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खाकी को किया दागदार, अब जेल में गुजरेंगे दस साल
Updated Mon, 24 Mar 2014 07:45 PM IST
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विशेष न्यायाधीश राकेश चौधरी की अदालत ने एनडीपीएस एक्ट 1985 की धारा 20 के तहत एक कांस्टेबल सहित दो व्यक्तियों को दोषी करार दिया है।
अदालत ने दोषी कांस्टेबल नरेंद्र सिंह पुत्र महेंद्र सिंह और राकेश कुमार पुत्र हरनाम सिंह दोनों निवासी कोलापुर तहसील रक्कड़ (कांगड़ा) को 10 वर्ष कठोर कारावास और एक-एक लाख रुपये जुर्माना भरने की सजा सुनाई है।
जुर्माना अदा न करने पर दोषियों को एक साल का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।
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अदालत ने दोषी कांस्टेबल नरेंद्र सिंह पुत्र महेंद्र सिंह और राकेश कुमार पुत्र हरनाम सिंह दोनों निवासी कोलापुर तहसील रक्कड़ (कांगड़ा) को 10 वर्ष कठोर कारावास और एक-एक लाख रुपये जुर्माना भरने की सजा सुनाई है।
जुर्माना अदा न करने पर दोषियों को एक साल का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।
चरस तस्करी में दोनों दोषी करार दिए
जिला न्यायवादी एनसी घई ने बताया कि 11 जुलाई, 2013 को एएसआई मेहरदीन दिन के समय बंगाणा के तुतडू़ के पास चराड़ा में गश्त पर थे।
उन्होंने चेकिंग के लिए आल्टो कार एचपी 72-5378 को रोका। पुलिस को देखकर कांस्टेबल नरेंद्र मौके से भाग निकला।
कार में सवार राकेश कुमार को पुलिस ने दबोच लिया। कार की तलाशी लेने पर पुलिस ने थैले से चरस बरामद की। तोलने पर यह खेप डेढ़ किलो पाई गई।
पुलिस ने चरस को कब्जे में लेकर राकेश को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ के बाद कांस्टेबल नरेंद्र सिंह को भी धर दबोचा और मामला दर्ज किया।
पांच अक्तूबर, 2013 को पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ चालान पेश किया। अभियोजन पक्ष से 19 एवं बचाव पक्ष की ओर से दो गवाह पेश किए।
अदालत ने तमाम दलीलें सुनने के बाद दोनों को दोषी करार दिया। लोक अभियोजक शरद लगवाल ने केस की पैरवी की।
उन्होंने चेकिंग के लिए आल्टो कार एचपी 72-5378 को रोका। पुलिस को देखकर कांस्टेबल नरेंद्र मौके से भाग निकला।
कार में सवार राकेश कुमार को पुलिस ने दबोच लिया। कार की तलाशी लेने पर पुलिस ने थैले से चरस बरामद की। तोलने पर यह खेप डेढ़ किलो पाई गई।
पुलिस ने चरस को कब्जे में लेकर राकेश को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ के बाद कांस्टेबल नरेंद्र सिंह को भी धर दबोचा और मामला दर्ज किया।
पांच अक्तूबर, 2013 को पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ चालान पेश किया। अभियोजन पक्ष से 19 एवं बचाव पक्ष की ओर से दो गवाह पेश किए।
अदालत ने तमाम दलीलें सुनने के बाद दोनों को दोषी करार दिया। लोक अभियोजक शरद लगवाल ने केस की पैरवी की।