार हैं लेकिन अगले दस दिनों तक मौसम में बदलाव के आसार नहीं हैं।
उधर, मैदानी इलाकों में कोहरे की मार से गेहूं की फसल खेतों में पीली पड़ गई है। केले, आम, लीची और अन्य फलदार पौधों के पत्ते बुरी तरह झुलस गए हैं। सब्जियों पर भी मौसम की मार पड़ रही है।
हिमाचल में शिमला, कुल्लू, किन्नौर, लाहौल के अलावा सिरमौर, कांगड़ा, मंडी और चंबा जिले के कई क्षेत्रों में सेब बागवानी होती है। आलू, मटर के लिए लाहौल-ऊना और टमाटर उत्पादन के लिए सोलन जिला मशहूर हैं।
बागवानी विभाग के विषयवस्तु विशेषज्ञ डा. देंवेद्र ठाकुर का कहना है कि दिसंबर, जनवरी में बारिश-बर्फबारी होना बहुत जरूरी है। अगर जल्द बारिश न हुई तो आने वाले समय इसका सेब बागवानी पर बुरा असर पडे़गा।
हिमाचल में सालाना सेब का इतना कारोबार
सेब के पौधों के लिए वांछित चिलिंग आवर्स पूरे होने पर संशय खड़ा हो गया है।
- सालाना सेब उत्पादन : 8 लाख मीट्रिक टन
- सेब बागवानी से जुडे़ परिवारों की संख्या : 1 लाख
- सेब का प्रति हेक्टेयर उत्पादन : 10 मीट्रिक टन तक