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धर्मशाला: बलदेव अरोड़ा बोले- नींव जितनी गहरी, भूकंप से भवन गिरने की आशंका उतनी कम

Tue, 07 Nov 2023 06:32 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, धर्मशाला
संवाद न्यूज एजेंसी, धर्मशाला Published by: Krishan Singh Updated Tue, 07 Nov 2023 06:32 PM IST
सार

वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी देहरादून के पूर्व निदेशक बलदेव राज अरोड़ा ने कहा कि उनका फोकस यही रहा है कि हम पृथ्वी की अंदर की संरचना को समझ सकें। इसके अलावा भूकंप आने पर होने वाली प्रक्रियाओं को हम समझ कर इसकी भविष्यवाणी करने में भी सक्षम हो सकते हैं।

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Dharamshala: Baldev Arora said The deeper the foundation, the less the possibility of the building collapsing
भूकंप - फोटो : पीटीआई

विस्तार

जापान जैसे देश में अकसर भूकंप आते हैं, वहां ऊंचे भवनों के लिहाज से नींव गहरी की जाती है। यदि भवन ऊंचे होंगे और नींव कम होगी तो भूकंप से उनके गिरने का खतरा ज्यादा रहेगा। यह बात वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी देहरादून के पूर्व निदेशक बलदेव राज अरोड़ा ने केंद्रीय विश्वविद्यालय धर्मशाला में हिमालय और आपदा प्रबंधन में भू गतिकी पर चल रही राष्ट्रीय कार्यशाला के दौरान कही। उन्होंने कहा कि उनका फोकस यही रहा है कि हम पृथ्वी की अंदर की संरचना को समझ सकें। इसके अलावा भूकंप आने पर होने वाली प्रक्रियाओं को हम समझ कर इसकी भविष्यवाणी करने में भी सक्षम हो सकते हैं। इस दिशा में काम किए जा रहे हैं।

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इस समय हमारा फोकस है कि रेजिडेंशियल सोसायटी बनाई जाएं, जिससे भूकंप आए तो भवन न गिरें, इस दिशा में काम हो रहा है। उन्होंने कहा कि आजकल इस पर भी शोध किया जा रहा है कि जिस क्षेत्र में कितना बड़ा भूकंप आ सकता है, जिससे कि सावधानी अपनाई जा सके। पद्मश्री डाॅ. एचके गुप्ता ने कहा कि हमने जो भी प्रयोग करेंगे या आकलन किए हैं, उससे यह बताना संभव नहीं है कि कहां पर भूकंप आएगा और कब आएगा। लेकिन यह बताया जा सकता कि कि भूकंप आने से क्या हानि हो सकती है, उस हानि से कैसे बचा जा सकता है।
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वहीं वाडिया इंस्टीट्यूट आफ हिमालयन जियोलॉजी देहरादून के पूर्व निदेशक डाॅ.नरेंद्र सिंह ने कहा कि हिमालय क्षेत्र में बहुत सड़कें बन रही हैं। पुराने रोड को चौड़ा किया जा रहा है, नए हाईवे बन रहे हैं। इससे भूस्खलन हो रहा है। कार्यशाला के दूसरे दिन तकनीकी सत्र का आयोजन किया गया। इसमें विश्व के उत्कृष्ट वैज्ञानिकों ने भू-गतिकी के विभिन्न विषयों पर व्याखान दिया। स्कूल ऑफ अर्थ एंड एनवायरनमेंट साइंस एवं जियोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया की ओर से संयुक्त रूप से आयोजित किए गए इस सत्र के दूसरे दिन परिचर्चा हिमालय क्षेत्र की भू-गतिकी विषय पर की गई। तकनीकी सत्र की अध्यक्षता डॉ. एचके गुप्ता एवं सह अध्यक्षता डॉ. हरीश बहुगुणा ने की।
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