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मांगें न मानी तो सभी रेजिडेंट डॉक्टर करेंगे हड़ताल
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
Updated Fri, 11 Dec 2015 10:21 PM IST
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प्रदेश मेडिकल ऑफिसर एसोसिएशन ने अफसरशाही पर डॉक्टरों और सरकार के बीच खाई पैदा करने का आरोप लगाया है। एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. संत लाल शर्मा और महासचिव डॉ. जीवानंद चौहान ने कहा कि स्वास्थ्य सचिव जानबूझ कर मुख्यमंत्री द्वारा मानी गई मांगों को लागू करने में आनाकानी कर रहे हैं।
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यही वजह है कि डॉक्टरों को अपनी मांगों के लिए हड़ताल पर जाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। रेजिडेंट डॉक्टरों की हड़ताल को पूरी तरह जायज ठहराते हुए एसोसिएशन ने इन्हें तुरंत मानने को कहा है। अगर जल्द ही उनकी मांगों को नहीं माना गया तो मजबूरी में उन्हें भी हड़ताल में उतरना पड़ेगा।
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प्रदेश मेडिकल ऑफिसर एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. संतलाल शर्मा और महासचिव डॉ. जीवानंद चौहान ने कहा कि अगस्त में मुख्यमंत्री ने एसोसिएशन से साथ बैठक कर सभी मांगों को मंजूरी दी थी। लेकिन अफसरशाही ने अभी तक इन मांगों को पूरा नहीं किया है। मुख्यमंत्री ने 90 दिन के भीतर डॉक्टरों की वरीयता सूची बनाने का आदेश दिया था, वह भी पूरा नहीं हुआ।
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डॉक्टरों की सुरक्षा का मामला भी खटाई में पड़ा है। इससे साफ है कि अफसरशाही डॉक्टरों के प्रति पूरी तरह नकारात्मक है। प्रदेश मेडिकल ऑफिसर एसोसिएशन ने स्वास्थ्य सचिव के नकारात्मक रवैये की आलोचना करते हुए कहा है कि डॉक्टरों की लंबे समय से विचाराधीन मांगों पर कोई विचार नहीं किया जा रहा है।
रेजिडेंट डॉक्टरों के मानदेय को तुरंत बढ़ाने का समर्थन करते हुए एसोसिएशन ने कहा है कि अन्य राज्यों की अपेक्षा हिमाचल में आरडीए डॉक्टरों का मानदेय बहुत कम है। जबकि डॉक्टरों की पढ़ाई आज के समय में बहुत मंहगी हो गई है। उन्होंने कहा है कि डॉक्टरों के साथ अन्याय सहन नहीं किया जाएगा।
प्रदेश मेडिकल ऑफिसर एसोसिएशन ने स्वास्थ्य सचिव को चेतावनी दी है कि अगर उन्होंने मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह द्वारा मानी गई मांगों को तुरंत कार्यान्वित नहीं किया तो उन्हें भी हड़ताल पर जाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा जिसकी पूरी जिम्मेवारी स्वास्थ्य सचिव की होगी।
आईजीएमसी, टांडा में मरीज हुए परेशान- इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी) और टांडा मेडिकल कॉलेज, अस्पताल में शुक्रवार को रेजिडेंट डॉक्टर दो घंटे हड़ताल पर रहे। सुबह नौ से ग्यारह बजे तक रेजिडेंट डॉक्टरों ने अस्पताल में ड्यूटी नहीं दी। इस कारण सैकड़ों लोगों को परेशान होना पड़ा। आरडीए के अध्यक्ष ऋषि नाभ ने कहा कि जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं, हड़ताल जारी रहेगी।
ब्रेक माना जाएगा डाक्टरों की हड़ताल का समय- आईजीएमसी और टांडा मेडिकल कॉलेज के हड़ताली डाक्टरों को राज्य सरकार नोटिस जारी करेगी। आवश्यक सेवाओं को बाधित करने के आरोप में नोटिस देकर पूछा जाएगा कि क्यों न उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए। हड़ताल के समय को नौकरी में ब्रेक भी माना जाएगा।
डाक्टरों के अड़ियल रुख से नाराज होकर स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह ठाकुर ने यह फैसला लिया है। शुक्रवार को सचिवालय में पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत में स्वास्थ्य मंत्री ने कहा 14 दिसंबर को डाक्टरों को वार्ता के लिए बुलाया गया है। ऐसे में हड़ताल करने का कोई मतलब नहीं रह जाता।
उन्होंने कहा कि सरकार जिन पीजी डाक्टरों को स्टाइपंड दे रही है, उन्हें नोटिस दिए जाएंगे। कौल सिंह ठाकुर ने बताया कि अतिरिक्त मुख्य सचिव विनीत चौधरी दिल्ली के दौरे से लौटकर आरडीए डाक्टरों से बात करेंगे। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि डाक्टरों को नियमित सेवाएं देनी चाहिए। सरकार डाक्टरों की मांगों को लेकर चिंतित है।