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विजिलेंस जांच में फंसे बड़े अफसर, चार्जशीट तैयार

Tue, 13 Oct 2015 11:56 AM IST
Updated Tue, 13 Oct 2015 11:56 AM IST
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vigilence completed inquiry in AN sharma case.

विजिलेंस ने अवैध संपत्ति को वैध बनाने के आरोप में रिटायर्ड आईपीएस एएन शर्मा, एचएएस एमपी सूद, बिल्डर अजय गोयल, नगर निगम के एक अधिकारी और संपत्ति के मालिक रह चुके हमिंद्र लाल के खिलाफ चार्जशीट तैयार कर दी है।

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चालान को कोर्ट में पेश करने के लिए विजिलेंस ने मामले में आरोपी एचएएस अफसर एमपी सूद के खिलाफ सरकार से अभियोजन मंजूरी मांगी है। ब्यूरो ने 2013 में हमिंद्र लाल के खिलाफ मामला दर्ज किया था। शिमला में उपायुक्त रह चुके स्वर्गीय महेंद्र लाल के बेटे हमिंद्र लाल की संपत्ति से जुड़ा यह मामला है।
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कसुम्पटी एरिया के नजदीक निर्माण के बाद यह जांच शुरू हुई थी। एसपी (एसआईयू) डीडब्ल्यू नेगी ने कहा कि चार्जशीट में नगर निगम के दो पूर्व आयुक्त एएन शर्मा, एमपी सूद, अजय गोयल, हमिंद्र लाल और नगर निगम के एक तत्कालीन अधिकारी को आरोपी बनाया है। चार्जशीट तैयार हो गई तैयार है। अभियोजन मंजूरी के लिए फाइल सरकार को भेजी गई है।
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जानिए ये है पूरा मामला

vigilence completed inquiry in AN sharma case.

बिल्डर अजय गोयल के नाम पर संपत्ति की पावर ऑफ अटार्नी रही है। जिस जगह पर मकान बना, वह एरिया 2007 से पहले टीसीपी में था। इसके बाद यह नगर निगम में मर्ज हो गया। उस समय नगर निगम आयुक्त एएन शर्मा थे।

उनकी कोर्ट ने ऑर्डर दिया कि इस मकान की बेसमेंट को सील कर दिया जाए। बेसमेंट के साथ भविष्य में छेड़छाड़ की जाती है तो मकान के एटिक को तोड़ दिया जाएगा। इस मकान की तीन मंजिलों को पहले ही अलग अलग लोगों को बेच दिया गया था। इस दौरान मकान की बेसमेंट खोलने की शिकायत नगर निगम के पास आई।

इस पर मामले की प्रोसेडिंग शुरू कर दी। इसी दौरान मकान के एटिक में रहने वाला व्यक्ति नगर निगम के सामने आया और कहा कि उसने एटिक (छत) खरीदी है। इस खुलासे के बाद नगर निगम हैरान रह गया कि किसी छत को कोई कैसे बेच सकता है। कैसे राजस्व महकमे ने इसकी रजिस्ट्री कर दी। आरोप है कि बिल्डर ने एटिक की रजिस्ट्री अपनी पत्नी के नाम करवा ली थी।

इस खुलासे के बाद नगर निगम के तत्कालीन आयुक्त एएन शर्मा ने आरोपी बिल्डर के खिलाफ पुलिस में मुकदमा करने के निर्देश दिए। साल 2009 में अवैध मकान के कुछ हिस्से को वैध करने के लिए रिटेंशन पॉलिसी का सहारा लिया गया।

नगर निगम में चलता रहा पूरा मामला

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इस संपत्ति के एटिक हिस्से को भी नियमित करने के लिए आवेदन किया गया। इस दौरान मामला चलता रहा और एएन शर्मा रिटायर हो गए। इनके बाद एमपी सूद निगम आयुक्त बनकर आए। इनके समय में एटिक को नियमित करने के लिए सिंगल अंब्रेला कमेटी में मामला आया। आवेदक की ओर से नक्शे की मंजूरी मांगी गई। इस कमेटी में नगर निगम के अलावा टीसीपी और अर्बन डेवलपमेंट के अधिकारी भी रहते हैं।

सभी की सहमति के बाद मंजूरी का कोई निर्णय लिया जाता है। कमेटी के सदस्यों ने एटिक के नक्शे में एक आपत्ति उठाने के बाद नक्शे को दोबारा दाखिल करने को कहा। आवेदक ने आपत्ति को दूर करने के बाद नक्शा दाखिल किया, उसे मंजूरी दे दी गई। लेकिन इस बार फाइल नगर निगम आयुक्त तक नहीं पहुंची। इसके बाद शिकायत पर 2013 में मामला विजिलेंस तक पहुंच गया।

सूद बोले - आरोपी बनाने पर हैरान हूं

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सूचना एवं जन संपर्क विभाग के निदेशक एमपी सूद ने कहा कि उनके नगर निगम आयुक्त बनने से पहले ही इस मामले में रिटेंशन पॉलिसी के तहत नियमित किया जा चुका था। केवल सिंगल अंब्रेला कमेटी में एटिक का नक्शा पास करवाने के लिए आवेदन आया था। कमेटी के सभी सदस्यों की मंजूरी के बाद नक्शे में एक आपत्ति लगाई गई थी।

उस आपत्ति को दूर कर नक्शे को दोबारा जमा करवाने के लिए आवेदक को कहा गया था। इसके बाद आवेदक ने आपत्ति दूर की होगी और उसका नक्शा एपी ब्रांच से मंजूर हो गया होगा। उनके पास दोबारा नक्शे की फाइल नहीं आई थी। वे खुद हैरान हैं कि विजिलेंस उन्हें इस मामले में आरोपी क्यों कह रही है।

शर्मा बोले - राजनीतिक द्वेष से बनाया मामला
रिटायर्ड आईपीएस अफसर और पूर्व कमिश्नर एएन शर्मा ने कहा कि विजिलेंस ने उन पर यह मामला राजनीतिक द्वेष से बनाया है। उनके समय में यह मामला उनकी कोर्ट में आया था। बेसमेंट को सील करने के आदेश उन्हीं की कोर्ट ने दिए थे।

साथ ही यह भी निर्देश दिए गए थे कि अगर यह बेसमेंट की सील को तोड़ता है तो मकान की एटिक को तोड़ दिया जाएगा। बाद में पता चला कि एटिक को भी बेच दिया गया है। इस जानकारी के बाद नगर निगम ने बिल्डर अजय गोयल के खिलाफ पुलिस में मुकदमा दर्ज करवाया। विजिलेंस जानबूझकर निशाना बना रहा है।

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