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Shimla News: हनुमान अंश फिल्म के बीच शिमला से निकली बाबा नीम करौली की अनसुनी कहानी
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कच्ची घाटी में जिस जगह बाबा ने कुटिया बनाकर महसूस की थी दिव्य अनुभूति, वहीं आज खड़ा है भव्य संकटमोचन मंदिर
चीड़ के जंगलों में बाबा नीम करौली ने बिताए थे कुछ दिन, आज देशभर में गूंज रहा बाबा का नाम
भारती शर्मा
शिमला। देशभर में बाबा नीम करौली के जीवन पर आधारित फिल्म हनुमान अंश की चर्चा के बीच राजधानी शिमला का संकटमोचन मंदिर एक बार फिर सुर्खियों में है। शिमला-कालका राष्ट्रीय राजमार्ग पर कच्ची घाटी की तलहटी में चीड़ के जंगलों के बीच स्थित यह वही पावन स्थल है जहां बाबा नीम करौली ने अपनी कुटिया बनाई थी और उन्हें इस भूमि में आध्यात्मिक ऊर्जा का दिव्य अनुभव हुआ था। करीब 1850 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह मंदिर आज शिमला की धार्मिक पहचान के साथ-साथ बाबा नीम करौली की आध्यात्मिक विरासत का भी अहम केंद्र बन चुका है। 1960 के दशक के शुरुआती वर्षों में सुप्रसिद्ध संत बाबा नीम करौली शिमला पहुंचे थे। उन्होंने कई दिन यहां चीड़ के जंगलों में प्रवास किया और उस स्थान पर अपनी कुटिया बनाई जहां आज भव्य संकट मोचन मंदिर स्थापित है। इसी दौरान बाबा को अनुभूति हुई कि यह भूमि आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण है। बाबा ने विचार किया कि इस पवित्र स्थान पर श्रीराम के अनन्य भक्त भगवान हनुमान का मंदिर स्थापित किया जाना चाहिए। उनकी इसी प्रेरणा ने आगे चलकर संकटमोचन मंदिर के निर्माण की नींव रखी।
बाबा के जीवन पर बनी फिल्म हनुमान अंश इन दिनों देशभर में चर्चा में है। करीब दो करोड़ रुपये के बजट में बनी इस फिल्म ने करीब 30 दिनों में 100 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई कर ली है। फिल्म की लोकप्रियता के बीच बाबा नीम करौली से जुड़े स्थानों को लेकर भी लोगों की उत्सुकता बढ़ी है। ऐसे में शिमला का संकट मोचन मंदिर खास महत्व रखता है। संकटमोचन हनुमान के साथ श्रीराम, सीता माता, भगवान लक्ष्मण, भगवान शिव और भगवान गणेश के मंदिर भी स्थापित हैं। वहीं यहां पर बाबा नीम करौली को समर्पित एक मंदिर भी बनाया गया है।
इनसेट
1962 में शुरू हुआ मंदिर निर्माण, चार साल बाद हुई प्राण प्रतिष्ठा
बाबा नीम करौली महाराज की प्रेरणा से हिमाचल प्रदेश के तत्कालीन लेफ्टिनेंट गवर्नर दिवंगत बजरंग बहादुर सिंह भद्री ने वर्ष 1962 में मंदिर निर्माण कार्य शुरू करवाया। शुरुआत में यहां छोटा-सा हनुमान मंदिर बनाया गया। इसके बाद 21 जून 1966 को विधिवत मूर्ति प्रतिष्ठा का कार्य संपन्न हुआ। धीरे-धीरे श्रद्धालुओं की आस्था और जनसहयोग बढ़ता गया और छोटा सा मंदिर विशाल धार्मिक परिसर में विकसित हो गया। आज यहां वर्षभर श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है।
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कोट
संकटमोचन में बाबा कुछ समय के लिए कुटिया बनाकर ठहरे
हिमाचल प्रदेश में केवल संकटमोचन ही ऐसी एकमात्र जगह है जहां बाबा नीम करौली कुछ समय के लिए कुटिया बनाकर रहे थे। अधिकतर लोगों को हनुमान अंश फिल्म के बाद यह कहानी पता चली। संकटमोचन मंदिर इसलिए सिर्फ एक मंदिर नहीं, बल्कि बाबा नीम करौली की आध्यात्मिक साधना, हनुमान भक्ति और पहाड़ की प्राकृतिक शांति का ऐसा संगम है जिसकी कहानी आज भी श्रद्धालुओं को अपनी ओर खिंचती है।
