White Paper: 25 साल बाद विधानसभा में लाया गया श्वेत पत्र, ज्यादा कर्ज लेने वाले शीर्ष पांच राज्यों में हिमाचल
हिमाचल प्रदेश विधानसभा में वीरवार को राज्य की वित्तीय स्थिति पर मंत्रिमंडलीय उपसमिति की ओर से तैयार श्वेत पत्र रखा गया। समिति के अध्यक्ष उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने इसे सदन के पटल पर रखा।
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उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने पूर्व भाजपा सरकार पर वित्तीय कुप्रबंधन के आरोप लगाते हुए कहा कि आरबीआई की रिपोर्ट के अनुसार ज्यादा कर्ज लेने वाले शीर्ष राज्यों में हिमाचल पांचवें स्थान पर पहुंच गया है। पूर्व भाजपा सरकार के वित्तीय कुप्रबंधन से यह स्थिति पैदा हुई है। हिमाचल प्रदेश विधानसभा में वीरवार को राज्य की वित्तीय स्थिति पर मंत्रिमंडलीय उपसमिति की ओर से तैयार श्वेत पत्र रखा गया। समिति के अध्यक्ष उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने इसे सदन के पटल पर रखा। मुकेश ने दावा किया कि इससे पहले 25 साल पूर्व विधानसभा में श्वेतपत्र लाया गया था।
भोजनावकाश से पहले और बाद में श्वेतपत्र को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई। विपक्ष नारेबाजी करते हुए वेल में आ गया और जोरदार नारेबाजी की। मुकेश ने कहा कि पूर्व सरकार पूरी तरह कर्ज पर निर्भर रही। आय बढ़ाने का कोई प्रयास नहीं किया। मौजूदा सरकार को 92,774 करोड़ की देनदारियां विरासत में मिली हैं। अकेले साल 2022-23 में कर्ज की देनदारियां 76,630 करोड़ पहुंच गईं। भाजपा सरकार ने चुनावी साल में 16,261 करोड़ उधार जुटाया। चुनाव जीतने के लिए महंगाई भत्ते सहित अन्य एलान किए पर पूरे नहीं किए। पांच साल में कर्ज में 12 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।
23 सार्वजनिक उपक्रम 5000 करोड़ के घाटे में पहुंच गए
प्रदेश के 23 सार्वजनिक उपक्रम 5000 करोड़ के घाटे में पहुंच गए हैं। चुनावी साल में भाजपा ने सरकारी खर्चे पर पार्टी चलाई और चुनाव भी सरकारी खर्चे पर लड़े। अमृत महोत्सव आयोजन पर सात करोड़ खर्च किए और जनमंच पर पैसा पानी की तरह बहाया। रैलियों के लिए एचआरटीसी की बसें इस्तेमाल की गईं, जिसकी 8.5 करोड़ की देनदारी अभी भी खड़ी है। इस पर विपक्ष उखड़ गया। दोपहर 12:41 बजे सभापति ने सदन 2 बजे तक स्थगित कर दिया।
इनवेस्टर मीट में 36 करोड़ के लगाए तंबू, जनमंच में 6 करोड़ की चपातियां खाईं
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि इनवेस्टर मीट में 36 करोड़ के तो तंबू ही लगा दिए गए। उन्होंने वित्तायोग की रिफारिश का 1400 करोड़ का हिसाब मांगा। कांगड़ा हवाई अड्डे का 400 करोड़, ज्वालाजी मंदिर के लिए 20 करोड़ और मंडी एयरपोर्ट के 1000 करोड़ रुपये नहीं मिले। पूर्व सरकार में जनमंच में 6 करोड़ के फुल्के (चपाती) खाए गए। इस पर नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर भड़क गए। कहा कि इस तरह की शब्दावली ठीक नहीं है। पहले औपचारिकताएं पूरी करनी पड़ती है। उसके बाद पैसा जारी होता है। सत्ता पक्ष की ओर से फिजूलखर्ची का आरोप लगाए जाने पर विपक्ष ने हंगामा किया। शोर-शराबे के बीच उपमुख्यमंत्री ने सभा पटल पर रिपोर्ट रखी।
घाटे में चल रहे प्रदेश के प्रमुख सार्वजनिक उपक्रम
राज्य विद्युत बोर्ड लिमिटेड -2034.85 -1809.61
सड़क परिवहन निगम -1113.91 -1707.12
पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड -107.33 -688.32
पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन लिमिटेड -13.91 -395.91
हिमाचल प्रदेश वित्तीय निगम -161.06 -180.97
पर्यटन विकास निगम लिमिटेड -23.01 -122.39
राज्य वन विकास निगम -97.45 -106.24
हर पैदा होने वाले बच्चे पर 1,02,818 रुपये कर्ज
हिमाचल में प्रति व्यक्ति ऋण 2017-18 में 66232 रुपये था, 2018-19 में 69743, 2019-20 में 76575, 2020-21 में 82700, साल 2021-22 में 85931 और मौजूदा 2022-23 में 1,02,818 रुपये पहुंच गया है।
(आंकड़े करोड़ों में)
पिछले पांच सालों में 16261 करोड़ पहुंचा उधार
पूर्व सरकार ने साल 2018-19 में 6044, 2019-20 में 8591, 2020-21 में 8273, साल 2021-22 में 6080 और मौजूदा 2022-23 में 16261 करोड़ पहुंच गया है। साल 2021-22 की तुलना में 2022-23 में 267.45 फीसदी अधिक कर्ज उठाया गया।
न वेतनमान में संशोधन का लाभ दिया न महंगाई भत्ते की किस्त
11 दिसंबर 2022 को कांग्रेस सरकार ने सत्ता संभाली, उस समय पिछली सरकार की ओर से छोड़ी सरकारी कर्मचारियों और पेंशन भोगियों की 10600 करोड़ से अधिक की देनदारियां लंबित थीं। पिछली सरकार ने 1 जनवरी 2016 को वेतनमान में संशोधन तो किया लेकिन बकाया राशि का भुगतान नहीं किया। इसके अलावा महंगाई भत्ते की दो किस्तें जनवरी 2000 से 3 फीसदी और जुलाई 2022 से 4 फीसदी का भी पिछली सरकार ने भुगतान नहीं किया।
1707.12 करोड़ के घाटे में एचआरटीसी
हिमाचल पथ परिवहन निगम एचआरटीसी का संचयी घाटा 31 मार्च 2017 को 1113.91 करोड़ से बढ़कर 31 मार्च 2022 तक 1707.12 करोड़ पहुंच गया। इस भारी भरकम घाटे के बावजूद कांग्रेस सरकार राज्य के आंतरिक हिस्सों तक बस सेवाएं प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। एचआरटीसी पिछली सरकार की विरासत के रूप में प्रतिमाह 60 करोड़ के घाटे में चल रही है जिसे राज्य सरकार की ओर से पूरा किया जा रहा है।