युवाओं को नशे से दूर रहने का संदेश दे रहे देवी-देवता
सरकार युवा पीढ़ी को नशे से दूर रखने के लिए जागरूकता अभियानों पर लाखों खर्च कर रही है। वहीं, कुल्लू घाटी के देवी-देवता भी युवा पीढ़ी को नशे से दूर रहने का संदेश दे रहे हैं। दशहरा उत्सव में पहुंचे देवता फलाणी नारायण धूम्रपान और नशे के विरुद्ध हैं।
देव संस्कृति से बंधे लोग देवता के आदेशों का पालन करते हैं। लगघाटी के दड़का के देवता फलाणी नारायण के हारियान क्षेत्र में नशे पर पूर्ण रूप से मनाही है। देवता के आदेश पर कोई बीड़ी-सिगरेट और शराब का सेवन नहीं करता है।
कई पीढ़ियों से देव आदेश पर डुपकन और पवौण के लोग नशे से दूरी बनाए हुए हैं। देवता का मूल स्थान फलाण गांव में है। यहां यही देव आदेश लागू हैं। देवता को बीड़ी, सिगरेट और शराब से सख्त नफरत है।
गांव में इनके सेवन पर मनाही है। गांव में आने वाले अनजान लोगों को भी नशे की सामग्री न लाने को कहा जाता है। देव आदेश के चलते इलाके के घरों में नशे का कोई सामान नहीं रखा जाता है।
अनजान व्यक्ति को भी घर में प्रवेश से पहलेे आंगन से बाहर ही नशे का सामान छोड़ने को कहा जाता है। फलाणी नारायण लगघाटी के फलाण गांव में भी हैं, जबकि दूसरा लगघाटी के दड़का में हैं। फलाण में देवता का छोटा करडू है, जबकि दड़का में देवता का रथ है।
देवता के हारियान लाल चंद ठाकुर, गूर कालू राम ने कहा कि नशे के प्रति देवता सख्त हैं। देवता लाव-लश्कर के साथ दशहरा में शिरकत करते हैं। दशहरा कैंप के आसपास भी देव आदेश लागू रहता है।
देवता के पुजारी किरपाराम, प्रमेश, सुंदर सिंह ने कहा कि देवता के पास कोई नशे की चीज लेकर जाने पर सख्त मनाही है। अगर कोई देव आदेश का उल्लंघन करता है तो उसे देवता स्वयं दंडित करते हैं।
ऐसे प्रमाण आज भी देखने को मिलते हैं। देवता फलाणी नारायण के कारदार चंदे राम ने कहा कि देव आदेश का पालन सिर्फ दो गांवों में ही नहीं, बल्कि लगघाटी के कई गांवों में होता है।