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Shimla News: कृष्णानगर पर फिर मंडराया भूस्खलन का खतरा, तिरपाल लगाए
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विष्णु मंदिर के साथ लगते आवासों को खतरा, निकासी व्यवस्था खस्ताहाल, लगातार रिस रहा बारिश का पानी
प्रशासन ने भेजे तिरपाल, लोगों के घरों के आगे लगाए
पिछले साल 15 अगस्त को स्लॉटर हाउस समेत ढह गए थे आधा दर्जन मकान
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। आपदा प्रभावित राजधानी के कृष्णानगर क्षेत्र में भारी बारिश के कारण फिर से भूस्खलन का खतरा पैदा हो गया है। घरों-रास्तों में निकासी व्यवस्था ठीक न होने के कारण बारिश का पानी लगातार इस इलाके में जा रहा है। इससे स्थानीय लोग फिर से डर गए हैं।
विष्णु मंदिर के साथ लगती काॅलोनी में भूस्खलन के खतरे को देखते हुए जिला प्रशासन ने तिरपाल लगा दिए हैं। बीते साल 15 अगस्त को इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर भूस्खलन हुआ था। इसमें स्लॉटर हाउस समेत आधा दर्जन मकान ढह गए थे। मौके पर आठ से ज्यादा मकानों को खतरा पैदा हो गया था जिन्हें खाली करवाया गया है। अब इन मकानों में कोई नहीं रहता। वार्ड पार्षद बिट्टू कुमार के अनुसार खाली करवाए गए मकानों के साथ कई घर ऐसे हैं जिनमें लोग रह रहे हैं। इन्हें अभी कोई खतरा नहीं है, लेकिन बारिश के पानी की सही निकासी न होने के कारण यहां फिर भूस्खलन का खतरा पैदा हो गया है। कहा कि गरीबों के इस क्षेत्र में नगर निगम ने डंगे लगाना तो दूर, नालियां तक पक्की नहीं करवाई हैं। इस बरसात के लिए भी प्रशासन ने कोई तैयारी नहीं की। अब मजबूरन जिला प्रशासन के पास जाकर मदद मांगनी पड़ी है। कई घरों के आगे तिरपाल लगा दिए गए हैं ताकि पानी इसमें न रिस सके।
शहर के इन इलाकों में भी भूस्खलन
शहर के विकासनगर पेट्रोल पंप के पास भी एनएच किनारे लगातार पहाड़ी दरक रही है। पटयोग, खलीनी में भी इस सीजन में भूस्खलन की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। हालांकि, अभी इससे ज्यादा नुकसान नहीं हुआ है लेकिन लगातार हो रही बारिश से लोगों को चिंता सता रही है।
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प्रशासन ने भेजे तिरपाल, लोगों के घरों के आगे लगाए
पिछले साल 15 अगस्त को स्लॉटर हाउस समेत ढह गए थे आधा दर्जन मकान
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। आपदा प्रभावित राजधानी के कृष्णानगर क्षेत्र में भारी बारिश के कारण फिर से भूस्खलन का खतरा पैदा हो गया है। घरों-रास्तों में निकासी व्यवस्था ठीक न होने के कारण बारिश का पानी लगातार इस इलाके में जा रहा है। इससे स्थानीय लोग फिर से डर गए हैं।
विष्णु मंदिर के साथ लगती काॅलोनी में भूस्खलन के खतरे को देखते हुए जिला प्रशासन ने तिरपाल लगा दिए हैं। बीते साल 15 अगस्त को इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर भूस्खलन हुआ था। इसमें स्लॉटर हाउस समेत आधा दर्जन मकान ढह गए थे। मौके पर आठ से ज्यादा मकानों को खतरा पैदा हो गया था जिन्हें खाली करवाया गया है। अब इन मकानों में कोई नहीं रहता। वार्ड पार्षद बिट्टू कुमार के अनुसार खाली करवाए गए मकानों के साथ कई घर ऐसे हैं जिनमें लोग रह रहे हैं। इन्हें अभी कोई खतरा नहीं है, लेकिन बारिश के पानी की सही निकासी न होने के कारण यहां फिर भूस्खलन का खतरा पैदा हो गया है। कहा कि गरीबों के इस क्षेत्र में नगर निगम ने डंगे लगाना तो दूर, नालियां तक पक्की नहीं करवाई हैं। इस बरसात के लिए भी प्रशासन ने कोई तैयारी नहीं की। अब मजबूरन जिला प्रशासन के पास जाकर मदद मांगनी पड़ी है। कई घरों के आगे तिरपाल लगा दिए गए हैं ताकि पानी इसमें न रिस सके।
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शहर के इन इलाकों में भी भूस्खलन
शहर के विकासनगर पेट्रोल पंप के पास भी एनएच किनारे लगातार पहाड़ी दरक रही है। पटयोग, खलीनी में भी इस सीजन में भूस्खलन की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। हालांकि, अभी इससे ज्यादा नुकसान नहीं हुआ है लेकिन लगातार हो रही बारिश से लोगों को चिंता सता रही है।
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