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Shimla News: सोशल नेटवर्किंग साइट की आड़ में चल रहा नशा तस्करी का धंधा
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शिमला पुलिस ने ऑनलाइन चल रहे नशा तस्करी के मॉड्यूल का किया भंडाफोड़, लोकेशन बेस्ड सप्लाई भी कर रहे थे कई गिरोह
सात महीने में 68 से अधिक बड़े तस्कर किए हैं गिरफ्तार
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। सोशल नेटवर्किंग साइट की आड़ में नशा तस्करी का अवैध कारोबार चलाया जा रहा है। इसमें युवा नशा तस्करों के निशाने पर हैं। शिमला पुलिस ने ऐसे मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया है, जिनके सरगना पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश समेत अन्य राज्यों में बैठकर जिला शिमला में नशा तस्करी का नेटवर्क चला रहे थे। नशे की लोकेशन बेस्ड सप्लाई भी कई गिरोह कर रहे हैं।
सरगना सोशल नेटवर्किंग साइटों के जरिये खरीदारों के संपर्क में रहते थे और लोकेशन बेस्ड तरीके से नशे की सप्लाई करते थे। पुलिस की जांच में पता चला है कि फेसबुक, इंस्टाग्राम, सिग्नल और व्हाट्सएप जैसी सोशल मीडिया और मैसेजिंग एप का इस्तेमाल नशा तस्कर अवैध गतिविधियों को अंजाम देने के लिए कर रहे हैं। इसको देखते हुए पुलिस की टीमें इन प्लेटफॉर्म पर भी लगातार निगरानी रख रही हैं, ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर नजर रखी जा सके। शिमला पुलिस ने इस साल 68 से अधिक बड़े सप्लायरों को गिरफ्तार किया है। इनमें पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और केरल समेत अन्य राज्यों के आरोपी शामिल हैं। इसके अलावा करीब 47 अंतरराज्यीय नेटवर्क का भी भंडाफोड़ किया है। इन गिरोहों की जांच में सामने आया है कि कई मामलों में नशा तस्कर नशे के आदी युवाओं और पैडलरों से संपर्क करने के लिए व्हाट्सएप समेत अन्य एप का इस्तेमाल कर रहे थे।
लोकेशन की वीडियो बनाकर भेजते थे खरीदारों को नशा
पुलिस ने कई ऐसे अंतरराज्यीय गिरोहों का भंडाफोड़ किया है, जो बड़ी सफाई से शिमला शहर और अन्य दुर्गम इलाकों में लोकेशन बेस्ड नशा तस्करी का नेटवर्क चला रहे थे। हाल ही में सामने आए एक मामले में पता चला कि आईएसबीटी के आसपास कुरकुरे और दूध के खाली पैकेट में नशा छिपाकर झाड़ियों और जंगलों में रखा जाता था। इसकी वीडियो बनाकर खरीदारों को भेजी जाती थी। इसके बाद खरीदार उस स्थान पर पहुंचकर नशा लेकर चले जाते थे। खास बात यह थी कि नशा छोड़ने और खरीदने वाले के बीच किसी तरह का सीधा संपर्क नहीं होता था। ऐसे में पुलिस के लिए भी इस तरह के मामलों को पकड़ना चुनौतीपूर्ण था। शिमला पुलिस ने तकनीकी पहलुओं और जांच के आधार पर ऐसे कई मामलों का खुलासा किया है।
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कोट
नशा तस्करी के लिए सोशल नेटवर्किंग साइटों का इस्तेमाल किया जा रहा है। कई अंतरराज्यीय गिरोहों की जांच में यह बात सामने आई है। पुलिस ने ऐसे कई मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया है। इस साल नशा तस्करों पर बड़ी कार्रवाई करते हुए 68 से अधिक बड़े तस्करों और करीब 47 अंतरराज्यीय नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। यह पिछले तीन वर्षों की अपेक्षा कई गुना अधिक है।
-गौरव सिंह, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, शिमला
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सात महीने में 68 से अधिक बड़े तस्कर किए हैं गिरफ्तार
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। सोशल नेटवर्किंग साइट की आड़ में नशा तस्करी का अवैध कारोबार चलाया जा रहा है। इसमें युवा नशा तस्करों के निशाने पर हैं। शिमला पुलिस ने ऐसे मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया है, जिनके सरगना पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश समेत अन्य राज्यों में बैठकर जिला शिमला में नशा तस्करी का नेटवर्क चला रहे थे। नशे की लोकेशन बेस्ड सप्लाई भी कई गिरोह कर रहे हैं।
सरगना सोशल नेटवर्किंग साइटों के जरिये खरीदारों के संपर्क में रहते थे और लोकेशन बेस्ड तरीके से नशे की सप्लाई करते थे। पुलिस की जांच में पता चला है कि फेसबुक, इंस्टाग्राम, सिग्नल और व्हाट्सएप जैसी सोशल मीडिया और मैसेजिंग एप का इस्तेमाल नशा तस्कर अवैध गतिविधियों को अंजाम देने के लिए कर रहे हैं। इसको देखते हुए पुलिस की टीमें इन प्लेटफॉर्म पर भी लगातार निगरानी रख रही हैं, ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर नजर रखी जा सके। शिमला पुलिस ने इस साल 68 से अधिक बड़े सप्लायरों को गिरफ्तार किया है। इनमें पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और केरल समेत अन्य राज्यों के आरोपी शामिल हैं। इसके अलावा करीब 47 अंतरराज्यीय नेटवर्क का भी भंडाफोड़ किया है। इन गिरोहों की जांच में सामने आया है कि कई मामलों में नशा तस्कर नशे के आदी युवाओं और पैडलरों से संपर्क करने के लिए व्हाट्सएप समेत अन्य एप का इस्तेमाल कर रहे थे।
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लोकेशन की वीडियो बनाकर भेजते थे खरीदारों को नशा
पुलिस ने कई ऐसे अंतरराज्यीय गिरोहों का भंडाफोड़ किया है, जो बड़ी सफाई से शिमला शहर और अन्य दुर्गम इलाकों में लोकेशन बेस्ड नशा तस्करी का नेटवर्क चला रहे थे। हाल ही में सामने आए एक मामले में पता चला कि आईएसबीटी के आसपास कुरकुरे और दूध के खाली पैकेट में नशा छिपाकर झाड़ियों और जंगलों में रखा जाता था। इसकी वीडियो बनाकर खरीदारों को भेजी जाती थी। इसके बाद खरीदार उस स्थान पर पहुंचकर नशा लेकर चले जाते थे। खास बात यह थी कि नशा छोड़ने और खरीदने वाले के बीच किसी तरह का सीधा संपर्क नहीं होता था। ऐसे में पुलिस के लिए भी इस तरह के मामलों को पकड़ना चुनौतीपूर्ण था। शिमला पुलिस ने तकनीकी पहलुओं और जांच के आधार पर ऐसे कई मामलों का खुलासा किया है।
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कोट
नशा तस्करी के लिए सोशल नेटवर्किंग साइटों का इस्तेमाल किया जा रहा है। कई अंतरराज्यीय गिरोहों की जांच में यह बात सामने आई है। पुलिस ने ऐसे कई मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया है। इस साल नशा तस्करों पर बड़ी कार्रवाई करते हुए 68 से अधिक बड़े तस्करों और करीब 47 अंतरराज्यीय नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। यह पिछले तीन वर्षों की अपेक्षा कई गुना अधिक है।
-गौरव सिंह, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, शिमला