Hamirpur News: सीएम सुक्खू के विधानसभा क्षेत्र में डायरिया के मामले 970 के पार, टीम ने किया क्षेत्र का दौरा
मंगलवार को चौथे दिन भी डायरिया के 105 नए मामले सामने आए हैं। क्षेत्र में डायरिया के कुल मामलों की संख्या बढ़कर 973 पहुंच गई है।
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मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के गृह विधानसभा क्षेत्र नादौन में डायरिया का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। मंगलवार को चौथे दिन भी डायरिया के 105 नए मामले सामने आए हैं। क्षेत्र में डायरिया के कुल मामलों की संख्या बढ़कर 973 पहुंच गई है। लोग उल्टी और दस्त से बेहाल हैं। स्वास्थ्य विभाग की छह टीमें लगातार क्षेत्र में काम कर रही हैं। 28 जनवरी को 193 मामले, 29 जनवरी को 340, 30 जनवरी को 335 और अब 31 जनवरी को 105 नए मामले सामने आए हैं। क्षेत्र में डायरिया के बढ़ते मामले चिंता का विषय बन गए हैं। हालात दिन-प्रतिदिन बेकाबू होते जा रहे हैं। दरअसल बीते दिन हुई बारिश के बाद जलशक्ति विभाग की स्कीमों का पानी दूषित हुआ। लेकिन, विभाग ने समय पर इस ओर ध्यान नहीं दिया। इसके चलते अब हालात बदतर हो गए हैं। जानकारों का कहना है कि अगर सभी विभागों ने अपनी जिम्मेवारी का सही निर्वहन किया होता तो आज यह हालात नहीं होते। पेयजल स्कीमों का पानी दूषित होने के पीछे कुनाह खड्ड में स्थापित क्रशर भी बड़ी वजह माने जा रहे हैं।
पेयजल स्कीम से महज 500 मीटर की दूरी पर क्रशर संचालकों ने अवैध खनन करके खड्ड के किनारे जगह-जगह गहरे गड्ढे कर दिए हैं, जहां पर महीनों से पानी जमा हुआ है। बारिश होने के बाद इन गंदे तालाबों का पेयजल स्कीम में घुल जाता है। इससे पूरी पेयजल स्कीम दूषित हो रही है। क्रशर की वजह से पानी का स्तर भी छह से सात फीट नीचे चला गया है। जलशक्ति विभाग को भी अपनी स्कीम तक पानी पहुंचाने के लिए खड्ड के किनारे गहरी खुदाई करके कूहल का निर्माण करना पड़ा है। जबकि, पूर्व में पानी बराबर बहता था तो इस तरह की कूहलों की आवश्यकता विभाग को नहीं पड़ी। वर्तमान में खड्ड का जलस्तर चार से पांच मीटर तक नीचे चला गया है, जिसकी वजह से परकुलेशन कुएं में पानी की मात्रा निरंतर कम हो रही है। नियाटी मझोट, मंजला वन हार व पन्याला रंगस तीनों जल परियोजनाएं कुनाह खड्ड पर स्थित हैं। विभाग ने यह स्कीमें 90 के दशक में स्थापित की थीं।
परियोजनाओं के साथ लगती कुनाह खड्ड का जलस्तर छह मीटर के करीब नीचे चला गया है। विभाग की ओर से परियोजनाओं के साथ ही एक कूहल का निर्माण करके एक तालाब बनाया गया है। जलस्तर नीचे जाने का मुख्य कारण अवैध खनन है। विभाग ने परियोजनाओं की कुछ दूरी पर स्थापित स्टोन क्रशर चलाने वाली फर्म को अवैध खनन से होने वाले नुकसान को लेकर एक नोटिस भी जारी किया था। अब पूरी जांच करने के बाद ही जल परियोजनाओं से क्षेत्रवासियों को पेयजल आपूर्ति की जाएगी।-ई. नीरज भोगल, अधीक्षण अभियंता, जल शक्ति विभाग हमीरपुर।
पिछले चार दिन से लगातार जोलसप्पड़, रंगस, दंगड़ी व भूंपल क्षेत्रों से डायरिया के मामले आ रहे हैं। अभी तक 973 मामले सामने आ चुके हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीमें पीड़ित मरीजों का उनके घर-घर जाकर फॉलोअप ले रही हैं। दवाइयों और ओआरएस के पैकेट वितरित किए गए हैं। सैंपलों की रिपोर्ट बुधवार तक आने की संभावना है, उसके बाद ही इसको लेकर कुछ कहा जा सकता है।-डॉ. आरके अग्निहोत्री, सीएमओ हमीरपुर।
डायरिया प्रभावित क्षेत्र का दौरा कर क्रशर और पेयजल योजनाओं का निरीक्षण किया गया है। जलशक्ति विभाग और स्वास्थ्य विभाग ने कुछ सैंपल लिए हैं, जिनकी रिपोर्ट के बाद ही कुछ कहा जा सकता है। क्रशर से होने वाले प्रदूषण की भी जांच की जा रही है।-प्रवीण धीमान, एसडीओ, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, ऊना-हमीरपुर।
-क्षेत्र में अवैध खनन को लेकर खनन विभाग ने समय-समय पर कार्रवाई की है। 2022 में विभाग ने कुल 430 चालान किए हैं, जबकि 2021 में अवैध खनन पर 393 चालान किए गए थे। क्रशर पर शौचालयों का निर्माण करवाया गया है, ताकि वाहन चालकों और मजदूरों को सुविधा मिल सके। फील्ड स्टाफ को सभी क्रशरों का निरीक्षण करने के निर्देश दिए हैं।
-हरविंदर सिंह, जिला खनन अधिकारी हमीरपुर
डायरिया फैलने की पीछे क्रशर भी बना वजह : डॉ. वर्मा
डायरिया फैलने की वजह यहां कुनाह खड्ड पर लगने वाला क्रशर भी माना जा रहा है। पब्लिक हेल्थ विशेषज्ञ डॉ. पुष्पेंद्र वर्मा ने प्रभावित क्षेत्र का मंगलवार को दौरा किया। उन्होंने कहा कि जिले में न्याटी-मंझोट पेयजल योजना के आसपास अवैध और अवैज्ञानिक तरीके से हुआ खनन भी डायरिया फैलने के लिए जिम्मेदार है। योजना के आसपास 8-9 फीट के बड़े-बड़े गड्ढे कर दिए गए हैं। उनमें महीनों से दूषित पानी खड़ा है, जो बारिश होने पर खड्ड के पानी में मिलकर उसे भी प्रदूषित कर देता है। डॉ. पुष्पेंद्र वर्मा ने कहा कि इस बारे में मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू को अवगत करवाया जाएगा।
सितंबर में हुआ था क्रशर के विरोध में आंदोलन
उपमंडल नादौन की ग्राम पंचायत हथोल और बदारन के बलोह व टंग गांवों में स्टोन क्रशर स्थापित करने के विरोध में 26 सितंबर 2022 को ग्रामीण सड़क पर उतरे थे। क्रशर के विरोध में क्षेत्रवासियों ने जिला मुख्यालय में प्रदर्शन किया था। पर्यावरण समिति के अध्यक्ष अजमेल सिंह वर्मा, बिट्टू और स्थानीय पंचायत प्रतिनिधियों की अगुवाई में जिला मुख्यालय पहुंचे ग्रामीणों के प्रतिनिधिमंडल ने प्रदेश सरकार और उद्योग विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की थी। गांधी चौक पर जनसभा को संबोधित किया और एसीटूडीसी के माध्यम से उपायुक्त को ज्ञापन सौंपा।