अनूप चौहान, प्रबंधक, संकटमोचन मंदिर न्यास
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चीड़ के जंगलों में बाबा नीम करौली ने बिताए थे कुछ दिन, आज देशभर में गूंज रहा बाबा का नाम
भारती शर्मा
शिमला। देशभर में बाबा नीम करौली के जीवन पर आधारित फिल्म हनुमान अंश की चर्चा के बीच राजधानी शिमला का संकटमोचन मंदिर एक बार फिर सुर्खियों में है। शिमला-कालका राष्ट्रीय राजमार्ग पर कच्ची घाटी की तलहटी में चीड़ के जंगलों के बीच स्थित यह वही पावन स्थल है जहां बाबा नीम करौली ने अपनी कुटिया बनाई थी और उन्हें इस भूमि में आध्यात्मिक ऊर्जा का दिव्य अनुभव हुआ था। करीब 1850 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह मंदिर आज शिमला की धार्मिक पहचान के साथ-साथ बाबा नीम करौली की आध्यात्मिक विरासत का भी अहम केंद्र बन चुका है। 1960 के दशक के शुरुआती वर्षों में सुप्रसिद्ध संत बाबा नीम करौली शिमला पहुंचे थे। उन्होंने कई दिन यहां चीड़ के जंगलों में प्रवास किया और उस स्थान पर अपनी कुटिया बनाई जहां आज भव्य संकट मोचन मंदिर स्थापित है। इसी दौरान बाबा को अनुभूति हुई कि यह भूमि आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण है। बाबा ने विचार किया कि इस पवित्र स्थान पर श्रीराम के अनन्य भक्त भगवान हनुमान का मंदिर स्थापित किया जाना चाहिए। उनकी इसी प्रेरणा ने आगे चलकर संकटमोचन मंदिर के निर्माण की नींव रखी।
बाबा के जीवन पर बनी फिल्म हनुमान अंश इन दिनों देशभर में चर्चा में है। करीब दो करोड़ रुपये के बजट में बनी इस फिल्म ने करीब 30 दिनों में 100 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई कर ली है। फिल्म की लोकप्रियता के बीच बाबा नीम करौली से जुड़े स्थानों को लेकर भी लोगों की उत्सुकता बढ़ी है। ऐसे में शिमला का संकट मोचन मंदिर खास महत्व रखता है। संकटमोचन हनुमान के साथ श्रीराम, सीता माता, भगवान लक्ष्मण, भगवान शिव और भगवान गणेश के मंदिर भी स्थापित हैं। वहीं यहां पर बाबा नीम करौली को समर्पित एक मंदिर भी बनाया गया है।
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1962 में शुरू हुआ मंदिर निर्माण, चार साल बाद हुई प्राण प्रतिष्ठा
बाबा नीम करौली महाराज की प्रेरणा से हिमाचल प्रदेश के तत्कालीन लेफ्टिनेंट गवर्नर दिवंगत बजरंग बहादुर सिंह भद्री ने वर्ष 1962 में मंदिर निर्माण कार्य शुरू करवाया। शुरुआत में यहां छोटा-सा हनुमान मंदिर बनाया गया। इसके बाद 21 जून 1966 को विधिवत मूर्ति प्रतिष्ठा का कार्य संपन्न हुआ। धीरे-धीरे श्रद्धालुओं की आस्था और जनसहयोग बढ़ता गया और छोटा सा मंदिर विशाल धार्मिक परिसर में विकसित हो गया। आज यहां वर्षभर श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है।
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संकटमोचन में बाबा कुछ समय के लिए कुटिया बनाकर ठहरे
हिमाचल प्रदेश में केवल संकटमोचन ही ऐसी एकमात्र जगह है जहां बाबा नीम करौली कुछ समय के लिए कुटिया बनाकर रहे थे। अधिकतर लोगों को हनुमान अंश फिल्म के बाद यह कहानी पता चली। संकटमोचन मंदिर इसलिए सिर्फ एक मंदिर नहीं, बल्कि बाबा नीम करौली की आध्यात्मिक साधना, हनुमान भक्ति और पहाड़ की प्राकृतिक शांति का ऐसा संगम है जिसकी कहानी आज भी श्रद्धालुओं को अपनी ओर खिंचती है।
अनूप चौहान, प्रबंधक, संकटमोचन मंदिर न्यास