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Shimla News: सतलुज पेयजल के काम में देरी से योजना पर संकट, विश्व बैंक रोक सकता है पैसा
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पेयजल कंपनी की बढ़ी चिंता, बजट पर रोक न लगे इसके लिए विश्व बैंक-केंद्र सरकार से मांगी 22 महीने की एक्सटेंशन
विश्व बैंक की शर्त, दिसंबर 2026 तक पूरी करें कार्य
अशोक चौहान
शिमला। राजधानी में 24 घंटे पेयजल सुविधा देने की सतलुज पेयजल योजना पर संकट मंडरा गया है। काम में देरी के चलते विश्व बैंक इस योजना के लिए अब और बजट देने पर रोक लगा सकता है। इससे कंपनी की चिंता बढ़ गई है।
योजना का काम पूरा करने के लिए बैंक पैसा दे, इसके लिए पेयजल कंपनी एक्सटेंशन मांगने जा रही है। इसका प्रस्ताव भी तैयार कर लिया है। इसमें विश्व बैंक से काम पूरा करने के लिए 22 महीने की एक्सटेंशन मांगी जा रही है। सरकार के माध्यम से केंद्र सरकार को भी यह प्रस्ताव भेजा जा रहा है। साथ ही विश्व बैंक को भी इसे सौंपा जाना है। अब बैंक या केंद्र सरकार तय शर्तों के अनुसार समय पर काम पूरा न होने पर पैसा देने को मंजूरी देते हैं या नहीं, इस पर योजना का भविष्य टिका है। शहरवासियों को 24 घंटे पानी देने की योजना का काम दो चरणों में हो रहा है। पहले चरण में सतलुज का पानी शिमला लाने का काम किया गया है। यह लगभग पूरा हो चुका है। दूसरे चरण में 972 करोड़ रुपये से शिमला शहर में लोगों को इस पानी का वितरण करना है। इसके लिए शहर के हर वार्ड में नई पेयजल लाइनें बिछनी हैं, नए टैंक बनने हैं और नए मीटर लगाए जाने हैं। विश्व बैंक की शर्ताें के अनुसार दिसंबर 2026 तक इस योजना का काम पूरा होना चाहिए लेकिन शहर में इस काम की रफ्तार ऐसी है कि इसमें अभी दो साल और लग सकते हैं। इसलिए कंपनी को एक्सटेंशन मांगनी पड़ी है।
विश्व बैंक से मिलने हैं 1168 करोड़ रुपये
पेयजल कंपनी को विश्व बैंक से इस योजना के लिए 1168 करोड़ रुपये मिलने हैं। अभी तक करीब 600 करोड़ रुपये मिल चुके हैं। बाकी करीब 550 करोड़ रुपये अभी मिलना बाकी है। शहर में नई लाइनें बिछाने और लोगों को प्रेशर के साथ पानी देने के काम का जिम्मा पेयजल कंपनी ने सुएज इंडिया कंपनी को दे रखा है। पहले दावा था कि मार्च तक शहर के सभी 34 वार्डाें में नई लाइनें बिछाने का काम शुरू कर दिया जाएगा। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि अभी अप्रैल तक सिर्फ सात वार्डाें में ही इसका काम शुरू किया जा सका है। दिसंबर तक कंपनी 34 में से 15 वार्डों का काम भी पूरा कर पाएगी या नहीं, इस पर खुद पेयजल कंपनी को भी संशय है। यही कारण है कि शहरी विधायक हरीश जनारथा से लेकर शहरी विकास मंत्री विक्रमादित्य सिंह तक कंपनी को फटकार लगा चुके हैं।
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बैंक से मांगी जा रही एक्सटेंशन
कंपनी तय समय सीमा के भीतर इस योजना का काम पूरा करने का प्रयास कर रही है। इस बारे में सुएज इंडिया को निर्देश भी दिए हैं। विश्व बैंक से एक्सटेंशन मांगी जा रही है।
