आयोग ने कहा, सैंपल भी नहीं दिखना चाहिए 16 मई से पहले
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निर्वाचन आयोग ने 800 नई बसों की खरीद पर ब्रेक लगा दी है।
एचआरटीसी के आवेदन पर आयोग ने टेंडर प्रक्रिया करने को तो मंजूरी दे दी, लेकिन शर्त लगा दी कि 16 मई को चुनाव नतीजे आने तक नई बसों का सैंपल भी हिमाचल में नहीं दिखना चाहिए।
एमडी एचआरटीसी डा. आरएन बत्ता ने इसकी पुष्टि की है। केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय की स्कीम के तहत राज्य 230 करोड़ से 800 नई बसें खरीद रहा है।
इसी बीच एचआरटीसी ने इन बसों की खरीद के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी कर दी है। एचआरटीसी ने बसों की खरीद के लिए दूसरी बार टेंडर किया था।
टाटा और अशोक लेलैंड भेजेंगी प्रोटोटाइप सैंपल
टेंडर प्रक्रिया में टाटा, अशोक लेलैंड, स्वराज माजदा, आइशर-वोल्वो और क्रोना कंपनियों ने हिस्सा लिया।
टेंडर की तकनीकी शर्तों के कारण टाटा और अशोक लेलैंड ही क्वालिफाई कर पाई। एचआरटीसी को आधुनिक सामान्य बसें 25.20 लाख में तो एसी बसें 40 लाख में मिल रही हैं।
हिमाचल देशभर में सबसे कम रेट पाने में कामयाब रहा है। इस रेट पर उसने साढ़े बारह करोड़ रुपये बचाए हैं। टेंडर फाइनल होने के बाद एक दो दिन में यह धनराशि एचआरटीसी के खाते में आने वाली है।
इसके बाद बसों की खरीद शुरू होगी। दोनों कंपनियों से पहले प्रोटोटाइप सैंपल के तौर पर भेजने को कहा गया है।
500 बसें पहले ही खरीद चुका एचआरटीसी
इससे पहले 500 बसें एचआरटीसी पहले खरीद चुका है। इनमें से 300 आ गई हैं। करीब 2000 बसों के बेड़े वाले एचआरटीसी के पास इस समय करीब 300 बसें जीरो बुक वैल्यू की हैं।
हर महीने कंडम हो जाती हैं 20 बसें
हर महीने करीब 20 बसें कंडम हो जाती हैं। ऐसे में नई बसों आने से बस बेड़ा नया हो जाएगा।
केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय की इस योजना के तहत 63 करोड़ रुपये बस अड्डों में सुविधाएं जुटाने और वर्कशाप्स के संवर्धन पर खर्च किए जाएंगे।