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Cyber Crime: फोन में डाउनलोड एप से ठगों की आप पर नजर, सर्च इंजन भी हो रहा ट्रैक; ऐसे हो रही ठगी

Wed, 09 Apr 2025 07:28 AM IST
शाहरुख खान देवेंद्र ठाकुर, अमर उजाला, शिमला
देवेंद्र ठाकुर, अमर उजाला, शिमला Published by: शाहरुख खान Updated Wed, 09 Apr 2025 07:28 AM IST
सार

फोन में डाउनलोड एप से ठगों की आप पर नजर है। सर्च इंजन भी ट्रैक हो रहा है। नाम-पता, आधार और बैंक खाते, क्रेडिट, प्रीपेडकार्ड का सीरियल नंबर और सीवीवी तक साइबर ठगों के पास होता है।

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Cyber crime Thugs keep an eye on you through app downloaded in phone search engines also being tracked
Cyber Crime - फोटो : FREEPIK

विस्तार

एंड्रॉयड फोन हाथ में आने से हर व्यक्ति की पहुंच बढ़ गई है, लेकिन इससे लोग साइबर ठगों के निशाने पर भी आ गए हैं। मोबाइल में डाउनलोड एप से भी ठग आप पर नजर रख रहे हैं। सर्च इंजन से भी आपको ट्रैक किया जा रहा है।
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साइबर अपराध विशेषज्ञों का कहना है कि ठगों के पास लोगों के नाम-पते के साथ उनका ईमेल आईडी, फोन व आधार नंबर ही नहीं, क्रेडिट कार्ड, प्रीपेडकार्ड का सीरियल नंबर और सीवीवी नंबर जैसी निजी जानकारियां भी हैं। ये सूचनाएं साइबर अपराधी बैंकों, फोन में डाउनलोड एप और शॉपिंग साइटों से हासिल कर रहे हैं। 
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यही नहीं, साइबर ठग ब्राउजर में सेव ऑटो फिल डाटा भी चुरा रहे हैं। ऐसे में जब साइबर अपराधी सीबीआई, ईडी और कस्टम विभाग समेत बैंक अधिकारी बनकर फोन करते हैं तो लोग उनके पास मौजूद निजी जानकारियों को सुनकर विश्वास कर लेते हैं। 
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हिमाचल विश्वविद्यालय के यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के निदेशक अमरजीत सिंह का कहना है कि लोगों को लालच देकर या डराकर ठगा जा रहा है। ऐसे में कोई भी एप डाउनलोड करने से पहले सी डिटेल पर जाकर जरूर जांच लें कि एप आपसे किस तरह की जानकारियों का एक्सेस मांग रहा है।

ऐसे हो रही ठगी
क्लिक करते ही सोशल मीडिया अकाउंट हैक

साइबर ठग धोखाधड़ी के लिए एप्लीकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस (एपीआई) को प्रलोभनों वाले मैसेज की आड़ में भेजते हैं। उपहार, लॉटरी जीतने या बैंक के नाम पर अलर्ट आता है। जैसे ही मैसेज पर क्लिक करते हैं, सोशल मीडिया अकाउंट हैक हो जाता है। ईकेवाईसी के लिंक में एक क्लिक से ही अकाउंट हैक करके सोलन के व्यक्ति से 12 लाख रुपये लूट लिए गए।
 

कॉल फॉरवर्डिंग और मर्ज करके भी ठगी
कॉल फॉरवर्डिंग से साइबर ठग आपके ओटीपी तक पहुंच रहे हैं। आपको मोबाइल नंबर पर # के साथ कुछ अंक डायल करने के लिए कहते हैं। इससे कॉल कंडिशनली फॉरवर्ड हो जाती है। इसका फायदा उठाकर ठग उस समय ओटीपी मंगवाते हैं, जब आपका फोन बिजी हो। इससे ओटीपी ठगों के पास चला जाता है। दो इनकमिंग कॉल के दौरान तीसरी कॉल मर्ज करके भी ठगी हो रही है।
 

वॉइस मेल तकनीक का दुरुपयोग
आईटी कंपनी चला रहे साइबर एक्सपर्ट अजय कुमार का कहना है कि अपराधी आपके फोन पर वॉइस मेल को इनेबल कर देते हैं। आपके बिजी होने पर वॉइस मैसेज साइबर अपराधी के बताए नंबर पर चला जाएगा। इसका फायदा उठाकर साइबर ठग उस समय ओटीपी मंगवाएंगे, जब आप व्यस्त होंगे। वॉइस मेल इनेबल होने की वजह से ओटीपी वॉइस रिकॉर्डिंग में रिकॉर्ड हो जाएगा। इसे चुराकर आपके खाते से पैसे निकल जाएंगे।

गेमिंग एप अनसेफ  
आपके फोन पर बच्चे कई गेमिंग एप डाउनलोड कर देते हैं। कई गेम में मल्टी चेट की सुविधा होती है। इससे आपके बच्चे से कोई भी किसी भी तरह का काम करवा सकता है। कई गेम में मल्टी प्लेयर फीचर होता है। इसमें दूसरी ओर कोई भी व्यक्ति आपके बच्चे से बात कर सकता है। इस तरह की गेम असुरक्षित होती हैं। ऐसे एप आपकी स्क्रीन शेयर कर सकते हैं, जिससे आपका ओटीपी साइबर ठगों तक पहुंच सकता है।
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