सीएम वीरभद्र मामले में ईडी को नोटिस, हाईकोर्ट ने मांगा जवाब
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मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह और उनकी पत्नी प्रतिभा सिंह की याचिका के आधार पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
दोनों ने अपनी संभावित गिरफ्तारी पर अदालत से राहत प्रदान करने का आग्रह किया है। उन्होंने मामले में सह अभियुक्त एलआईसी एजेंट की गिरफ्तारी का हवाला दिया है। न्यायमूर्ति विपिन सांघी ने ईडी को नोटिस जारी कर याची की ओर से उठाए गए मुद्दों पर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश देते हुए सुनवाई 29 जुलाई तय की है।
याचिका में मुख्यमंत्री और उनकी पत्नी ने तर्क रखा है कि जिस प्रकार ईडी ने उनके खिलाफ दर्ज मामले में सह अभियुक्त चौहान को गिरफ्तार किया है, उससे उन्हें आशंका है कि उनके खिलाफ भी ईडी कोई ठोस कार्रवाई कर सकती है।
ऐसे में ईडी को उनके खिलाफ किसी भी प्रकार की कार्रवाई करने पर रोका जाए। ईडी ने हाल ही में चौहान को गिरफ्तार किया था। इस मामले में दर्ज प्राथमिकी के बाद यह पहली गिरफ्तारी है। ईडी व सीबीआई ने इस संबंध में अलग-अलग मामले दर्ज किए हैं।
आनंद चौहान की जमानत याचिका पर बहस 21 को
हिमाचल के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के बीमा एजेंट आनंद सिंह चौहान की जमानत याचिका पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पटियाला हाउस स्थित विशेष सीबीआई जज विनोद कुमार के समक्ष मंगलवार को जवाब दाखिल किया।
ईडी ने मामले की जांच शुरुआती दौर में होने और गंभीर आरोपों का हवाला देते हुए जमानत न देने का आग्रह किया है। जमानत याचिका पर 21 जुलाई को सुनवाई होगी। ईडी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि चौहान ने वीरभद्र सिंह की अघोषित आय को जीवन बीमा में लगवाया और उसके खातों में हेरफेर किया।
इस आरोप में फंसे एलआईसी एजेंट
ईडी ने चौहान को आठ जुलाई को चंडीगढ़ में गिरफ्तार किया था। ईडी ने चौहान को 13 जुलाई को पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया था जिसके बाद कोर्ट ने उसे चौदह दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया था।
एलआईसी एजेंट चौहान पर आरोप है कि उसने वीरभद्र सिंह के कालेधन के करीब पांच करोड़ रुपये एलआईसी की बीमा पॉलिसी में निवेश करवाए। उसने वीरभद्र, उनकी पत्नी प्रतिभा सिंह व अन्य परिजनों के नाम पर बीमा पॉलिसी में निवेश करवाया।
जांच एजेंसी का आरोप है कि वीरभद्र सिंह ने 2009 से 2011 के बीच केंद्रीय इस्पात मंत्री रहते हुए करीब छह करोड़ की अघोषित संपत्ति अर्जित की थी।