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Shimla News: लोअर खलीनी के लिए न बसें, स्ट्रीट लाइटें भी हैं खराब
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खलीनी वार्ड के समाधान शिविर में लोगों ने उठाईं क्षेत्र की समस्याएं, नगर निगम से किया राहत दिलाने का आग्रह
सड़कों की खस्ताहालत से भी परेशान हैं लोग
संवाद न्यूज़ एजेंसी
शिमला। राजधानी के खलीनी वार्ड में शनिवार को आयोजित नगर निगम के समाधान शिविर में लोअर खलीनी के लिए बस सेवाओं की कमी का मुद्दा गरमाया रहा। लोगों ने बताया कि लोअर खलीनी के झंझीड़ी क्षेत्र से पहले बसें चला करती थीं लेकिन अब केवल एक टेंपो ट्रैवलर चल रहा है। यह टॉलैंड तक ही जाता है। इससे ऑफिस जाने वाले कर्मचारियों और स्कूल जाने वाले बच्चों को रोज परेशानी होती है।
लोगों ने मांग की कि झंझीड़ी से नियमित बस सेवा फिर से शुरू की जाए। शिविर में जल शुद्धिकरण संयंत्र को लेकर भी शिकायतें आईं। स्थानीय लोगों ने कहा कि कुछ साल पहले अमृत योजना के तहत लगभग दो लाख रुपये की लागत से जल शुद्धिकरण संयंत्र खलीनी में लगाया था लेकिन वह अब केवल शोपीस बनकर रह गया है। वहां से गंदा और जहरीला पानी निकल रहा है। न जल शक्ति विभाग और न ही पेयजल कंपनी इसकी मरम्मत करवा रहा है। इससे स्वास्थ्य संबंधी खतरा बढ़ गया है।
लोगों ने खलीनी में टूटी सड़कों और स्ट्रीट लाइट की कमी पर भी चिंता जताई। कई स्थानों पर सड़कें बेहद खराब हालत हैं, जिससे हादसों का डर बना रहता है। वहीं चौराहों और गली-मोहल्लों में स्ट्रीट लाइट न होने से रात के समय लोग असुरक्षित महसूस करते हैं। व्यापारियों ने भी मांग की कि कूड़ा दुकानों के खुलने के बाद ही उठाया जाए ताकि सभी दुकानदार आसानी से कूड़ा निपटा सकें। इसके अलावा स्थानीय निवासियों ने यह भी कहा कि कई विकास कार्य फाइलों में ही अटके हैं। लोगों ने खलीनी में डिस्पेंसरी खोलने, सफाई व्यवस्था दुरुस्त करने और अवरोधित नालियों को साफ करवाने की मांग की। शिविर के दौरान मुख्य चिकित्सा अधिकारी चेतन चौहान, जल विभाग के कनिष्ठ अभियंता पुष्पराज और पार्षद चमन प्रकाश सहित संबंधित शाखाओं के सभी अधिकारी मौजूद रहे।
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बस सेवा शुरू कर परिवहन निगम
बस सेवा न होने से सुबह बच्चों को स्कूल पहुंचने में बहुत दिक्कत होती है। पहले बस चलती थी तो आसानी होती थी। परिवहन निगम को लोअर खलीनी के लिए बसें चलानी चाहिए या सस्ती दरों पर दो टैक्सियां चलाई जाएं।
-रुकमणी
घर जाने के लिए नहीं है रास्ता
बरसातों में मेरा घर असुरक्षित हो गया था और इसके बाद घर को खाली करवा दिया है। अब घर तो सुरक्षित है लेकिन घर तक पहुंचने के लिए रास्ता नहीं है।
-योगेश
सड़कों पर छाया रहता है अंधेरा
कई इलाकों में स्ट्रीट लाइटें नहीं हैं और इससे घर जाने में दिक्कत आती है। इन इलाकों में नशेड़ियों का जमावड़ा भी लगा रहता है।
-सुमन
पानी के फिल्टर है खराब