-राजेश कश्यप, महाप्रबंधक, पेयजल कंपनी
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पेयजल कंपनी की बढ़ी चिंता, बजट पर रोक न लगे इसके लिए विश्व बैंक-केंद्र सरकार से मांगी 22 महीने की एक्सटेंशन
विश्व बैंक की शर्त, दिसंबर 2026 तक पूरी करें कार्य
अशोक चौहान
शिमला। राजधानी में 24 घंटे पेयजल सुविधा देने की सतलुज पेयजल योजना पर संकट मंडरा गया है। काम में देरी के चलते विश्व बैंक इस योजना के लिए अब और बजट देने पर रोक लगा सकता है। इससे कंपनी की चिंता बढ़ गई है।
योजना का काम पूरा करने के लिए बैंक पैसा दे, इसके लिए पेयजल कंपनी एक्सटेंशन मांगने जा रही है। इसका प्रस्ताव भी तैयार कर लिया है। इसमें विश्व बैंक से काम पूरा करने के लिए 22 महीने की एक्सटेंशन मांगी जा रही है। सरकार के माध्यम से केंद्र सरकार को भी यह प्रस्ताव भेजा जा रहा है। साथ ही विश्व बैंक को भी इसे सौंपा जाना है। अब बैंक या केंद्र सरकार तय शर्तों के अनुसार समय पर काम पूरा न होने पर पैसा देने को मंजूरी देते हैं या नहीं, इस पर योजना का भविष्य टिका है। शहरवासियों को 24 घंटे पानी देने की योजना का काम दो चरणों में हो रहा है। पहले चरण में सतलुज का पानी शिमला लाने का काम किया गया है। यह लगभग पूरा हो चुका है। दूसरे चरण में 972 करोड़ रुपये से शिमला शहर में लोगों को इस पानी का वितरण करना है। इसके लिए शहर के हर वार्ड में नई पेयजल लाइनें बिछनी हैं, नए टैंक बनने हैं और नए मीटर लगाए जाने हैं। विश्व बैंक की शर्ताें के अनुसार दिसंबर 2026 तक इस योजना का काम पूरा होना चाहिए लेकिन शहर में इस काम की रफ्तार ऐसी है कि इसमें अभी दो साल और लग सकते हैं। इसलिए कंपनी को एक्सटेंशन मांगनी पड़ी है।
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विश्व बैंक से मिलने हैं 1168 करोड़ रुपये
पेयजल कंपनी को विश्व बैंक से इस योजना के लिए 1168 करोड़ रुपये मिलने हैं। अभी तक करीब 600 करोड़ रुपये मिल चुके हैं। बाकी करीब 550 करोड़ रुपये अभी मिलना बाकी है। शहर में नई लाइनें बिछाने और लोगों को प्रेशर के साथ पानी देने के काम का जिम्मा पेयजल कंपनी ने सुएज इंडिया कंपनी को दे रखा है। पहले दावा था कि मार्च तक शहर के सभी 34 वार्डाें में नई लाइनें बिछाने का काम शुरू कर दिया जाएगा। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि अभी अप्रैल तक सिर्फ सात वार्डाें में ही इसका काम शुरू किया जा सका है। दिसंबर तक कंपनी 34 में से 15 वार्डों का काम भी पूरा कर पाएगी या नहीं, इस पर खुद पेयजल कंपनी को भी संशय है। यही कारण है कि शहरी विधायक हरीश जनारथा से लेकर शहरी विकास मंत्री विक्रमादित्य सिंह तक कंपनी को फटकार लगा चुके हैं।
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बैंक से मांगी जा रही एक्सटेंशन
कंपनी तय समय सीमा के भीतर इस योजना का काम पूरा करने का प्रयास कर रही है। इस बारे में सुएज इंडिया को निर्देश भी दिए हैं। विश्व बैंक से एक्सटेंशन मांगी जा रही है।
-राजेश कश्यप, महाप्रबंधक, पेयजल कंपनी