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हिमाचल: एक महीने से नहीं हुई बारिश, सूखे की चपेट में सेब बगीचे, लग सकती है बीमारी

Mon, 19 Dec 2022 12:58 PM IST
अरविन्द ठाकुर विश्वास भारद्वाज, अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
विश्वास भारद्वाज, अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Mon, 19 Dec 2022 12:58 PM IST
सार

सेब की अच्छी फसल के लिए दिसंबर में तापमान 15 डिग्री से कम होना चाहिए, जबकि इन दिनों तापमान 20 डिग्री के करीब चल रहा है।

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drought cause damage to apple orchards in shimla himachal pradesh
सेब के बगीचे- फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बीते एक माह से बारिश नहीं होने से सेब बागीचे सूखे की चपेट में आ गए हैं। बगीचों से नमी गायब है। इस कारण फास्फोरस और पोटाश खाद डालने का काम लटक गया है। उर्वरकों की कमी से बगीचे बीमारियों की चपेट में आ सकते हैं और फल की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। समय से बारिश बर्फबारी न हुई तो चिलिंग ऑवर्स पूरे न होने पर सेब उत्पादन में भी कमी आ सकती है। 15 नवंबर के बाद सेब उत्पादक क्षेत्रों में बारिश और बर्फबारी न होने से बागवानों की चिंता बढ़ गई है।

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दिसंबर में बगीचों में फास्फोरस और पोटाश खाद डाली जाती है, लेकिन इसके लिए जमीन में नमी होना जरूरी है। इन खादों से पौधों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और जड़ें मजबूत होती हैं। सेब की अच्छी फसल के लिए दिसंबर में तापमान 15 डिग्री से कम होना चाहिए, जबकि इन दिनों तापमान 20 डिग्री के करीब चल रहा है। सर्दी के मौसम में पेड़ों से पत्ते झड़ना जरूरी है, तापमान अधिक होने से पत्ते नहीं झड़ पा रहे।
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फल उत्पादक संघ के अध्यक्ष हरीश चौहान का कहना है कि बारिश-बर्फबारी न होने से सूखे के कारण खाद डालने का काम रुक गया है। अगले एक हफ्ते भी बारिश बर्फबारी नहीं हुई तो सेब की फसल बुरी तरह प्रभावित होने का डर है। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के वैज्ञानिक संदीप शर्मा ने बताया कि मध्यम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में 15 नवंबर के बाद बारिश बर्फबारी नहीं हुई है। आगामी 20 दिसंबर तक भी मौसम शुष्क रहने की संभावना है।
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बीमारी की चपेट में आ सकते हैं बगीचे : डॉ. दिनेश
नमी न होने से बगीचों में फास्फोरस और पोटाश खाद डालने का काम प्रभावित हो रहा है। इससे बगीचे बीमारी की चपेट में आ सकते हैं। वूली एफिड का खतरा है। फल की गुणवत्ता भी प्रभावित हो सकती है। तापमान की अधिकता से फसल पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। - डॉ. दिनेश सिंह ठाकुर, सहायक निदेशक, क्षेत्रीय बागवानी अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र मशोबरा


1200 घंटे चिलिंग ऑवर जरूरी
सेब के पौधों के लिए 7 डिग्री से कम तापमान में 1000 से 1200 घंटे चिलिंग ऑवर्स की जरूरत रहती है। चिलिंग ऑवर्स पूरे न होने का असर फ्लावरिंग पर पड़ता है, पौधों में एक समान फ्लावरिंग नहीं होती। कमजोर फ्लावरिंग से फूल झड़ जाते हैं। इससे सेब उत्पादन प्रभावित हो सकता है।

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