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सीएम वीरभद्र के खिलाफ खंडपीठ का सुनवाई से इनकार

Wed, 29 Jul 2015 10:01 AM IST
Updated Wed, 29 Jul 2015 10:01 AM IST
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delhi high court bench denied to hear virbhadra money laundering case

दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जी रोहिणी की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में हिमाचल के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया। खंडपीठ ने याचिका सुनवाई के लिए दूसरी खंडपीठ के समक्ष स्थानांतरित कर दी है।

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मुख्य न्यायाधीश जी रोहिणी एवं न्यायमूर्ति आरएस एंडलॉ की खंडपीठ ने हाल ही में याचिकाकर्ता कॉमन काज को इस मामले से अलग करते हुए अदालत की सहायता के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता एन हरिहरन व सिद्धार्थ अग्रवाल को न्याय मित्र नियुक्त कर दिया था।
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अदालत ने उन्हें यह तय करने का निर्देश दिया है कि यह याचिका जनहित में है या नहीं। खंडपीठ में अब न्यायमूर्ति आरएस एंडलॉ की जगह न्यायमूर्ति जयंतनाथ शामिल हुए हैं। उन्होंने मामले की सुनवाई में असमर्थता जता दी। खंडपीठ ने याचिका की सुनवाई दूसरी खंडपीठ के समक्ष 6 अगस्त को तय कर दी।

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दिल्ली हाईकोर्ट के सीजे की अध्यक्षता वाली खंडपीठ में थी याचिका

delhi high court bench denied to hear virbhadra money laundering case

पेश मामले में कॉमन कॉज ने अधिवक्ता प्रशांत भूषण के माध्यम से नवंबर 2013 में एक याचिका दायर की थी। इसमें सीबीआई को वीरभद्र सिंह के खिलाफ भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी के आरोपों की जांच करने के निर्देश देने की मांग की गई थी। आरोप लगाया गया था कि जब वह केंद्र में इस्पात मंत्री थे तो उस समय भ्रष्टाचार में लिप्त रहे थे।

जनवरी 2014 में वकील प्रशांत भूषण ने एक और अर्जी दायर कर आरोप लगाया था कि वीरभद्र ने बतौर मुख्यमंत्री भी रिश्वत ली। वहीं, मुख्यमंत्री वीरभद्र की और से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने प्रशांत भूषण पर बदनीयती व राजनीतिक कारणों से यह जनहित याचिका दायर करने का आरोप लगाया था।

उन्होंने तर्क रखा था कि भूषण आप पार्टी से जुड़े थे और उनका राजनीतिक मकसद है। इसके अलावा उन्होंने कांगड़ा जिले में भूषण की कुमुद भूषण एजुकेशन सोसायटी के दस्तावेज भी पेश किए। वीरभद्र ने सोसायटी के भूमि आवंटन संबंधी प्रस्ताव को 12 नवंबर 2006 में मंजूरी नहीं दी थी। स्पष्ट है कि याचिका बदनीयती पूर्ण तरीके से दायर की गई है अत: इसे खारिज किया जाए।

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