Gobindsagar Lake Accident: गोताखोर भूपेंद्र बोले- डंडे और घास पकड़ पानी से निकलने का किया था प्रयास
गोताखोर भूपेंद्र की मानें तो झील में उतरने के बाद कुछ ही दूरी में ढलान थी। पानी के भीतर उखड़ी हुई घास और डंडे मिले हैं। पानी के भीतर सब चीजों को देखने के बाद बचाव के लिए प्रयास करने का पता चलता है।
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गोबिंदसागर झील में डूबने से पहले पंजाब के सातों युवाओं ने बचने के लिए कड़ा संघर्ष किया, लेकिन पानी की गहराई न समझ पाने के कारण सभी झील में डूब गए। युवाओं ने डंडे और घास पकड़कर झील से निकलने का प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिल पाई। शव बरामद करने के लिए झील में उतरे गोताखोर भूपेंद्र सिंह को पानी के अंदर उखड़ी घास और डंडे मिले। सोमवार शाम करीब 6:00 बजे गोबिंदसागर झील किनारे पहुंचे गोताखोर को कुछ ही दूरी पर एक युवक का शव मिला। गोताखोर को सभी शव 40 से 50 फीट की दूरी पर बरामद हुए। सभी शव एक दूसरे से करीब 10 से 15 फीट की दूरी पर थे। गोताखोर भूपेंद्र की मानें तो झील में उतरने के बाद कुछ ही दूरी में ढलान थी। पानी के भीतर उखड़ी हुई घास और डंडे मिले हैं। पानी के भीतर सब चीजों को देखने के बाद बचाव के लिए प्रयास करने का पता चलता है।
आसपास घूम रहे पंजाब के युवा पहुंचे मौके पर
घटना का पता चलते ही आसपास घूम रहे पंजाब के युवाओं का मौके पर जमघट गया। युवा एक-दूसरे को ढांढस बंधाते रहे। श्री नयनादेवी जी में दर्शन करने के लिए पहुंचे रवि कुमार ने बताया कि सूचना मिलते ही अपनों की खैरियत लेने पहुंच गए। उन्होंने घटना को दुखद बताया। कहा कि सातों युवा बनूड़ गांव के एक ही गली में रहते थे। इस घटना से पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई है।
दोस्त का शव देखते हुए मची चीखपुकार
गोताखोर ने जब पहला शव झील से निकाला तो मौके पर मौजूद युवाओं में चीखपुकार मच गई। रोते-बिलखते युवा दोस्त के शव की ओर दौड़े। साथी युवा आंसू नहीं रोक पाए। सुरक्षित युवा अपने दोस्त की तरफ भागने लगे, लेकिन पुलिस और अन्य ने उन्हें रोक लिया। एसडीएम बंगाणा योगराज धीमान ने युवाओं को समझाया और शांत किया।
खैरियत के लिए फोन करते रहे परिजन
आग की तरह फैली यह खबर पंजाब तक जा पहुंची। अपनों की खैरियत लेने के लिए सुरक्षित युवाओं को परिजन फोन करते रहे। अपने लाडले से संपर्क न होने पर पंजाब से परिजनों ने अन्य युवक से संपर्क किया तो वह उसके डूबने की सूचना नहीं दे पाया। उसने एक अन्य युवक की ही फोन पर बात करवाकर उनके लाडले के सुरक्षित होने का दिलासा दिया।
घटनास्थल से कुछ दूर पंजाबी-हिंदी भाषा में लगे हैं चेतावनी बोर्ड
गोबिंदसागर झील के किनारे कोलका में घटनास्थल से कुछ ही दूरी पर चेतावनी बोर्ड लगे हैं। इन्हें नजरअंदाज करते हुए युवा झील में नहाने उतर गए। लापरवाही के चलते सात युवाओं की जान चली गई। गरीब नाथ मंदिर के लिए जाते हुए पहले ही पंजाबी और हिंदी में चेतावनी बोर्ड लगे हैं। इसमें साफ तौर पर झील किनारे न जाने और गहराई के बारे में लिखा हुआ है। यह जानलेवा होने की बात भी लिखी है। बावजूद इसके पर्यटक इन्हें अनदेखा कर रहे हैं और हादसे हो रहे हैं। ऐसा ही सोमवार को दोपहर बाद घटित हुआ। इन युवाओं की लापरवाही हादसे का कारण बनी और मोहाली के बनूड़ गांव के कई घरों के चिराग बुझ गए। झील में गर्मी से राहत पाने के लिए उतरे युवा मस्ती करना चाहते थे, लेकिन कुछ और ही घटित हो गया और जान पर बन गई। कुछ समय तक जद्दोजहद करने के बाद झील में समा गए।
गोताखोर भूपेंद्र का कहना है कि झील किनारे और झील के पानी को हल्के में न लें। यह किसी के लिए भी खतरा बन सकता है। ठंडे पानी के कारण टांगों में क्रैंप हो जाते हैं। इस वजह से तैराक के लिए बचना मुश्किल हो जाता है। तैराकी न जानने वालों के लिए यह मौत के कुएं के समान हो जाता है। नदी नालों के किनारे मस्ती न ही की जाए तो बेहतर है। बता दें कि गोबिंदसागर झील पंजाब से सटी हुई है। गरीब नाथ मंदिर से करीब 20 किलोमीटर की दूरी पर नंगल स्थित है। यहां से रोजाना सैलानी घूमने के लिए पहुंचते हैं, लेकिन उनकी छोटी सी लापरवाही उनके लिए भारी साबित हो सकती है।