दुर्गा पब्लिक स्कूल के पास का प्राकृतिक टैंक और वहां लगाया पानी का फिल्टर 2 सालों से बंद है। इस पर संबंधित आईपीएच अधिकारी आंख मूंदे बैठे हैं।
-एचआर शर्मा
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सड़कों की खस्ताहालत से भी परेशान हैं लोग
संवाद न्यूज़ एजेंसी
शिमला। राजधानी के खलीनी वार्ड में शनिवार को आयोजित नगर निगम के समाधान शिविर में लोअर खलीनी के लिए बस सेवाओं की कमी का मुद्दा गरमाया रहा। लोगों ने बताया कि लोअर खलीनी के झंझीड़ी क्षेत्र से पहले बसें चला करती थीं लेकिन अब केवल एक टेंपो ट्रैवलर चल रहा है। यह टॉलैंड तक ही जाता है। इससे ऑफिस जाने वाले कर्मचारियों और स्कूल जाने वाले बच्चों को रोज परेशानी होती है।
लोगों ने मांग की कि झंझीड़ी से नियमित बस सेवा फिर से शुरू की जाए। शिविर में जल शुद्धिकरण संयंत्र को लेकर भी शिकायतें आईं। स्थानीय लोगों ने कहा कि कुछ साल पहले अमृत योजना के तहत लगभग दो लाख रुपये की लागत से जल शुद्धिकरण संयंत्र खलीनी में लगाया था लेकिन वह अब केवल शोपीस बनकर रह गया है। वहां से गंदा और जहरीला पानी निकल रहा है। न जल शक्ति विभाग और न ही पेयजल कंपनी इसकी मरम्मत करवा रहा है। इससे स्वास्थ्य संबंधी खतरा बढ़ गया है।
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लोगों ने खलीनी में टूटी सड़कों और स्ट्रीट लाइट की कमी पर भी चिंता जताई। कई स्थानों पर सड़कें बेहद खराब हालत हैं, जिससे हादसों का डर बना रहता है। वहीं चौराहों और गली-मोहल्लों में स्ट्रीट लाइट न होने से रात के समय लोग असुरक्षित महसूस करते हैं। व्यापारियों ने भी मांग की कि कूड़ा दुकानों के खुलने के बाद ही उठाया जाए ताकि सभी दुकानदार आसानी से कूड़ा निपटा सकें। इसके अलावा स्थानीय निवासियों ने यह भी कहा कि कई विकास कार्य फाइलों में ही अटके हैं। लोगों ने खलीनी में डिस्पेंसरी खोलने, सफाई व्यवस्था दुरुस्त करने और अवरोधित नालियों को साफ करवाने की मांग की। शिविर के दौरान मुख्य चिकित्सा अधिकारी चेतन चौहान, जल विभाग के कनिष्ठ अभियंता पुष्पराज और पार्षद चमन प्रकाश सहित संबंधित शाखाओं के सभी अधिकारी मौजूद रहे।
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बस सेवा शुरू कर परिवहन निगम
बस सेवा न होने से सुबह बच्चों को स्कूल पहुंचने में बहुत दिक्कत होती है। पहले बस चलती थी तो आसानी होती थी। परिवहन निगम को लोअर खलीनी के लिए बसें चलानी चाहिए या सस्ती दरों पर दो टैक्सियां चलाई जाएं।
-रुकमणी
घर जाने के लिए नहीं है रास्ता
बरसातों में मेरा घर असुरक्षित हो गया था और इसके बाद घर को खाली करवा दिया है। अब घर तो सुरक्षित है लेकिन घर तक पहुंचने के लिए रास्ता नहीं है।
-योगेश
सड़कों पर छाया रहता है अंधेरा
कई इलाकों में स्ट्रीट लाइटें नहीं हैं और इससे घर जाने में दिक्कत आती है। इन इलाकों में नशेड़ियों का जमावड़ा भी लगा रहता है।
-सुमन
पानी के फिल्टर है खराब
दुर्गा पब्लिक स्कूल के पास का प्राकृतिक टैंक और वहां लगाया पानी का फिल्टर 2 सालों से बंद है। इस पर संबंधित आईपीएच अधिकारी आंख मूंदे बैठे हैं।
-एचआर शर्मा