शादी का झांसा देकर बनाए संबंध, फिर वायरल किया वीडियो
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हिमाचल सरकार ने भले ही महिलाओं की सुरक्षा और उन्हें न्याय दिलवाने को महिला थाने खोले हों, लेकिन एफआईआर दर्ज होने के तीन-तीन माह बाद भी पीड़िता की परेशानी का निराकरण नहीं हो पा रहा। पुलिस फोरेंसिक लैब से जांच रिपोर्ट आने का हवाला देकर पल्ला झाड़ रही है।
सवाल उठता है कि अगर सामान्य मामलों की तरह महिलाओं के मामलों की जांच करनी है तो महिला थाना खोलना बेमानी है। ताजा मामला राजधानी शिमला स्थित प्रदेश के पहले महिला पुलिस थाना का है। मैहली निवासी युवती की करीब छह महीने पहले मुजफ्फरनगर (यूपी) के यहां रह रहे एक युवक से दोस्ती हुई।
दोस्ती प्यार में बदल गई। कुछ समय बाद युवक ने युवती और उसके परिवार से शादी का प्रस्ताव रखा। युवक दूसरे धर्म से ताल्लुक रखता था, इसलिए युवती और उसके परिजनों ने सोचने को समय मांगा। युवती और युवक का मिलना जारी रहा।
अश्लील वीडियो की बात कह प्रताड़ित करता रहा युवक
कुछ समय बाद युवक ने बात करना बंद कर दिया। युवती वजह समझ पाती, उससे पहले लोगों ने अश्लील वीडियो का हवाला देते हुए उसे प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। बदनामी के डर से युवती कुछ समय तक चुप रही। बात हद से बढ़ी तो युवती ने महिला थाना पुलिस से मदद की गुहार लगाई।
महिला थाना पुलिस ने पहले तो मामले में टालमटोल किया, लेकिन सुनवाई न होने पर युवती ने एसपी से शिकायत की। एसपी के निर्देश पर महिला थाना पुलिस ने मामला दर्ज किया, लेकिन महिला थाना पुलिस की लापरवाही शुरू हो गई।
महिला पुलिस ने पीड़िता की फोटो और कथित वीडियो देखकर उसे परेशान करने वालों के मोबाइल जब्त कर फोरेंसिक जांच को भेजे। इसके बाद से महिला थाना पुलिस लैब से जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रही है। इस दौरान युवती को लोगों की ओर से परेशान करने का क्रम भी जारी है।
युवती को मानसिक प्रताड़ना और अपमान का गंभीर मामला होने के बावजूद महिला पुलिस की इस उदासीनता ने महिला थाना होने को ही बेमानी साबित कर दिया है। खास बात यह है कि महिला थाना पुलिस सिर्फ दर्ज एफआईआर के बिंदुओं पर जांच कर रही है, लेकिन जिस युवक ने युवती का वीडियो बनाया और वायरल किया उसकी न तो जांच कर रही है और न ही उस पर कार्रवाई करने की सोच रखती है।
युवती बोली, क्या मरने के बाद करेंगे मदद
मामले की जांच कर रही हेड कांस्टेबल संजना कुमारी ने बताया कि मामले दर्ज होने के तुरंत बाद आरोपियों के मोबाइल सीज कर जांच को फोरेंसिक लैब भेजे हैं। रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई होगी। अश्लील वीडियो के बारे में पूछने पर बताया कि एफआरआर में सिर्फ पड़ोसी द्वारा वीडियो देखकर परेशान करने की बात सामने आई है। ऐसे में आरोपों की ही जांच की जा रही है।
युवती बोली, क्या मरने के बाद करेंगे मदद
छह महीने से अपमान झेल रही युवती भी पुलिस के इस उदासीन रवैये से निराश है। कहती है कि चार महीने से वह शिकायत कर ही है, लेकिन उसकी मदद करने कोई नहीं आ रहा। महिला थाने में मदद की उम्मीद थी, लेकिन आजतक वह भी जांच के नाम पर खानापूर्ति कर रहे हैं। कोई भी कार्रवाई नहीं कर रहे। शायद वह भी मेरे मरने का इंतजार कर रहे हैं।