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Shimla News: दिव्यांग महिलाएं 5 फीसदी अधिक शोषण का शिकार
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वेबीनार में वक्ताओं ने रखे विचार
दिव्यांग महिलाओं के प्रति नजरिया बदलें : मेहता
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर उमंग फाउंडेशन की ओर से वेबीनार का आयोजन किया गया। इसमें एनटीपीसी के वरिष्ठ प्रबंधक (एचआर) एवं ओल्ड एज होम की निदेशक वीना मेहता वर्मा ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की।
वेबीनार का विषय दिव्यांग महिलाओं के समक्ष चुनौतियां और भविष्य की राह रखा था। कार्यक्रम की अध्यक्षता भारतीय चुनाव आयोग की यूथ आईकॉन एवं दृष्टिबाधित असिस्टेंट प्रोफेसर मुस्कान नेगी ने की। इसमें हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय की दिव्यांग छात्राओं समेत विभिन्न जिलों की दिव्यांग महिलाओं ने हिस्सा लिया। मुख्य वक्ता ने कहा कि समाज को दिव्यांग महिलाओं के प्रति नजरिया बदलने की जरूरत है। इसके बिना संसद द्वारा पारित कानून भी उन्हें न्याय दिलाने में नाकाम हो रहे हैं। कहा कि संविधान ने सभी नागरिकों को समान अधिकार दिए हैं। लेकिन सड़ी-गली मानसिकता के कारण दिव्यांगों के साथ लगातार भेदभाव और अत्याचार होता रहता है। व्हीलचेयर यूजर एमबीबीएस विद्यार्थी निकिता चौधरी ने दिव्यांग महिलाओं के आंकड़े बताते हुए कहा कि आम महिलाओं की तुलना में दिव्यांग महिलाएं पांच फीसदी अधिक यौन एवं शोषण का शिकार होती हैं। दृष्टिबाधित असिस्टेंट प्रोफेसर मुस्कान नेगी ने कहा कि दिव्यांग महिलाओं की चुनौतियां पुरुषों की तुलना में ज्यादा होती हैं। बेटी की दिव्यांगता के कारण परिवार उसकी शिक्षा, समाज में भागीदारी और विवाह का अवसर ही नहीं देता।
उमंग फाउंडेशन के अध्यक्ष प्रो. अजय श्रीवास्तव ने बताया कि इसके अलावा वेबीनार में दृष्टिबाधित और घुमारवीं में एक सरकारी विभाग में कार्यरत अंजना कुमारी, कांगड़ा जिला की व्हीलचेयर यूजर शिक्षिका निखिल चौधरी, ज्वालाजी की उच्च शिक्षित शिक्षिका दृष्टिबाधित बनिता राणा, बीएड की दृष्टिबाधित विद्यार्थी शिवानी अत्री, शारीरिक दिव्यांग एवं कुल्लू में सरकारी कर्मचारी बबीता ठाकुर ने भी विचार व्यक्त किए।
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दिव्यांग महिलाओं के प्रति नजरिया बदलें : मेहता
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर उमंग फाउंडेशन की ओर से वेबीनार का आयोजन किया गया। इसमें एनटीपीसी के वरिष्ठ प्रबंधक (एचआर) एवं ओल्ड एज होम की निदेशक वीना मेहता वर्मा ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की।
वेबीनार का विषय दिव्यांग महिलाओं के समक्ष चुनौतियां और भविष्य की राह रखा था। कार्यक्रम की अध्यक्षता भारतीय चुनाव आयोग की यूथ आईकॉन एवं दृष्टिबाधित असिस्टेंट प्रोफेसर मुस्कान नेगी ने की। इसमें हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय की दिव्यांग छात्राओं समेत विभिन्न जिलों की दिव्यांग महिलाओं ने हिस्सा लिया। मुख्य वक्ता ने कहा कि समाज को दिव्यांग महिलाओं के प्रति नजरिया बदलने की जरूरत है। इसके बिना संसद द्वारा पारित कानून भी उन्हें न्याय दिलाने में नाकाम हो रहे हैं। कहा कि संविधान ने सभी नागरिकों को समान अधिकार दिए हैं। लेकिन सड़ी-गली मानसिकता के कारण दिव्यांगों के साथ लगातार भेदभाव और अत्याचार होता रहता है। व्हीलचेयर यूजर एमबीबीएस विद्यार्थी निकिता चौधरी ने दिव्यांग महिलाओं के आंकड़े बताते हुए कहा कि आम महिलाओं की तुलना में दिव्यांग महिलाएं पांच फीसदी अधिक यौन एवं शोषण का शिकार होती हैं। दृष्टिबाधित असिस्टेंट प्रोफेसर मुस्कान नेगी ने कहा कि दिव्यांग महिलाओं की चुनौतियां पुरुषों की तुलना में ज्यादा होती हैं। बेटी की दिव्यांगता के कारण परिवार उसकी शिक्षा, समाज में भागीदारी और विवाह का अवसर ही नहीं देता।
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उमंग फाउंडेशन के अध्यक्ष प्रो. अजय श्रीवास्तव ने बताया कि इसके अलावा वेबीनार में दृष्टिबाधित और घुमारवीं में एक सरकारी विभाग में कार्यरत अंजना कुमारी, कांगड़ा जिला की व्हीलचेयर यूजर शिक्षिका निखिल चौधरी, ज्वालाजी की उच्च शिक्षित शिक्षिका दृष्टिबाधित बनिता राणा, बीएड की दृष्टिबाधित विद्यार्थी शिवानी अत्री, शारीरिक दिव्यांग एवं कुल्लू में सरकारी कर्मचारी बबीता ठाकुर ने भी विचार व्यक्त किए।
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