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Shimla News: कल्याण संघ ने की अधिसूचना पर पुनर्विचार करने की मांग
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कहा, मंत्रिमंडल स्तर के वरिष्ठ सदस्य की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय समिति की जाए गठित
पेंशन, परिवार, पुनर्वास एवं कल्याण संबंधी मामलों के लिए एकल खिड़की व्यवस्था हो विकसित
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल प्रदेश पूर्व अर्धसैनिक बल कल्याण संघ ने राज्य सरकार ने हाल ही में जारी अर्धसैनिक कल्याण बोर्ड संबंधी अधिसूचना पर निराशा व्यक्त की है। संघ ने सरकार से इसमें सुधार और व्यापक पुनर्विचार का आग्रह किया। उनका मानना है कि वर्तमान अधिसूचना अर्धसैनिक समुदाय की वास्तविक समस्याओं का समाधान नहीं करती। यह पूर्व व्यवस्था का ही परिवर्तित स्वरूप प्रतीत होती है।
संघ ने वर्तमान अधिसूचना की व्यापक समीक्षा की मांग की है। उन्होंने सैनिक कल्याण बोर्ड की तर्ज पर स्थायी, स्वतंत्र एवं अधिकार-संपन्न अर्धसैनिक कल्याण बोर्ड स्थापित करने को कहा। राज्य के साथ-साथ जिला स्तर पर भी प्रभावी व्यवस्था बनाई जाए। सेवारत एवं सेवानिवृत्त अर्धसैनिक कर्मियों तथा शहीद परिवारों को उचित प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। पेंशन, परिवार, पुनर्वास एवं कल्याण संबंधी मामलों के लिए एकल खिड़की व्यवस्था विकसित की जाए। बोर्ड को पर्याप्त वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकार दिए जाएं। संघ के राज्य एवं अखिल भारतीय अध्यक्ष सेवानिवृत्त डीआईजीपी वीके शर्मा के नेतृत्व में प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू को अब तक पांच बार ज्ञापन सौंपे हैं। इनका उद्देश्य अर्धसैनिक कर्मियों और उनके परिवारों के लिए एक प्रभावी व्यवस्था उपलब्ध कराना है।
केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीआरपीएफ, बीएसएफ, आईटीबीपी, एसएसबी, सीआईएसएफ और असम राइफल्स) देश की आंतरिक एवं सीमा सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अनेक जवानों ने राष्ट्र की सेवा में सर्वोच्च बलिदान दिया है। ऐसे में उनके लिए सैनिक कल्याण व्यवस्था के अनुरूप समर्पित कल्याण तंत्र आवश्यक है।
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वर्तमान में अनेक कर्मियों को अपने कल्याणकारी कार्यों के लिए विभिन्न सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। संघ ने सरकार से मंत्रिमंडल स्तर के वरिष्ठ सदस्य की अध्यक्षता में एक प्रारंभिक उच्चस्तरीय समिति गठित करने का अनुरोध किया है। इस समिति में अर्धसैनिक समुदाय के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाए। समिति स्थायी बोर्ड की संरचना एवं कार्यप्रणाली पर विचार करेगी। इसे 15 दिनों के भीतर मुख्यमंत्री को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।
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पेंशन, परिवार, पुनर्वास एवं कल्याण संबंधी मामलों के लिए एकल खिड़की व्यवस्था हो विकसित
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल प्रदेश पूर्व अर्धसैनिक बल कल्याण संघ ने राज्य सरकार ने हाल ही में जारी अर्धसैनिक कल्याण बोर्ड संबंधी अधिसूचना पर निराशा व्यक्त की है। संघ ने सरकार से इसमें सुधार और व्यापक पुनर्विचार का आग्रह किया। उनका मानना है कि वर्तमान अधिसूचना अर्धसैनिक समुदाय की वास्तविक समस्याओं का समाधान नहीं करती। यह पूर्व व्यवस्था का ही परिवर्तित स्वरूप प्रतीत होती है।
संघ ने वर्तमान अधिसूचना की व्यापक समीक्षा की मांग की है। उन्होंने सैनिक कल्याण बोर्ड की तर्ज पर स्थायी, स्वतंत्र एवं अधिकार-संपन्न अर्धसैनिक कल्याण बोर्ड स्थापित करने को कहा। राज्य के साथ-साथ जिला स्तर पर भी प्रभावी व्यवस्था बनाई जाए। सेवारत एवं सेवानिवृत्त अर्धसैनिक कर्मियों तथा शहीद परिवारों को उचित प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। पेंशन, परिवार, पुनर्वास एवं कल्याण संबंधी मामलों के लिए एकल खिड़की व्यवस्था विकसित की जाए। बोर्ड को पर्याप्त वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकार दिए जाएं। संघ के राज्य एवं अखिल भारतीय अध्यक्ष सेवानिवृत्त डीआईजीपी वीके शर्मा के नेतृत्व में प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू को अब तक पांच बार ज्ञापन सौंपे हैं। इनका उद्देश्य अर्धसैनिक कर्मियों और उनके परिवारों के लिए एक प्रभावी व्यवस्था उपलब्ध कराना है।
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केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीआरपीएफ, बीएसएफ, आईटीबीपी, एसएसबी, सीआईएसएफ और असम राइफल्स) देश की आंतरिक एवं सीमा सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अनेक जवानों ने राष्ट्र की सेवा में सर्वोच्च बलिदान दिया है। ऐसे में उनके लिए सैनिक कल्याण व्यवस्था के अनुरूप समर्पित कल्याण तंत्र आवश्यक है।
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वर्तमान में अनेक कर्मियों को अपने कल्याणकारी कार्यों के लिए विभिन्न सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। संघ ने सरकार से मंत्रिमंडल स्तर के वरिष्ठ सदस्य की अध्यक्षता में एक प्रारंभिक उच्चस्तरीय समिति गठित करने का अनुरोध किया है। इस समिति में अर्धसैनिक समुदाय के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाए। समिति स्थायी बोर्ड की संरचना एवं कार्यप्रणाली पर विचार करेगी। इसे 15 दिनों के भीतर मुख्यमंत्री को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।