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हाथों और पैरों के निशान बताएंगे किस क्षेत्र में है बच्चों का भविष्य

अमर उजाला नेटवर्क, नाहन (सिरमौर) Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Fri, 09 Apr 2021 10:48 AM IST

सार

  • अब डीएमआई टेस्ट लगाएगा आपके बच्चों की क्षमता और दक्षता का पता
  • सिरमौर का नौरंगाबाद बनेगा सुविधा देने वाला सूबे का पहला सरकारी स्कूल
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छात्र (फाइल फोटो)
छात्र (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला

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विस्तार

आज बच्चों का कॅरिअर हर अभिभावक की चिंता का सबसे बड़ा कारण है। किस दिशा में बच्चों का कॅरिअर बनाया जाए, यह अभिभावकों के लिए गंभीर विषय भी है। अब डीएमआईटी से बच्चों की क्षमता और दक्षता का आकलन करना न केवल आसान होगा, बल्कि यह टेस्ट बच्चों को कॅरिअर चुनने में भी मदद करेगा। इसकी शुरुआत जिला सिरमौर के नौरंगाबाद स्कूल से होगी। उम्मीद है कि मई के अंत तक नौरंगाबाद स्कूल प्रदेश का पहला ऐसा स्कूल होगा, जहां बच्चों को यह सुविधा मिलेगी। 
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बड़ी बात यह है कि यह उच्च सरकारी पाठशाला है। डीएमआईटी अर्थात डर्मेटोग्लाइफिक्स मल्टीपल इंटेलिजेंस टेस्ट है। डर्मे का अर्थ चमड़ी, गलाई का अर्थ त्वचा पर बने मोड़ हैं। इस सुविधा से बच्चों के एक फिंगर प्रिंट से उनकी क्षमता और दक्षता का पता चलेगा। भविष्य में बच्चों को किस क्षेत्र और दिशा में आगे बढ़ना है, कौन का कॅरिअर चुनना है, यह भी इस टेस्ट के पता चल पाएगा। 


उंगलियों, हाथों और पैरों पर त्वचा के निशान या पैटर्न का अध्ययन करने को डर्मेटोग्लाइफिक्स कहते हैं। प्रत्येक व्यक्ति के पास जन्म के समय से कम से कम आठ अनुवांशिक क्षमताएं होती हैं, जिन्हें मल्टीपल इंटेलिजेंस कहा जाता है। अधिकतर लोग अपनी क्षमताओं से अनभिज्ञ रहते हैं, लेकिन अब किसी भी छात्र का डीएमआई टेस्ट होने पर उसे अपनी आंतरिक क्षमता व दक्षता का ज्ञान होगा।

सही विकल्प चुनने से भविष्य में छात्र की सफलता की प्रतिशतता कई गुना बढ़ जाएगी। नौरंगाबाद स्कूल के मुख्याध्यापक डॉ. संजीव अत्री ने बताया कि इस डीएमआईटी केंद्र स्थापित करने के लिए देश की एक बड़ी संस्था से सहमति बनी है, जो सैटेलाइट पर आधारित है। विद्यालय के दो शिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। केंद्र का लाभ सामान्य शुल्क देकर अन्य विद्यालय के विद्यार्थी भी उठा सकेंगे।

इस मनोवैज्ञानिक प्रक्रिया में विद्यार्थी के एक फिंगर प्रिंट से 48 पृष्ठों की एक रिपोर्ट तैयार मिलेगी। इससे विद्यार्थी की पिछली पीढ़ी की दक्षता का भी पता चलेगा। रिपोर्ट से बच्चे यह भी जान पाएंगे कि किसी भी चीज को सीखने में कौन सी पद्धति उनके लिए सहायक होगी। मई के अंत में इसी शुरुआत होगी, जो प्रदेश का पहला केंद्र होगा। 

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