हिमाचल में देसी गायों की नस्ल महफूज रहेगी, विधानसभा में बिल पेश
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हिमाचल में देसी गायों की नस्ल महफूज रहेगी। पशुपालकों को देसी बैलों का मिलावटी वीर्य उपलब्ध करवाया तो इस पर तीन साल कठोर कारावास और एक लाख से पांच लाख तक जुर्माने का प्रावधान होगा।
बुधवार को विधानसभा में हिमाचल प्रदेश गोजातीय प्रजनन विधेयक 2019 पेश किया। इसे आगामी दिनों में पारित किया जाएगा। पशुपालन मंत्री वीरेंद्र कंवर ने सदन के पटल पर विधेयक की प्रति रखी। इसमें स्पष्ट किया कि केवल उसी नस्ल का वीर्य शुक्राणु केंद्र उपलब्ध करवाएंगे, जिसकी प्रदेश में अनुमति होगी।
हिमशीतित वीर्य से कृत्रिम गर्भाधान श्रेष्ठतर बीज जीवाणु के प्रसार के माध्यम से सर्वोत्तम उपाय सिद्ध हुआ है। नए बिल में शुक्राणु केंद्रों का पंजीकृत किया जाना अनिवार्य है। राज्य के भीतर ही नहीं, बाहर एकत्र वीर्य को भी कानूनन हिमाचल में लाना होगा।
वीर्य उत्पादन के लिए उत्तम आनुवांशिक गुणों से युक्त बैलों का उपयोग होगा। नए कानून लागू करने के लिए पशुपालन निदेशक की अध्यक्षता में एक प्राधिकरण बनेगा। इसमें नौ से अधिक सदस्य होंगे। यह पशुपालन निदेशालय से ही कार्यरत होगा।