{"_id":"6ab81b17b0d975995105fda9","slug":"despite-a-business-worth-crores-he-claimed-to-be-a-clerk-wife-s-maintenance-allowance-upheld-2026-09-27","type":"story","status":"publish","title_hn":"शिमला: करोड़ों के कारोबार के बाद भी खुद को बताया क्लर्क, कोर्ट को किया गुमराह; पत्नी का गुजारा भत्ता बरकरार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शिमला: करोड़ों के कारोबार के बाद भी खुद को बताया क्लर्क, कोर्ट को किया गुमराह; पत्नी का गुजारा भत्ता बरकरार
Sun, 27 Sep 2026 06:08 AM IST
दुष्यंत शर्मा
भारती मेहता, शिमला।
भारती मेहता, शिमला।
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sun, 27 Sep 2026 06:08 AM IST
सार
अदालत ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता एक बेहद समृद्ध और व्यावसायिक परिवार से ताल्लुक रखता है। अपनी असली आय को छिपाने के लिए खुद को पिता की दुकान में मामूली क्लर्क बताना केवल अदालत को गुमराह करने का प्रयास है।
विज्ञापन
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने पत्नी को दिए जाने वाले 10,000 प्रति माह के गुजारा भत्ते को चुनौती देने वाली पति की याचिका को पूरी तरह खारिज कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता एक बेहद समृद्ध और व्यावसायिक परिवार से ताल्लुक रखता है।
विज्ञापन
अपनी असली आय को छिपाने के लिए खुद को पिता की दुकान में मामूली क्लर्क बताना केवल अदालत को गुमराह करने का प्रयास है। कोर्ट ने कहा कि पत्नी की ओर से स्कूल में अध्यापिका के रूप में 8,000 की मामूली कमाई कर लेना पति को उसके कानूनी और नैतिक दायित्वों से मुक्त नहीं करता। न्यायाधीश अजय मोहन गोयल और न्यायाधीश योगेश जसवाल की खंडपीठ ने मंडी फैमिली कोर्ट के आदेश को सही ठहराया, इसमें पत्नी को धारा 125 सीआरपीसी के तहत 10,000 प्रति माह गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया था।
विज्ञापन
पति का कहना था कि वह अपने पिता के पास केवल एक क्लर्क के रूप में काम करता है और उसका मासिक वेतनमान केवल 10,000 है। तर्क दिया कि पत्नी अध्यापिका के रूप में 8,000 प्रति माह कमा रही है, बेटा पति के पास रह रहा है और पत्नी को घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत पहले ही 2,500 प्रति माह मिल रहे हैं। ऐसे में 10,000 का अतिरिक्त गुजारा भत्ता बहुत ज्यादा है।
विज्ञापन
कोर्ट ने पाया कि पति का यह दावा पूरी तरह से झूठा और अदालत को गुमराह करने वाला है कि वह अपने पिता के पास केवल एक क्लर्क के रूप में काम करता है और उसका मासिक वेतनमान केवल 10,000 रुपये है। पति अपने माता-पिता का इकलौता बेटा है। उसके पिता की उम्र 75 वर्ष है और उनका तीन मंजिला व्यावसायिक कांप्लेक्स है।
जिरह के दौरान पति ने खुद स्वीकार किया कि उनके बिजनेस का सालाना टर्नओवर कई करोड़ रुपये का है। कानूनन पत्नी को यह अधिकार है कि वह अपने ससुराल और पति की जीवनशैली के अनुरूप सम्मानजनक जीवन जी सके।