दिल्ली की गाजीपुर मंडी में लाहौल के फूलों की धमक, खेत में ही हो रही बुकिंग
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हिमाचल के दुर्गम क्षेत्र लाहौल घाटी के किसानों की फूल खेती अब गाजीपुर दिल्ली की फूल मंडी में धाक जमा रही है। लाहौल में उगाए जा रहे लिलियम प्रजाति के दो किस्मों के फूल ओरिएंटल और एशियाटिक अपनी पहचान बना चुके हैं। दिल्ली से इन फूलों के गुच्छे चेन्नई, मुंबई, कोलकाता, जयपुर और आगरा जैसे बड़े शहरों में फ्लाइट से पहुंच रहे हैं।
इन फूलों की मांग इतनी ज्यादा है कि इसके व्यापारी लाहौल के खेत से ही इसकी बुकिंग कर रहे हैं। 70 सदस्यों वाली दी पट्टन वैली फ्लोरीकल्चर सोसायटी के सदस्य किसान बेहतर गुणवत्ता से अच्छा मुनाफा भी कमा रहे हैं। सोसायटी पदाधिकारियों के मुताबिक किसानों को इस बार एशियाटिक ए ग्रेड फूल के प्रति छड़ी 11 और बी ग्रेड के आठ रुपये दाम मिलेंगे।
ओरिएंटल फूल की प्रति छड़ी के दाम ए ग्रेड के 20 और बी ग्रेड के 10 रुपये प्रति छड़ी रहेंगे। लाहौल के पट्टन घाटी में फूलों का सीजन भी शुरू हो गया है। अमीरों के शौक, नेताओं व फिल्मी हस्तियों की मांग को पूरा करने के लिए यहां के सोसायटी के माध्यम से खरीदने वाली आढ़ती ने एडवांस में ही डेढ़ लाख की राशि सोसायटी के खाते में डाल दी है। फूल मंडी दिल्ली में लाहौल में उत्पादित लिलियम प्रजाति के ओरिएंटल और एशियाटिक की काफी डिमांड हैं।
रोहतांग टनल खुल जाने के बाद लाहौल घाटी की वादियां फूलों से महकने के साथ ही किसानों की आय में भी बड़ा इजाफा कर सकती हैं। दी पट्टन वैली फ्लोरीकल्चर सोसायटी के अध्यक्ष पीएल ठाकुर ने कहा कि दूसरी फसलों के मुकाबले किसान इसमें अच्छी आय अर्जित कर रहे हैं। सबसे खास बात है कि फूल निर्यात और इसकी पैकिंग का खर्चा भी आढ़ती ही वहन करता है।