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टेक्नोमैक घोटाला: 11 अफसरों की जल्द हो सकती है गिरफ्तारी
Mon, 07 Jan 2019 12:34 PM IST
अरविन्द ठाकुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Mon, 07 Jan 2019 12:34 PM IST
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प्रदेश के बहुचर्चित 2100 करोड़ रुपये से ज्यादा के टेक्नोमैक घोटाले की जांच कर रही सीआईडी के निशाने पर अब राज्य कर एवं आबकारी विभाग के 11 वर्तमान और पूर्व अधिकारी हैं। जांच एजेंसी इन सभी आरोपियों को जल्द गिरफ्तार करने की कोशिश कर रही है। लेकिन कुछ आरोपियों ने हाईकोर्ट में अंतरिम जमानत याचिका दायर की है, जिस पर सुनवाई चल रही है।
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वहीं, जांच अधिकारी भी कोर्ट में आरोपियों की याचिका को चुनौती दे रहे हैं ताकि इन्हें जमानत न मिल सके। जांच अधिकारी हर हाल में इनकी गिरफ्तारी चाहते हैं ताकि इनसे अहम सुराग हासिल किए जा सकें और पूछताछ के बाद पैसे के बंटवारे की प्रक्रिया से पर्दा हट सके। दरअसल, जांच एजेंसी ने अभी तक आठ आरोपियों की गिरफ्तारी की है।
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इनमें कंपनी के कई आला अधिकारियों के अलावा कुछ ठेकेदार और कबाड़ी भी शामिल हैं। चूंकि पीसी एक्ट में हुए संशोधन के चलते अब सरकारी व रिटायर्ड मुलाजिम के खिलाफ जांच या कार्रवाई करने से पहले सरकार से अनुमति लेना जरूरी है। इसी वजह से सरकारी तंत्र के आरोपियों पर हाथ डालने में सीआईडी को देर हो रही है। सूत्रों के अनुसार जांच अधिकारियों ने सभी आरोपियों के अभियोजन स्वीकृति के लिए संबंधित विभाग को पत्र पहले ही लिख दिया था।
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अब वहां से मंजूरी मिलने और हाईकोर्ट में लंबित जमानत याचिका पर निर्णय के बाद जांच एजेंसी एक्शन लेगी। नाम न लिखने की शर्त पर एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि आरोपियों पर करोड़ों रुपये बतौर घूस लेने की आशंका है। यह पैसा नकली दस्तावेजों को असली के तौर पर स्वीकार करने और कर चोरी के खेल में प्रत्यक्ष रूप से साथ देने के लिए लिया गया।
2200 करोड़ के बैंक फ्रॉड की जांच से भी बढ़ेंगी मुश्किलें
जांच अधिकारियों का कहना है कि 2100 करोड़ रुपये के कर चोरी मामले की जांच में सीआईडी के हाथ आरोपियों की गर्दन तक पहुंच चुके हैं। इसी फर्जी लेनदेन की बदौलत कंपनी द्वारा विभिन्न बैंकों से लिए गए करीब 2200 करोड़ के लोन की जांच कर रही सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय की जद में भी जल्द ये अधिकारी आएंगे। ऐसा इसलिए है क्योंकि फर्जी दस्तावेजों को असल के तौर पर स्वीकार करने की वजह से ही बैंकों से लोन लेने में आसानी हुई।