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पिता की चिता को मुखाग्नि दे बेटी ने निभाया बेटे का फर्ज
Thu, 29 Jul 2021 08:13 PM IST
अरविन्द ठाकुर
अमर उजाला नेटवर्क, चंबा
अमर उजाला नेटवर्क, चंबा
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Thu, 29 Jul 2021 08:13 PM IST
सार
अपने माता-पिता की इकलौती औलाद होने का फर्ज निभाने के लिए संदली थापा ने पिता की चिता को मुखाग्नि देने का निर्णय लिया।
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संदली थापा ने पिता की चिता को मुखाग्नि दी।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
चंबा जिले के बकलोह क्षेत्र के चिलामा गांव में 19 वर्षीय बेटी ने अपने पिता की अर्थी को नंगे पांव कंधा देकर पहले श्मशानघाट पहुंचाया। इसके बाद हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार पिता की चिता को मुखाग्नि दी। संदली थापा के पिता सुनील थापा की बुधवार रात को बीमारी के चलते मौत हो गई। पिता का साया सिर से उठने के बाद संदली मायूस हो गई। अपने माता-पिता की इकलौती औलाद होने का फर्ज निभाने के लिए उसने पिता की चिता को मुखाग्नि देने का निर्णय लिया।
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गुरुवार सुबह जब गांव के लोगों व रिश्तेदारों ने उसके पिता की अर्थी को अंतिम संस्कार के लिए श्मशानघाट ले जाना शुरू किया तो संदली कंधा देने के लिए पहुंच गई। उसने अपने पिता की चिता को कंधा देकर बेटी होने का फर्ज निभाया। इसके बाद पिता की चिता को मुखाग्नि दी। बेटी की हिम्मत, पिता के प्रति प्यार को देख पूरे इलाके में उसकी प्रशंसा हो रही है।
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संदली ने कहा कि वह अपने पिता की आत्मा शांति के लिए 13 दिनों तक क्रिया में बैठेगी और अपना बेटी होने का फर्ज निभाएगी। 13 दिनों के बाद अपनी माता व परिवार के अन्य सदस्यों को साथ लेकर हरिद्वार में जाकर पिता की अस्थियां विसर्जित करेगी। संदली थापा ने बताया कि उसके पिता ने उसे एक बेटे की तरह पाला, हरेक खुशियां प्रदान की। पिता की आखिरी इच्छा थी कि उसकी मौत के बाद बेटी ही चिता को मुखाग्नि दे, जिसे उसने पूरा किया है।
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