भाई की गवाही, बहन को मिला इंसाफ, पिता को उम्रकैद
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हिमाचल के ऊना में दुराचारी पिता को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। पिता को सजा दिलवाने में बेटे की गवाही महत्वपूर्ण रही। इस तरह से दुराचार की शिकार नाबालिग को इंसाफ मिला तो वही दोषी पिता को उसके कुकर्मों की सजा।
स्पेशल कोर्ट के न्यायाधीश सीएल कोछड़ ने बेटी से दुराचार के मामले में दोष साबित होने पर पिता को उम्र कैद ही सजा सुनाई। कलयुगी पिता ने उस समय पिछले वर्ष अपनी नाबालिग बेटी को हवस का शिकार बनाया जब वह घर पर अकेली थी।
अदालत ने दोषी को पोक्सो एक्ट की धारा छह के तहत उम्रकैद और दस हजार रुपये का जुर्माना अदा करने की सजा सुनाई है। जुर्माना अदा न करने की सूरत में दोषी को छह माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
भाई ने दरिंदे पिता से छुड़ाया
लोक अभियोजक एवं जिला उप न्यायवादी अशोक कुमार धीमान ने बताया कि 18 सितंबर 2013 को 14 वर्षीय पीडि़ता स्कूल से घर पहुंची। वह आराम करने के लिए चारपाई पर सो गई। इसी दौरान पिता आंगन में सोया था। कुछ देर बाद वह कमरे में दाखिल हुआ और दुराचार कर डाला। इसी दौरान पीडि़ता का भाई वहां पहुंचा और उसने बहन को पिता के चंगुल से छुड़वाया।
21 सितंबर 2013 को पीडि़ता के भाई ने पंचायत प्रधान को घटना के बारे में बताया। प्रधान पीडि़ता को पुलिस थाने ले गया। अभियोजन पक्ष की ओर से 13 गवाह पेश किए गए। अदालत ने पोक्सो एक्ट की धारा 6 के तहत दोषी करार देते हुए आराोपी पिता काे उम्रकैद, 10 हजार रुपये जुर्माना अदा करने की सजा सुनाई गई।
आईपीसी की धारा 506 के तहत 1 साल की कठोर कैद, 2 हजार रुपये जुर्माना, जुर्माना न देने पर 1 माह की साधारण कैद भुगतनी होगी। कोर्ट ने आदेश दिया है कि जुर्माना वसूले जाने पर 10 हजार रुपये पीडि़ता को मुआवजे के रूप में दिए जाएं।