तो अब डॉक्टरों को करना पड़ेगा ये काम
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प्रदेश के नौ जिलों में डॉक्टर ही फूड सेफ्टी ऑफिसर (एफएसओ) का काम संभालेंगे। एमओ को बतौर एफएसओ तैनात करने के लिए मुख्य चिकित्सा अधिकारी को अधिकृत किया गया है। सरकार ने अधिसूचना जारी कर दी है। डॉक्टरों के बतौर एफएफओ होल टाइम या अतिरिक्त कार्यभार संभालने के बारे में अभी कोई स्थिति स्पष्ट नहीं है। वर्तमान में एफएसओ डेजिनेटिड ऑफिसर के लिए प्रमोट होने के कारण मात्र तीन जिलों में एफएसओ सेवाएं दे रहे हैं। नौ में पद रिक्त हैं।
इनके लिए भर्ती की जानी है। सरकार ने भर्ती होने तक डॉक्टरों को एफएसओ का कार्यभार दिया है। प्रदेश में पहले ही डॉक्टरों की कमी है। कई स्वास्थ्य संस्थान बिना डॉक्टरों के चल रहे हैं। अब डॉक्टरों को एफएसओ का कार्य सौंपने से स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होंगी। फूड सेफ्टी स्टैंडर्ड एक्ट में डॉक्टर एफएसओ बनने की योग्यता रखते हैं, लेकिन एफएसओ का होल टाइमर होना अनिवार्य है।
इन जिलों में होगी तैनाती
सरकार की ओर से जारी अधिसूचना में डॉक्टर के होल टाइम या अतिरिक्त कार्यभार को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं की गई है। पूर्व में लाहौल-स्पीति और किन्नौर में दो डॉक्टरों को एफएसओ का कार्यभार दिया था। दोनों ने एक भी सैंपल नहीं भरा है। हाल ही में पांच एफएसओ को स्थायी डीओ के रूप में पदोन्नति दी गई है।
इससे प्रदेश में एफएसओ की कमी हो गई है। उधर, स्वास्थ्य सुरक्षा एवं विनियमन के निदेशक रामेश्वर शर्मा ने बताया कि एफएसओ के रिक्त पदों पर डॉक्टर को तैनात किया जा रहा है। डॉक्टर के बतौर एफएसओ होल टाइम काम करने के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने किसी भी टिप्पणी से इनकार किया।
सरकार की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार बिलासपुर, हमीरपुर, कांगड़ा, किन्नौर, लाहौल-स्पीति, मंडी, शिमला, सिरमौर और ऊना में डॉक्टर को बतौर एफएसओ तैनात किया जाएगा। बतौर एफएसओ एक डॉक्टर के पास पूरे जिले का कार्यभार रहेगा।