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एसएफआई

Mon, 31 Oct 2022 11:48 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Mon, 31 Oct 2022 11:48 PM IST
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dispute on recuritment
dispute on recuritment
पीएचडी में अपात्रों को दिए
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प्रवेश को रद्द करे एचपीयू
एसएफआई का विवि प्रशासन से आग्रह
बोले, आरोपों के बावजूद दबा दिया गया मामला
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। एसएफआई की विश्वविद्यालय इकाई ने यूजीसी की नियमावली को दरकिनार कर अधिकारियों के अपात्र बच्चों को पीएचडी में दिए प्रवेश को रद्द करने की मांग की है।
इकाई अध्यक्ष हरीश और सचिव सुरजीत का आरोप है कि पूर्व कुलपति, पूर्व डीन प्लानिंग एवं शिक्षक मामले, निदेशक यूआईटी पर लगे गंभीर आरोपों के बावजूद इस मामले को दबा दिया गया। अधिकारी अपने बच्चों को पात्रता की आवश्यक शर्तें पूरी न करने के बावजूद पीएचडी करवा रहे हैं।
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उन्होंने कहा कि अब जबकि विवि की ग्रेडिंग के लिए यूजीसी नैक टीम दौरा कर रही है तो इसी का बहाना कर विश्वविद्यालय में 270 से अधिक शिक्षक भर्ती किए गए। इसमें योग्यता को दरकिनार कर चहेतों को लाभ दिया है। 70 फीसदी भर्तियां यूजीसी के विनियमन-2018 के अनुसार नहीं की गई हैं। एसएफआई लगातार तथ्यों के आधार पर शिक्षक भर्ती की निष्पक्ष जांच करवाने की मांग कर रही है। सरकार भी इस पर मूक बनी रही। यह आने वाली कई पीढ़ियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।
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उन्होंने विवि के ईआरपी प्रोजेक्ट में करोड़ों के घोटाले के आरोप लगाए हैं। अभी करोड़ों खर्च करने के बावजूद विवि का ईआरपी कंप्यूटराइजेशन प्रोजेक्ट फेल हुआ है। इससे विवि की गोपनीयता पर खतरा मंडरा गया है। विवि एक निजी कंपनी को 10 करोड़ से अधिक का भुगतान कर चुका है लेकिन नतीजा शून्य है। हरीश ने कहा कि आंकड़ों का खेल कर विवि ए प्लस ग्रेड पाने के लिए कोशिश कर रहा है।
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