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आरटीआई में जानकारी छिपाने पर अफसरों को पैनल्टी

Tue, 20 May 2014 08:43 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, शिमला
टीम डिजिटल/अमर उजाला, शिमला Updated Tue, 20 May 2014 08:43 PM IST
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RTI penalties officers to hide information

राज्य सूचना आयोग ने आरटीआई अधिनियम के प्रावधानों की अवहेलना करने पर वन निगम धर्मशाला में तैनात मंडलीय प्रबंधक हिमाचल प्रदेश वन्य सेवा (एचपीएफएस) अधिकारी डीके खट्टा, सहायक प्रबंधक विधि चंद और डीलिंग असिस्टेंट पूर्णिमा सूद को 25 हजार रुपये की पेनल्टी लगाई है।

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इसे तीनों को बराबर-बराबर हिस्सों में राज्य सरकार के कोष में जमा करने के आदेश दिए गए हैं। आयोग ने यह निर्णय ओंकार सिंह चंदेल बनाम मंडलीय प्रबंधक वन निगम की अपील पर सुनाया है। यह आदेश राज्य मुख्य सूचना आयुक्त भीम सेन की कोर्ट ने जारी किए हैं।
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आयोग ने अपने फैसले में कहा है कि ऐसा प्रतीत होता है कि जानबूझकर पूरी जानकारी नहीं दी गई। इसके तहत पैनल एक्शन किया जाना चाहिए। आयोग ने एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के इस पूरे प्रकरण में शुमार होने को लेकर कहा कि ऐसे कर्मचारी से तृतीय श्रेणी के कार्यों को लेकर अवगत नहीं करवाया जा सकता है।
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देरी की यह अवधि 100 दिन से ज्यादा है। इसके हिसाब से अधिकतम पेनल्टी 25000 रुपये की लगाई जा सकती है। आरटीआई एक्ट 2005 की धारा 20 के तहत यह पेनल्टी अधिकतम इतनी ही लगाई जा सकती है। आयोग ने कहा है कि पेनल्टी की यह राशि जनसूचना अधिकारी, सहायक प्रबंधक और सहायक प्रबंधक बराबर भाग में देंगे।


इसे सरकारी कोष में जमा करने को कहा गया है। इसके अतिरिक्त अपीलकर्ता को 3500 रुपये का मुआवजा देने के भी आदेश दिए गए हैं। यह अपीलकर्ता के अनुमानित खर्च के लिए देने को कहा गया है। इन्हीं आदेशों के साथ इस अपील को डिस्पोज ऑफ कर दिया गया है। आयोग को इस संबंध में एक पखवाड़े के भीतर कंप्लायेंस रिपोर्ट देने के भी आदेश दिए गए हैं।

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