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हिमाचल: मुकेश अग्निहोत्री बोले- आरडीजी समाप्त कर केंद्र ने दिया दोहरा आघात; हर साल 10 हजार करोड़ का नुकसान

Mon, 02 Feb 2026 07:05 PM IST
अंकेश डोगरा अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: अंकेश डोगरा Updated Mon, 02 Feb 2026 07:05 PM IST
सार

उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने केंद्र सरकार पर जुबानी हमला बोला है। उन्होंने कहा कि 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों के चलते हिमाचल को हर वर्ष 10 हजार करोड़ का सीधा वित्तीय नुकसान उठाना पड़ेगा। पढ़ें पूरी खबर...

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Deputy CM Mukesh Agnihotri said that Himachal suffers a loss of Rs 10,000 crore every year
उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री मीडिया को संबोधित करते हुए। (फाइल फोटो)। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि केंद्रीय बजट और 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों के चलते हिमाचल को हर वर्ष 10 हजार करोड़ का सीधा वित्तीय नुकसान उठाना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि यह कोई अस्थायी घाटा नहीं, बल्कि प्रदेश की वित्तीय संरचना को कमजोर करने वाला दीर्घकालिक संकट है, जो हिमाचल के लिए किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है।
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उप मुख्यमंत्री ने कहा कि जीएसटी व्यवस्था पहले ही हिमाचल जैसे पर्वतीय और सीमित राजस्व संसाधनों वाले राज्यों के लिए नुकसानदेह सिद्ध हो चुकी है। जीएसटी क्षतिपूर्ति समाप्त होने से प्रदेश को पहले बड़ा आर्थिक झटका लगा और अब राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) को समाप्त कर केंद्र सरकार ने दूसरा गंभीर आघात दिया है। उन्होंने दो टूक कहा कि यह निर्णय स्वीकार्य नहीं है। प्रदेश का कुल बजट लगभग 58 हजार करोड़ रुपये का है, जिसमें राजस्व व्यय का बड़ा हिस्सा वेतन, पेंशन और अन्य अनिवार्य मदों पर खर्च हो जाता है। ऐसे में केंद्रीय सहायता में किसी भी प्रकार की कटौती का सीधा असर प्रदेश के विकास कार्यों और जन कल्याण योजनाओं पर पड़ना स्वाभाविक है।
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पिछले पांच वर्षों में हिमाचल को लगभग 38 हजार करोड़ रुपये आरडीजी के रूप में प्राप्त हुए थे। वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए यह स्वाभाविक अपेक्षा थी कि यह सहायता बढ़कर 50 हजार करोड़ रुपये तक पहुंचेगी, लेकिन इसके विपरीत आरडीजी को ही समाप्त कर दिया गया। इससे प्रदेश के सामने गंभीर वित्तीय चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। अग्निहोत्री ने कहा कि हिमाचल के गठन के समय ही यह स्पष्ट था कि विशेष भौगोलिक परिस्थितियों के कारण यह राज्य आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर नहीं हो सकता। उसी समय राष्ट्रीय स्तर पर यह सहमति बनी थी कि केंद्र सरकार हिमाचल को विशेष वित्तीय सहायता प्रदान करेगी।
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उन्होंने कहा कि केंद्र पर निर्भरता कोई कमजोरी नहीं, बल्कि संवैधानिक दायित्व का हिस्सा है। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 1952 से लेकर अब तक केंद्र सरकार द्वारा हिमाचल प्रदेश को विशेष वित्तीय सहायता देने की परंपरा रही है। राजस्व घाटा अनुदान उसी परंपरा का संस्थागत स्वरूप था। इसे समाप्त करना प्रदेश के साथ नीतिगत अन्याय है। अग्निहोत्री ने कहा कि यह निर्णय संघीय ढांचे की भावना के भी विरुद्ध है। बड़े राज्यों के पास पर्याप्त संसाधन और राजस्व के साधन उपलब्ध हैं, जबकि आरडीजी समाप्त होने से पर्वतीय राज्यों, उत्तर-पूर्वी राज्यों और विशेष परिस्थितियों वाले प्रदेशों को सबसे अधिक नुकसान उठाना पड़ेगा। मुकेश ने भाजपा के सातों सांसदों तथा नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर से सवाल किया कि स्पष्ट करें कि वे केंद्र के फैसलों के साथ हैं या हिमाचल प्रदेश के साथ।
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