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सचिवों की नहीं सुन रहे निदेशालयों के अफसर, नहीं दिए रिमाइंडर के भी जवाब

Fri, 22 Nov 2019 12:59 PM IST
अरविन्द ठाकुर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Fri, 22 Nov 2019 12:59 PM IST
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department of language art and culture himachal pradesh officers did not reply to Secretary
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

सरकारी विभागों के अधिकारी किस तरह सचिव समेत पूरी सरकार को धत्ता बताकर व्यवस्था को लाचार बना देते हैं, इसका एक उदाहरण भाषा एवं संस्कृति विभाग में हुए एक भ्रष्टाचार के आरोपों के एक मामले में हाल ही में सामने आया है। रिसर्च एंड वेलफेयर ऑर्गेनाइजेशन (आरडब्ल्यूओ) नामक एक संस्था ने भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए एक मामला जब 12 अप्रैल 2018 को सचिव, भाषा एवं संस्कृति के ध्यान में लाया तो सचिव ने भाषा एवं संस्कृति विभाग के निदेशालय से जवाब मांगा।

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संस्था के प्रमुख संजय ठाकुर ने कहा कि इस पर निदेशालय की ओर से सचिव के पत्र को गंभीरता से नहीं लिया गया। सचिव को गोल-मोल और गलत जवाब भेजा गया। जवाब से संतुष्ट न होकर और मामले की गंभीरता को देखते हुए सचिव ने निदेशक को सात दिन के अंदर पूरी और सही जानकारी भेजने के निर्देश दिए हैं। सचिव ने कई रिमाइंडर भेजे, मगर निदेशालय ने 15 मई 2019 को भी पहले की तरह गोलमोल जवाब भेजा।
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संस्था की ओर से यह मामला मुख्य सचिव के ध्यान में भी लाया गया। मुख्य सचिव कार्यालय ने भी निदेशालय से जवाब मांगा है। पहले भेजे पत्र में जवाब नहीं आने पर मुख्य सचिव कार्यालय ने 19 सितंबर 2019 को एक रिमाइंडर भेजा है। राज्य भाषा विभाग के निदेशालय के अधिकारी कुछ भी कहने बच रहे हैं। हालांकि पिछले दिनों तक सचिव भाषा एवं संस्कृति पूर्णिमा चौहान ने इस मामले से अनभिज्ञता जताई। अतिरिक्त मुख्य सचिव रामसुभग सिंह से भी इस संबंध में कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी। 
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क्या था यह मामला
आरोप है कि हिमाचल भाषा एवं संस्कृति विभाग में सभी नियमों को ताक पर रखकर कर्मचारियों को अनुसंधान सहायक और सहायक मंदिर अधिकारी के पद पर पदोन्नति दे दी गई थी, जबकि विभाग के पास न तो कोई रिक्त पद ही था और न ही पदोन्नति का कोटा, लेकिन फिर भी डीपीसी गठित कर भर्ती एवं पदोन्नति नियमों का उल्लंघन किया गया।

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