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Shimla News: विवि की डॉ. कल्याणी को यंग वुमन साइंटिस्ट अवॉर्ड
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संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला की पर्यावरण वैज्ञानिक डॉ. कल्याणी सुप्रिया चंदेल को यंग वुमन साइंटिस्ट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है।
सुप्रिया को यह सम्मान 13वें अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन एग्रीकल्चर, हॉर्टिकल्चर एंड फोरेस्ट्री : एलाइड साइंसेज फॉर सस्टेनेबल हिमालयन इकोसिस्टम के समापन समारोह में मिला। यह सम्मान उन्हें पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी अनुसंधान में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए दिया गया। विशेष रूप से हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र में सतत विकास को लेकर उनके कार्य को सराहा गया। इनका शोध पर्वतीय क्षेत्रों में उभरती पर्यावरणीय चुनौतियों के समाधान के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण को मजबूत करता है। डॉ. चंदेल ने एमएससी एग्रीकल्चर की पढ़ाई पालमपुर स्थित चौधरी सरवन कुमार कृषि विश्वविद्यालय से पूरी की। इसके बाद उन्होंने डॉ. यशवंत सिंह परमार यूनिवर्सिटी ऑफ हॉर्टिकल्चर एंड फॉरेस्ट्री, नौणी से पीएचडी की। वह इसी विश्वविद्यालय में रिसर्च एसोसिएट भी रह चुकी हैं और एक निजी कॉलेज में अध्यापन का अनुभव भी रखती हैं। पांच वर्षों से वह हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के फैकल्टी ऑफ लाइफ साइंसेज के तहत पर्यावरण विज्ञान विभाग में कार्यरत हैं। डॉ. चंदेल ने इस उपलब्धि का श्रेय अपने माता-पिता और सहयोगियों को दिया। उन्होंने कहा कि निरंतर सहयोग और मार्गदर्शन से ही यह मुकाम हासिल हो पाया है।
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शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला की पर्यावरण वैज्ञानिक डॉ. कल्याणी सुप्रिया चंदेल को यंग वुमन साइंटिस्ट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है।
सुप्रिया को यह सम्मान 13वें अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन एग्रीकल्चर, हॉर्टिकल्चर एंड फोरेस्ट्री : एलाइड साइंसेज फॉर सस्टेनेबल हिमालयन इकोसिस्टम के समापन समारोह में मिला। यह सम्मान उन्हें पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी अनुसंधान में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए दिया गया। विशेष रूप से हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र में सतत विकास को लेकर उनके कार्य को सराहा गया। इनका शोध पर्वतीय क्षेत्रों में उभरती पर्यावरणीय चुनौतियों के समाधान के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण को मजबूत करता है। डॉ. चंदेल ने एमएससी एग्रीकल्चर की पढ़ाई पालमपुर स्थित चौधरी सरवन कुमार कृषि विश्वविद्यालय से पूरी की। इसके बाद उन्होंने डॉ. यशवंत सिंह परमार यूनिवर्सिटी ऑफ हॉर्टिकल्चर एंड फॉरेस्ट्री, नौणी से पीएचडी की। वह इसी विश्वविद्यालय में रिसर्च एसोसिएट भी रह चुकी हैं और एक निजी कॉलेज में अध्यापन का अनुभव भी रखती हैं। पांच वर्षों से वह हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के फैकल्टी ऑफ लाइफ साइंसेज के तहत पर्यावरण विज्ञान विभाग में कार्यरत हैं। डॉ. चंदेल ने इस उपलब्धि का श्रेय अपने माता-पिता और सहयोगियों को दिया। उन्होंने कहा कि निरंतर सहयोग और मार्गदर्शन से ही यह मुकाम हासिल हो पाया है।
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