सियासी विवादों की भेंट चढ़ा सरकार का गुडवर्क
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प्रदेश सरकार का ‘अपनी शानदार उपलब्धियों भरी स्वर्णिम विकास यात्रा’ नाम से शुरू किया प्रचार बीते तीन माह में हुए कई घटनाक्रमों में गुम हो गया है। सरकार का गुडवर्क होशियार सिंह, गुड़िया और अब गद्दी प्रकरण से उपजे सियासी विवादों की भेंट चढ़ता दिख रहा है। सरकारी तंत्र की नाकामी खुलकर सामने आई है। ऐसे में सरकार के लिए सियासी मंच पर अपनी उपलब्धियां गिनाने से अधिक डैमेज कंट्रोल मजबूरी बन गया है।
भाजपा ही नहीं, कांग्रेस संगठन के परोक्ष फ्रंट से भी सरकार जूझती दिख रही है। उधर, प्रचार के फ्रंट पर एक कदम आगे चल रही भाजपा को अब सरकार अपने पांच वर्ष के गुडवर्क से पीछे धकेलने की कोशिश में है। विधानसभा चुनाव का काउंटडाउन शुरू होने वाला है। सरकार चुनाव में अपने इस कार्यकाल को भुनाने की तैयारी में है।
इसके लिए प्रदेश सरकार की उपलब्धियों को लोगों तक पहुंचाने के लिए जनसंपर्क का खाका भी खींचा गया है। बीते साढ़े चार साल में दो सौ से अधिक उल्लेखनीय उपलब्धियों का प्रचार शुरू किया गया है, लेकिन सरकार को भाजपा सियासी विवादों से बाहर निकलने का मौका ही नहीं दे रही। फॉरेस्ट गार्ड होशियार सिंह की मौत का मामला दो माह बाद भी सुर्खियोें में है। कोटखाई की गुड़िया से दुराचार और हत्या पर सियासत जारी है।
सरकार ने भले ही सीबीआई को जांच सौंप कर भाजपा पर पलटवार किया, लेकिन मामले पर से सियासी रंग उतरता नहीं दिख रहा। भाजपा सोची समझी रणनीति के तहत मुख्यमंत्री को टारगेट कर रही है। सार्वजनिक मंचों से मुख्यमंत्री का भाजपा पर हमला अकसर उन्हीं पर उलटा पड़ता जा रहा है।
गुड़िया प्रकरण में सीएम के कई बयानों पर भाजपा उन्हें घेरने में काफी हद तक कामयाब रही। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष से जोड़कर सीएम का गद्दी समुदाय पर ताजा बयान उलटा पड़ गया। भाजपा के बैनर तले एकत्रित हुए गद्दी नेताओं पर लाठीचार्ज भारी पड़ गया। सरकार ने डैमेज कंट्रोल के लिए गद्दी बोर्ड के सदस्य दोगुना से अधिक बढ़ाने के साथ कई तोहफों से नवाज दिया, लेकिन विवाद ठंडा नहीं पड़ा है।
नहीं थम रहे अंदरूनी विवाद
भाजपा के हमले के बीच सरकार के अंदरूनी विवाद भी थम नहीं रहे हैं। कांग्रेस संगठन के साथ सरकार की पटरी नहीं बैठ पा रही है। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह चुनाव की कमान अपने हाथ में चाहते हैं, लेकिन इसके लिए हाईकमान की हरी झंडी नहीं मिल रही है।
प्रदेश अध्यक्ष सुक्खू के साथ मुख्यमंत्री वीरभद्र का तालमेल बैठाने के लिए प्रदेश का प्रभार सुशील कुमार शिंदे को दिया है। अब शिंदे कितने कामयाब होते हैं इस पर काफी कुछ निर्भर करता है।
इन गुडवर्क को भुनाने की है तैयारी
- अनुबंध कर्मचारियों को तीन वर्ष में पक्का करना
- सामाजिक सुरक्षा की पेंशनों में 60 प्रतिशत तक वृद्धि
- मुख्यमंत्री कन्याधन योजना में वृद्धि
- बेरोजगारी भत्ता और कौशल विकास भत्ता
- राज्य खाद्य उपदान और राजीव गांधी अन्न योजना
- 9 उपमंडल, 14 तहसीलें और 29 उप तहसीलें बनाईं
- 2000 किमी नई सड़कें और 204 नए पुलों का निर्माण
- नए शिक्षण संस्थानों को स्थापित करना
- दिहाड़ीदारों का नियमितीकरण
- साढ़े पांच हजार करोड़ का औद्योगिक निवेश
- धर्मशाला और शिमला का स्मार्ट सिटी में चयन
- सरकारी विभागों में हजारों पदों पर भर्तियां