युवा इंटक नेता के इशारे पर ही हुआ परवाणू में फसाद : राजीव सैजल
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
परवाणू विवाद पर चुप्पी तोड़ते हुए सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. राजीव सैजल भी सामने आ गए हैं। उन्होंने अब तक हुए फसाद के लिए परवाणू के इंटक नेता को जिम्मेदार ठहराया है। पुलिस के पास दोबारा शिकायत कर इंटक नेता का नाम एफआईआर में शामिल करवाने की भी बात कही है।
बुधवार को सोलन में पत्रकारों से बातचीत में डॉ. राजीव सैजल ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के समय में परवाणू में अपराध के बीज डाले गए थे, जो आज वृक्ष का रूप ले चुके हैं।
कुछ समय पूर्व तक जो लोग ट्रक ऑपरेटरों और उद्योगपतियों से वसूली कर रहे थे वे, अब इंटक की कमान थामकर परवाणू को अपने तरीके से चलाने की कोशिश कर रहे हैं।
इंटक अध्यक्ष बावा हरदीप सिंह पर हमला नहीं होना चाहिए था, लेकिन इसकी आड़ में भाजपा मंडलाध्यक्ष की फैक्टरी और उनकी गाड़ी को निशाना बनाया गया।
हरियाणा से हिस्ट्रीशीटर गुंडों को बुलाकर परवाणू में तोड़फोड़ करवाई गई। इसके पीछे इंटक नेता का दिमाग है, लेकिन एफआईआर में उसका नाम नहीं लिखा गया।
गुंडा टैक्स बसूल रही यूनियन
मंत्री ने कहा कि परवाणू में ट्रक ऑपरेटर यूनियन गुंडा टैक्स वसूल करती है। दिल्ली तक गाड़ी ले जाने के लिए साढ़े ग्यारह हजार रुपये तक डिमांड की जाती है। दूसरी जगह से इतने ही सफर में ट्रक आधे किराये पर माल पहुंचा देते हैं।
अतिरिक्त वसूली को कहीं प्रदर्शित नहीं किया जाता है। ट्रक ऑपरेटरों को माल ढुलाई की एवज में रसीद तक नहीं मिलती है। मामले में समय पर पुलिस कार्रवाई न होने और आरोपियों की गिरफ्तारी न होने से मंत्री खासे नाराज दिखे। कहा कि पुलिस की तरफ से गलतियां हुई हैं।
इसे लेकर वे जल्द बैठक बुलाएंगे। मामले की समीक्षा की जाएगी। विवाद के बाद दोनों पक्षों के लोगों की गिरफ्तारी होनी चाहिए थी, लेकिन पुलिस इसमें नाकाम रही। भाजपा पदाधिकारियों का नाम जानबूझकर केस में लिखवाया गया है। घटना के समय परवाणू में नहीं थे।
मंत्री आरोप साबित करें : यशपाल
परवाणू के युवा इंटक नेता यशपाल ठाकुर का कहना है कि मंत्री डॉ. राजीव सैजल के आरोप उनकी नाकामी और हताशा का परिणाम हैं। प्रदेश में भाजपा की सरकार है। मंत्री हैं उन पर लगाए सभी आरोपों की जांच करवाएं। जांच में आरोप साबित होते हैं तो ठीक अन्यथा वे मंत्री के खिलाफ मानहानि का मामला दर्ज करवाएंगे।