एसआईटी करेगी बसपा नेता की हत्या मामले की जांच
उपमंडल के बकरास में बसपा नेता केदार सिंह जिंदान की कथित हत्या मामले की जांच एसआईटी करेगी। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक वीरेंद्र सिंह ठाकुर की अगुवाई में एचएचओ राजगढ़, एसएचओ माजरा, पांवटा थाना से एसआई समेत कुल छह लोगों की टीम सोमवार को बकरास पहुंची।
टीम ने इलाके में लोगों से पूछताछ शुरू कर दी है। मामले में लोगों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। पुलिस अधीक्षक रोहित मालपानी खुद शिलाई में डटे हैं। इलाके में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस फोर्स तैनात की गई है।
सात सितंबर की सुबह बकरास के पास बसपा नेता केदार सिंह जिंदान का शव लहूलुहान अवस्था में मिला था। छानबीन के बाद पुलिस ने भादंसं की धारा 302, 34 और एट्रोसिटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कर दो आरोपियों को गिरफ्तार किया।
पुलिस रिमांड पर चल रहे आरोपियों से पुलिस पूछताछ कर रही है। मामले की निष्पक्ष जांच को एएसपी वीरेंद्र सिंह ठाकुर के नेतृत्व में गठित टीम में विभिन्न थानों के आईओ और एचएचओ शामिल किए गए हैं।
एसआईटी में शिलाई थाना से किसी भी पुलिस कर्मचारी या अधिकारी को शामिल नहीं किया गया है। एसपी रोहित मालपानी ने बताया कि हत्या मामले की प्रारंभिक जांच शुरू कर दी है।
थाना के बाहर पहुंची भीड़, उठाई अपनी मांगें
एसआईटी का नेतृत्व एएसपी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मौके पर एफएसएल और मेकेनिकल जांच भी करवाई गई है। एफएसएल की टीम ने कुछ सैंपल जुटाए हैं। पोस्टमार्टम की रिपोर्ट का इंतजार है।
बकरास में एसआईटी ने करीब 15 लोगों से सोमवार को पूछताछ की। राजपूत समाज एवं सर्वदलीय बैठक के बाद लोगों की भीड़ शिलाई थाना के बाहर पहुंची और मामले की निष्पक्षता से जांच की मांग की।
यह मांग भी दोहराई कि जब तब पुलिस को कोई ठोस सबूत नहीं मिलते, मामले से धारा 302 और एट्रोसिटी की धारा को हटाया जाए। कुछ लोगों ने शिलाई में भारी पुलिस फोर्स की तैनाती पर भी आपत्ति जताई। उनका कहना था कि आखिर पुलिस फोर्स की क्या जरूरत पड़ी? सभी लोग शांतिप्रिय हैं।
अधिवक्ता जिंदान की मौत पर वकीलों ने मांगी निष्पक्ष जांच
हाईकोर्ट बार एसोसिएशन की सोमवार को आपातकालीन बैठक अधिवक्ता बीएम चौहान की अध्यक्षता में हुई। इसमें सिरमौर जिले के शिलाई निवासी केदार सिंह जिंदान की शुक्रवार को की गई हत्या पर रोष प्रकट किया गया।
हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के सदस्य के नाते वकीलों ने सोमवार को अदालती कार्यवाई से खुद को अलग रखा। वकीलों ने इस हत्याकांड की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए हाईकोर्ट से स्वत: संज्ञान लेने की अपील की।
बैठक में दलगत राजनीति से ऊपर उठकर पीड़ितों को न्याय दिलाने का आह्वान करते हुए निर्णय लिया गया कि हाईकोर्ट के समक्ष वरिष्ठ वकील मामले की जांच की दिशा पर नजर रखते हुए पैरवी करेंगे। एसोसिएशन स्वयं भी एक रिट याचिका दायर करेगी।
इसका दायित्व अधिवक्ता रजनीश को सौंपा गया। वकीलों ने पुलिस जांच पर शंका जताते हुए किसी निष्पक्ष ऐजेंसी से इस हत्या की जांच करवाने की मांग की। एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री, गृहमंत्री और डीजीपी को ज्ञापन सौंपने का फैसला भी लिया।
वकीलों ने उन सभी दोषी अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्यवाई की मांग भी की जिन्होंने समय रहते जिंदान को सुरक्षा मुहैया नहीं करवाई। स्थानीय पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों के तुरंत तबादले व गवाहों को उचित सुरक्षा मुहैया करवाने की मांग भी की गई है।
जिंदान हत्याकांड मामले में एससी-एसटी एक्ट के तहत समय पर केस दर्ज न करने पर भी आपत्ति प्रकट की गई। चर्चा के दौरान बताया गया कि जिंदान शिलाई के आरटीआई एवं सामाजिक कार्यकर्ता थे।
जिन्होंने जनहित में कई भ्रष्टाचार उजागर किए थे। प्रशासन से मांग की गई कि दिवंगत परिवार को तत्काल फौरी राहत और सुरक्षा दी जाए।