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गंगा की तर्ज पर ब्यास के लिए भी बनेगी डीपीआर, बैठक में लिया फैसला
Mon, 05 Aug 2019 06:19 PM IST
Krishan Singh
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
Published by: Krishan Singh
Updated Mon, 05 Aug 2019 06:19 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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नमामि गंगे परियोजना की तरह देश की अन्य सभी मुख्य नदियों के बेसिन के जीर्णोद्धार, संरक्षण और समग्र एवं संतुलित विकास के लिए डीपीआर तैयार की जाएंगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस ड्रीम प्रोजेक्ट के तहत ब्यास नदी के लिए अरबों रुपये की डीपीआर तैयार की जाएगी। इसके लिए हिमालयन वन अनुसंधान संस्थान (एचएफआरआई) ने आवश्यक प्रक्रिया आरंभ कर दी है। इसी प्रक्रिया के तहत एचएफआरआई ने सोमवार को कुल्लू में वन्य प्राणी विंग के सम्मेलन कक्ष में एक परामर्श बैठक की।
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वन अरण्यपाल अनिल शर्मा की अध्यक्षता में हुई बैठक में विभिन्न विभागों के अधिकारियों और नगर निकाय के पदाधिकारियों ने भाग लिया। अनिल शर्मा ने बताया कि ब्यास नदी बेसिन की डीपीआर के लिए वन विभाग को नोडल विभाग बनाया गया है। डीपीआर तैयार करने में सभी संबंधित विभागों के अलावा स्थानीय निकायों और स्थानीय निवासियों की भागीदारी भी सुनिश्चित की जाएगी।
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डीपीआर में पर्यावरण व जल संरक्षण, बाढ़ नियंत्रण, पौधरोपण, कृषि-बागवानी, स्थानीय निवासियों की आजीविका और समग्र विकास के अन्य सभी पहलुओं को भी शामिल किया जाएगा।यह डीपीआर क्षेत्र की परिस्थितियों के अनुरूप तथा स्थानीय लोगों की अपेक्षाओं को पूरा करने वाली होनी चाहिए। डीपीआर के समन्वयक डॉ. विनीत जिश्टू ने बताया कि हिमाचल की पांचों मुख्य नदियों की रिपोर्ट तैयार करने के लिए एचएफआरआई को नोडल एजेंसी बनाया गया है। इसमें वन विभाग नोडल विभाग के रूप में कार्य करेगा।
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उन्होंने बताया कि डीपीआर के लिए वेब पोर्टल को विशेष रूप से इंटरएक्टिव बनाया जाएगा। इसमें सभी लोगों के सुझाव स्वीकार किए जाएंगे। फील्ड में जाकर भी स्थानीय निकायों के जनप्रतिनिधियों तथा आम लोगों के साथ सीधा संवाद किया जाएगा। उन्होंने बताया कि आने वाले दिनों में मंडी और ब्यास बेसिन में आने वाले अन्य जिलों में भी इसी तरह की परामर्श बैठक की जाएगी। इस दौरान ब्यास की डीपीआर के टीम लीडर विनोद डोगरा, एचएफआरआई के पूर्व वैज्ञानिक डॉ. केएस कपूर, जीबी पंत हिमालयन पर्यावरण संस्थान के प्रभारी डॉ. आरके सिंह मौजूद रहे।