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अमर उजाला विशेष: बिना अनुमति लिए 400 फीट से ऊपर नहीं उड़ाया जा सकता ड्रोन, जानें क्या हैं नियम

Fri, 25 Nov 2022 10:40 AM IST
Krishan Singh विश्वास भारद्वाज, शिमला
विश्वास भारद्वाज, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Fri, 25 Nov 2022 10:40 AM IST
सार

हिमाचल प्रदेश राज्य इलेक्ट्रॉनिक कारपोरेशन के प्रबंध निदेशक मुकेश रेपसवाल ने बताया कि  केंद्र सरकार के ड्रोन रूल्स 2021 के तहत एयरपोर्ट और सैन्य क्षेत्रों में ड्रोन उड़ानों की मनाही है। 

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Drone Revolution: Drone cannot be flown above 400 feet without permission
ड्रोन क्रांति। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

ड्रोन के इस्तेमाल से समय की बचत तो की जा सकती है, लेकिन इसके संचालन के लिए केंद्र सरकार के ड्रोन नियम का पालन करना जरूरी है। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) की अनुमति के बिना 400 फीट से अधिक ऊंचाई पर ड्रोन नहीं उड़ाया जा सकता। एयरस्पेस की सुरक्षा के मद्देनजर ड्रोन उड़ाने के लिए रेड, येलो और ग्रीन जोन चिह्नित किए गए हैं। डीजीसीए के डिजिटलस्काई प्लेटफॉर्म digitalsky.dgca.gov.in पर ड्रोन उड़ाने के लिए ऑनलाइन मंजूरी ली जा सकती है। डिजिटल स्काई पर देश के फ्लाई और नो फ्लाई जोन का एयरस्पेस मैप अपलोड है। ड्रोन नियम 2021 के तहत ड्रोन उड़ाने के लिए डीजीसीए को सूचित करना जरूरी है।

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हवाई अड्डे की 8 किलोमीटर की परिधि (रेड जोन) में ड्रोन उड़ाने पर पूरी तरह रोक है। 8 से 12 किलोमीटर (येलो जोन) में डीजीसीए की मंजूरी से 200 फीट ऊंचाई तक ड्रोन उड़ाया जा सकता है। 12 किलोमीटर से बाहर (ग्रीन जोन) में 400 फीट ऊंचाई तक बिना मंजूरी ड्रोन उड़ाया जा सकता है, लेकिन डीजीसीए को सूचित करना जरूरी है। सैन्य क्षेत्रों के आसपास भी बिना अनुमति ड्रोन उड़ाने की मनाही है। हिमाचल प्रदेश राज्य इलेक्ट्रॉनिक कारपोरेशन के प्रबंध निदेशक मुकेश रेपसवाल ने बताया कि  केंद्र सरकार के ड्रोन रूल्स 2021 के तहत एयरपोर्ट और सैन्य क्षेत्रों में ड्रोन उड़ानों की मनाही है। डीजीसीए के डिजिटलस्काई प्लेटफार्म पर ड्रोन उड़ाने से संबंधित अनुमति ऑनलाइन प्राप्त की जा सकती है।
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ड्रोन की हैं पांच श्रेणियां
ड्रोन को पांच श्रेणियों में विभाजित किया गया है। 250 ग्राम तक के ड्रोन नैनो, 2 किलो तक माइक्रो, 2 से 25 किलो स्माल, 25 से 150 किलो वाले ड्रोन मीडियम और 150 किलो से अधिक वजन वाले ड्रोन को लार्ज ड्रोन की श्रेणी में रखा गया है। शादी की वीडियो और इंस्ट्राग्राम रील बनाने के लिए नैनो या माइक्रो ड्रोन इस्तेमाल होेते हैं। ग्रीन जोन में इन्हें उड़ाने के लिए अनुमति जरूरत नहीं है।
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नेपाली लेबर का विकल्प बनेगा ड्रोन : विष्ट
प्रदेश की सबसे बड़ी बागवान संस्था प्रोग्रेसिव ग्रोवर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष लोकेंद्र सिंह बिष्ट के अनुसार बगीचे से गाड़ी तक सेब के बॉक्स पहुंचाने में ड्रोन बेहद कारगर साबित हो सकते हैं। आने वाले 5 सालों में ढुलाई के लिए लेबर की बड़ी किल्लत आने वाली है। अधिकतर सेब बगीचे एक से डेढ़ किमी दूर हैं। यहां सेब के बॉक्स की ढुलाई नेपाली मजदूर करते हैं। ऐसे में ड्रोन नेपाली लेबर का भी विकल्प बनेगा। ऐसे में ड्रोन की मदद से यह काम आसानी से होगा और समय की भी बचत होगी। अभी तक किसी बागवान ने सेब ढुलाई के लिए ड्रोन नहीं खरीदा है, लेकिन जल्द ही बड़े पैमाने पर लोग इसका इस्तेमाल करेंगे।
 

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